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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - a शब्दोंका जादू युगबोध रात भर अपने ही एकांत में मैं जागता रहा और रात भर खिलता रहा गुड़हल का एक फूल और सरहद पर चलती रही गोलियां। और मैं सोच रहा हूं चीँटियों के पैरों में रंग में डूबा " हुआ ब्रश बांध दूं और धरती भर जाए नीली पीली रेखाओं से, और रातरानी भर दे उन नीली पीली आड़ी तिरछी रेखाओं में गमकते हुए फूल। हैंकि रात भर बिछौना बन fa সুভন  बाजारों में बिछते रहे शरीर फिर सर्दी से कांपती रही एक भिखारन बुढ़िया যান ৪ং कि शरीर बिकने की एक उम्र होती है और उसके बाद आंख छोड़ने लगती है साथ और दीखना गहराने लग जाता है। और तब, जिनसे मैं छला गया और जो मुझे छलेंगे सब हो जाएंगे महत्वहीन कि मृत्यु को प्रतीक्षा में अर्थ सिर्फ उतना है দুর্য়ী जितनी चीँटियों के पांवों में हम बांध सके रंगों में डूबे हुए बश। - QR -प्रसाद चौबे , जौनपुर  01*-8~003 a शब्दोंका जादू युगबोध रात भर अपने ही एकांत में मैं जागता रहा और रात भर खिलता रहा गुड़हल का एक फूल और सरहद पर चलती रही गोलियां। और मैं सोच रहा हूं चीँटियों के पैरों में रंग में डूबा " हुआ ब्रश बांध दूं और धरती भर जाए नीली पीली रेखाओं से, और रातरानी भर दे उन नीली पीली आड़ी तिरछी रेखाओं में गमकते हुए फूल। हैंकि रात भर बिछौना बन fa সুভন  बाजारों में बिछते रहे शरीर फिर सर्दी से कांपती रही एक भिखारन बुढ़िया যান ৪ং कि शरीर बिकने की एक उम्र होती है और उसके बाद आंख छोड़ने लगती है साथ और दीखना गहराने लग जाता है। और तब, जिनसे मैं छला गया और जो मुझे छलेंगे सब हो जाएंगे महत्वहीन कि मृत्यु को प्रतीक्षा में अर्थ सिर्फ उतना है দুর্য়ী जितनी चीँटियों के पांवों में हम बांध सके रंगों में डूबे हुए बश। - QR -प्रसाद चौबे , जौनपुर  01*-8~003 - ShareChat