उत्कर्ष !!
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#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - कुछ इस तरह तुझे में अपना बना लूं॰ जो ट्ूटे न कभी ऐसा सपना बना लूं॰ चाहे जितनी मरतबा, z೬ নু ফ৪ী স্তহায লাহী # ঠক হক সাপনা অনা ২ু रंज है मुझे तेरी कुछ अधूरी ख्वाइशों का, सोचता हूं ट्ू२ के सितारों सा, तेरा सपना सजा दूं।। तमस kavyanjali kavyanjali tamas_ tamas: कुछ इस तरह तुझे में अपना बना लूं॰ जो ट्ूटे न कभी ऐसा सपना बना लूं॰ चाहे जितनी मरतबा, z೬ নু ফ৪ী স্তহায লাহী # ঠক হক সাপনা অনা ২ু रंज है मुझे तेरी कुछ अधूरी ख्वाइशों का, सोचता हूं ट्ू२ के सितारों सा, तेरा सपना सजा दूं।। तमस kavyanjali kavyanjali tamas_ tamas: - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - ल फर्क पडता है फर्क पडता है तब दिखाती हूँ ৩9 कोई फर्क पड़ता नहीं/ बहुत दुखता है जब दिखाती हूँ कोई दर्द नहीं/ बहुत कुछ कहना हो तो ओढ़ लेती हूँ खामोशी/ पास आना चाहती हूँ तो खुद को खींच लेती हूँ तुझ से दूर कितने रोडे अटकाती हूँ खुद को तेरी समझने की कोशिशों में। और फिर खुद ही लगा भी देती हूँ इल्जाम  कि तू तो मुझे समझता ही नहीं . 127 ऋतु जोशी नदी , धरती और समंदर  ल फर्क पडता है फर्क पडता है तब दिखाती हूँ ৩9 कोई फर्क पड़ता नहीं/ बहुत दुखता है जब दिखाती हूँ कोई दर्द नहीं/ बहुत कुछ कहना हो तो ओढ़ लेती हूँ खामोशी/ पास आना चाहती हूँ तो खुद को खींच लेती हूँ तुझ से दूर कितने रोडे अटकाती हूँ खुद को तेरी समझने की कोशिशों में। और फिर खुद ही लगा भी देती हूँ इल्जाम  कि तू तो मुझे समझता ही नहीं . 127 ऋतु जोशी नदी , धरती और समंदर - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - एक जाती हुई औरत ச  ೫1 ೬೭^ ###7=5= एक जाती हुई औरत  எ1 ले जाती है अपने साथ #= గ్ః अतीत के चुम्बन पश्चात्ताप से भरी तुम्हारी आत्मा के अश्रु और पीछे छोड़ देती है =55க் वे सभी दुःस्वप्न जो प्रेम के नाम पर उसने समेट लिये थे নসু মচন ম  उको निकृष्टता  तुम कभी नहीं जान सकोगे जाते हुए उसकी आँखें नम थीं या नहीं अपने हृदय को तुम्हारी ओर उसका हृदय नहीं अव उसकी जाती हुई पीठ है ६६ / घो घौ रानी कितना पानी  एक जाती हुई औरत ச  ೫1 ೬೭^ ###7=5= एक जाती हुई औरत  எ1 ले जाती है अपने साथ #= గ్ః अतीत के चुम्बन पश्चात्ताप से भरी तुम्हारी आत्मा के अश्रु और पीछे छोड़ देती है =55க் वे सभी दुःस्वप्न जो प्रेम के नाम पर उसने समेट लिये थे নসু মচন ম  उको निकृष्टता  तुम कभी नहीं जान सकोगे जाते हुए उसकी आँखें नम थीं या नहीं अपने हृदय को तुम्हारी ओर उसका हृदय नहीं अव उसकी जाती हुई पीठ है ६६ / घो घौ रानी कितना पानी - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - रोज़ मन्दिर में सुबह घंटी बजाता ৪ুঁ सोया हुआ खुद हूँ और भगवान को जगाता हूँ रोज़ मन्दिर में सुबह घंटी बजाता ৪ুঁ सोया हुआ खुद हूँ और भगवान को जगाता हूँ - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - मन ही मन को जानता, मन की मन से प्रीत मन ही मनमानी करे मनही मन का मीत मन झूमे मन बावरा,मन की अद्भुत रीत मन के हारे हार है,मन के जीते जीत ।।। मन ही मन को जानता, मन की मन से प्रीत मन ही मनमानी करे मनही मन का मीत मन झूमे मन बावरा,मन की अद्भुत रीत मन के हारे हार है,मन के जीते जीत ।।। - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - कौन बताता है समंदर का रास्ता नदी को जिसे मंजिल का 978 নী সহানযা নন্কী লন अल्फाज तेरे मेरे । गौरव उपाध्याय कौन बताता है समंदर का रास्ता नदी को जिसे मंजिल का 978 নী সহানযা নন্কী লন अल्फाज तेरे मेरे । गौरव उपाध्याय - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - आँखों में कई ख्वाब, दिल में कई हसरतें बाकी हैं, मैं कैसे थक जाऊं. अभी कई मंजिले बाकी हैं, कहाँ कुछ आसान है राह में कई मुश्किलें बाकी हैं, कैसे छोड़ दूँ अधूरा ये सफ़र मेरी कहानी के अभी कई पन्ने बाकी है।। शुभम श्रीवास्तव | tangled feelings  आँखों में कई ख्वाब, दिल में कई हसरतें बाकी हैं, मैं कैसे थक जाऊं. अभी कई मंजिले बाकी हैं, कहाँ कुछ आसान है राह में कई मुश्किलें बाकी हैं, कैसे छोड़ दूँ अधूरा ये सफ़र मेरी कहानी के अभी कई पन्ने बाकी है।। शुभम श्रीवास्तव | tangled feelings - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - अपनी राहें. खुद चुनो भीड़ का हिस्सा बनना क्यों है, वो करो जो दिल कहता है की सुनना क्यों है, दूसरों हर बात राहें भी तुम्हारी हैं, सपने भी तुम्हारे हैं फिर किसी और का रास्ता पकड़ना क्यों है उड़ने दो ख्वाबों को खुलकर, पिंजरे में खुद को रखना क्यों है।।  अपनी राहें. खुद चुनो भीड़ का हिस्सा बनना क्यों है, वो करो जो दिल कहता है की सुनना क्यों है, दूसरों हर बात राहें भी तुम्हारी हैं, सपने भी तुम्हारे हैं फिर किसी और का रास्ता पकड़ना क्यों है उड़ने दो ख्वाबों को खुलकर, पिंजरे में खुद को रखना क्यों है।। - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - चाहत फिकर सादगी वफा a आदतों   ने मेरी   इन्ही बुरी बना   दिया मेरा নপাহাা चाहत फिकर सादगी वफा a आदतों   ने मेरी   इन्ही बुरी बना   दिया मेरा নপাহাা - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - रोज़ मन्दिर में सुबह घंटी बजाता ৪ুঁ सोया हुआ खुद हूँ और भगवान को जगाता हूँ रोज़ मन्दिर में सुबह घंटी बजाता ৪ুঁ सोया हुआ खुद हूँ और भगवान को जगाता हूँ - ShareChat