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#श्री राधे बृजेश्वरी, रासेश्वरी श्रीराधा का विराटरूप दर्शन... उद्भव स्थित संहार:, कारिणीं क्लेश हारिणीम् । सर्व श्रेयश्करीं राधां , नतोऽहं कृष्ण वल्लभाम्।। नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।। श्री राधा मेरी स्वामिनी, मैं राधे कौ दास | जनम-जनम मोय दीजियो, श्री चरनन कौ वास || सब द्वारन कूँ छाँडि कै, आयौ तेरे द्वार | हे वृषभानु की लाड़ली, नैक मेरी ओर निहार || श्री राधा राधा रटत ही, सब बाधा मिट जाय | कोटि जनम की आपदा, श्री राधा नाम ते जाय || जीवन प्राण अब बन रह्यौ, नवल प्रिया सुख धाम | ब्रज वृन्दावन स्वामिनी, ललितादिक अभिराम || "नाम महाधन है अपनौ, नहिं दूसरी सम्पति और कमानी | छोड़ अटारी अटा जग के, हमको कुटिया ब्रिज माहिं बनानी | टूक मिलें ब्रिजवासिन के अरु सेवें सदा जमुना महारानी | औरन की परवाह नहीं, अपनी ठकुरानी श्री राधिका रानी || राधे राधे. जय श्रीराधे. .
श्री राधे - ShareChat