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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - छोड़ दी हैं मैंने. "उम्मीदें किसी से कोई उम्मीद रखने का मन नहीं अब करता, कोई साथ दे तो ठीक, न दे तो भी ठीक. और अकेले ही अकेले आए जाएंगे. .!! 2 छोड़ दी हैं मैंने. "उम्मीदें किसी से कोई उम्मीद रखने का मन नहीं अब करता, कोई साथ दे तो ठीक, न दे तो भी ठीक. और अकेले ही अकेले आए जाएंगे. .!! 2 - ShareChat