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#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - *ंगुरु बृहस्पति - देवताओं के गुरु, जीव के कारक* आपकी एकदम सही है। ज्योतिष र्मे बृहस्पति को নান  "जीव' कहा गया है - यानी प्राण, संतान, ज्ञान सब इन्हीं के अधीन। मृत्यु को टालने का सामर्थ्य क्यों? * *1. बृहस्पति आयु के कारक हैं। कुंडली में बलवान गुरु हो तो व्यक्ति बड़ी-बड़ी दुर्घटनाओं से भी बच निकलता है। शुक्र के पास संजीवनी है, परवो मरे हुए को जिला सकता है। मगर "मरने ही न दे" ये शक्ति सिर्फ गुरु के पास है। इसलिए गुरु को " रक्षक ग्रह" कहते हैं। *२. शुक्र और गुरु का रिश्ता* शुक्र दैर्त्यों के गुरु, बृहस्पति देवताओं के। दोनों शत्रु हैं। फिर भी शुक्र मीन राशि में उच्च का होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। ज्ञान के अधूरा है*। शुक्र ऐशोआराम  मतलवः *भोग बिना देगा , पर उसे संभालने की अक्ल, मर्यादा , धर्म गुरु ही देता है। गुरु के बिना शुक्र का ऐश्वर्य = पतन।  *३. पत्रिका में बलवान गुरु = सौभाग्य क्यों?*  भाव में गुरु*  दीर्घायु मान-सम्मान , रोग से *्पहला R8T i *पंचम में गुरु* संस्कारी संतान, मंत्र सिद्धि॰ पूर्व पुण्य का फल C:  *नवम में गुरु* पिता का सुख भाग्य का साथ धर्म कर्म में रुचि *एकादश में गुरु* बिना मांगे सब मिले, हर इच्छा पूरी कमजोर गुरु = ज्ञान होते हुए भी भ्रम, संतान सुख में कमी, थर्म से दूरी , लीवर पेट की समस्या। *सार*ः शुक्र आपको दुनिया दे सकता है, पर गुरु आपको दुनिया जीने लायक बनाता है। इसलिए कहते हैं - *"गुरु  गुरु बिन मिटे न दोष *।  बिन ज्ञान न उपजे, गुरु को मजबूत करने के 3 सरल उपायः १. गुरुवार व्रत, पीली चीज का दान २. बड़े-बुजुर्गों के पैर छूना கபகி आपकी कुंडली में गुरु कहाँ बैठे हैं? *ंगुरु बृहस्पति - देवताओं के गुरु, जीव के कारक* आपकी एकदम सही है। ज्योतिष र्मे बृहस्पति को নান  "जीव' कहा गया है - यानी प्राण, संतान, ज्ञान सब इन्हीं के अधीन। मृत्यु को टालने का सामर्थ्य क्यों? * *1. बृहस्पति आयु के कारक हैं। कुंडली में बलवान गुरु हो तो व्यक्ति बड़ी-बड़ी दुर्घटनाओं से भी बच निकलता है। शुक्र के पास संजीवनी है, परवो मरे हुए को जिला सकता है। मगर "मरने ही न दे" ये शक्ति सिर्फ गुरु के पास है। इसलिए गुरु को " रक्षक ग्रह" कहते हैं। *२. शुक्र और गुरु का रिश्ता* शुक्र दैर्त्यों के गुरु, बृहस्पति देवताओं के। दोनों शत्रु हैं। फिर भी शुक्र मीन राशि में उच्च का होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। ज्ञान के अधूरा है*। शुक्र ऐशोआराम  मतलवः *भोग बिना देगा , पर उसे संभालने की अक्ल, मर्यादा , धर्म गुरु ही देता है। गुरु के बिना शुक्र का ऐश्वर्य = पतन।  *३. पत्रिका में बलवान गुरु = सौभाग्य क्यों?*  भाव में गुरु*  दीर्घायु मान-सम्मान , रोग से *्पहला R8T i *पंचम में गुरु* संस्कारी संतान, मंत्र सिद्धि॰ पूर्व पुण्य का फल C:  *नवम में गुरु* पिता का सुख भाग्य का साथ धर्म कर्म में रुचि *एकादश में गुरु* बिना मांगे सब मिले, हर इच्छा पूरी कमजोर गुरु = ज्ञान होते हुए भी भ्रम, संतान सुख में कमी, थर्म से दूरी , लीवर पेट की समस्या। *सार*ः शुक्र आपको दुनिया दे सकता है, पर गुरु आपको दुनिया जीने लायक बनाता है। इसलिए कहते हैं - *"गुरु  गुरु बिन मिटे न दोष *।  बिन ज्ञान न उपजे, गुरु को मजबूत करने के 3 सरल उपायः १. गुरुवार व्रत, पीली चीज का दान २. बड़े-बुजुर्गों के पैर छूना கபகி आपकी कुंडली में गुरु कहाँ बैठे हैं? - ShareChat