sn vyas
🌍*पृथ्वी लोक की अनन्त समस्यायें*_ 🌍
‼️यह पृथ्वी भी अद्भुत और अपूर्व हैl यहाँ गर्भ में आते ही समस्यायें आरम्भ हो जाती हैं l जन्म लेने से पूर्व से लेकर मृत्यु तक समस्यायें ही समस्यायें हैं इस धरती पर l मनुष्य या जीव भी इन समस्याओं से लड़ता रहता है l या तो विजय प्राप्त करता है या समस्याओं से पराजित होता है l
*समस्याओं का निराकरण तीन स्तर पर होता है-* देव द्वारा , राजा द्वारा या स्वयं के पुरुषार्थ द्वारा l देव द्वारा प्राप्त सहयोग दुर्लभ होता है l सभी पात्र नहीं होते कि उन्हें दैवीय सहायता मिल सके l राजा द्वारा या राज्यांग द्वारा सहायता तभी मिलती है जब देव अनुकूल हो l प्रायः विपत्ति काल में दी जाने वाली सहायता को राजा के चक्र ( प्रशासनिक जन ) खा जाते हैं l स्वयं का पुरुषार्थ ही एक ऐसा माध्यम होता है जो समस्याओं से व्यक्ति का उद्धार करता है l यह अलग बात है कि हर पुरुषार्थ के पीछे सफलता खड़ी नहीं मिलती है l ‼️
🧘समस्याओं से भयभीत हो कर आत्महत्या करना या पलायन करना इस बात को सूचित करता है कि व्यक्ति की जीवंतता कितनी स्वल्प है l *समस्याओं के पीछे के कारण —* 🧘
🚩हमारे पूर्व के कर्म ही हमारी समस्याओं के जनक होते हैं l इन्हें विंशोतरी महादशा और अंतर दशा द्वारा जाना जाता है l साथ ही समुद्र में फंसे व्यक्ति की तरह
प्रार्थना और पुरुषार्थ दोनों का सहयोग लेना पड़ता है l भूमि पर जन्म तभी होता है जब आपको पुराना भोग भोगना हो और नया कर्म करके नयी समस्याओं को अगले जीवन के लिए तैयार करना हो l यदि मोक्ष हो जाए तो कभी समस्याएं उत्पन्न ही न हों। पर जन्म लेने का अर्थ ही है समस्याओं को साथ ले कर धरती पर आना l जीवन समुद्र में उठने वाली अनन्त लहरें समस्याएं ही तो हैंl इन समस्याओं को या तो तैरना होता है या लहरें लील लेती हैं l पृथ्वी पर व्यक्ति का जन्म आदान प्रदान के लिए होता है l व्यक्ति का जन्म ऐसे परिवार में होता है जहाँ उसके पूर्व के आत्मीय लोग होते हैं l माता पिता, भाई बहन, दादा दादी, चाचा चाची से आपका पहले से राग बंधन होता है l ये सम्बन्ध या तो आपको समस्या मुक्त करते हैं या ऐसी समस्याओं से युक्त करते हैं जिनसे आप कभी मुक्त नहीं हो पाते l 🚩
👩❤️👩आप जिनका जितना पूर्व काल में उधार लिए रहते हैं वह उतना आपसे ले लेता है l कोई भी व्यक्ति इतना स्वतंत्र नहीं होता की वह जन्म कालिक सम्बन्धों का चयन कर सके l यदि श्रेष्ठ सम्बन्धों की इच्छा हो तो भगवती प्रकृति की आराधना करनी पड़ती है l हमारा पूर्व का कर्म ही हमें तामसिक, राजसिक या सात्विक वातावरण को प्रदान करता है l इस अपार सृष्टि में आपसे वे लोग ही मिल पायेंगे जिनसे आपका पूर्वगत सम्बन्ध है l किसी से किसी व्यक्ति का सम्बन्ध कितने दिनों तक रह पाएगा यह भी पूर्व निर्धारित रहता है l👩❤️👩
🛐मनुष्य जीवन की सारी समस्याएं चक्रीय हैं l वे घूमती रहती हैं l इस जीवन में नहीं तो किसी अन्य जीवन में हमें अपने कर्मों को भोगना ही पड़ता है l राजयोग और राज भ्रंश भी उसी कर्म भोग के सुनिश्चित अंश हैं l यह बहुत जटिल और अक्रम भोग होता है जिसे त्रिकाल द्रष्टा ही जान पाता है हम लोगों जैसे सामान्य जन नहीं l🛐
🍀 आध्यात्मिक ज्ञान 🍀
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇