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#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - ल फर्क पडता है फर्क पडता है तब दिखाती हूँ ৩9 कोई फर्क पड़ता नहीं/ बहुत दुखता है जब दिखाती हूँ कोई दर्द नहीं/ बहुत कुछ कहना हो तो ओढ़ लेती हूँ खामोशी/ पास आना चाहती हूँ तो खुद को खींच लेती हूँ तुझ से दूर कितने रोडे अटकाती हूँ खुद को तेरी समझने की कोशिशों में। और फिर खुद ही लगा भी देती हूँ इल्जाम  कि तू तो मुझे समझता ही नहीं . 127 ऋतु जोशी नदी , धरती और समंदर  ल फर्क पडता है फर्क पडता है तब दिखाती हूँ ৩9 कोई फर्क पड़ता नहीं/ बहुत दुखता है जब दिखाती हूँ कोई दर्द नहीं/ बहुत कुछ कहना हो तो ओढ़ लेती हूँ खामोशी/ पास आना चाहती हूँ तो खुद को खींच लेती हूँ तुझ से दूर कितने रोडे अटकाती हूँ खुद को तेरी समझने की कोशिशों में। और फिर खुद ही लगा भी देती हूँ इल्जाम  कि तू तो मुझे समझता ही नहीं . 127 ऋतु जोशी नदी , धरती और समंदर - ShareChat