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. *🍁 श्री ओङ्कारेश्वर जी 🍁*
*कावेरिकानर्मदयोः पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय ।*
*सदैव मान्धातृपुरे वसन्त-मोङ्कारमीशं शिवमेकमीडे ॥*
> 'जो सत्पुरुषों को संसार सागर से पार उतारने के लिये कावेरी और नर्मदा के पवित्र संगम के निकट मान्धाता के पुर में सदा निवास करते हैं, उन अद्वितीय कल्याणमय भगवान् श्रीओङ्कारेश्वर का मैं स्तवन करता हूँ।'
* *भगवान् शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में श्रीओङ्कारेश्वर का `चौथा स्थान` है। यह स्थान मध्य प्रदेश के अन्तर्गत नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि यहाँ दो ज्योतिर्लिंगों- श्रीओङ्कारेश्वर और श्रीअमलेश्वर की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग के रूप में की गयी है।*
> *द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर की गणना है। इस ज्योतिर्लिंग की एक विशेषता यह है कि यहाँ दो ज्योतिर्लिंग हैं- `ओंकारेश्वर और अमलेश्वर । इन दोनों को द्वादश ज्योतिर्लिंगों की गिनती करते समय एक ही गिना जाता है।` द्वादश ज्योतिर्लिंगों का नाम-निर्देश करनेवाले श्लोकों में 'ओंकारममलेश्वरम्' यह पाठ देखकर और उसमें ओंकारम्+अमलेश्वरम् यह सन्धि न समझकर बहुत-से लोग अमलेश्वर को ममलेश्वर कहते हैं, जो ठीक नहीं है।*
* स्कन्दपुराण में ओङ्कारेश्वर तीर्थ की अद्भुत महिमा का वर्णन किया गया है —
*देवस्थानसमं ह्येतत् मत्प्रसादाद् भविष्यति।*
*अन्नदानं तप: पूजा तथा प्राणविसर्जनम्॥*
*ये कुर्वन्ति नरास्तेषां शिवलोकनिवासनम्॥*
(रेवाखण्ड अध्याय २२)
> 'ओङ्कारेश्वर तीर्थ अलौकिक है। भगवान् शंकर की कृपा से यह देवस्थान के तुल्य ही है। यहाँ पर अन्न-दान, तप, पूजा करते अथवा प्राणत्याग करते हैं, उनका शिवलोक में निवास होता है।'
*हर हर महादेव 👏🏻*
*जय जय सियाराम 🙏🏻🚩*
#ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन