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पगलीं दिल के हर
गलियों से भी,
अब मेरे
गुजर आने से क्या होगा!
जो समझते भी नही
हवाओं को,
उनके आगे
शर्माने से क्या होगा!
शख्स तड़पता रहेगा
यूँ ही,
अकेले
मुस्कुराने से क्या होगा!
बावला है किसी की
सुनता नही,
अपने को
तड़पाने से क्या होगा!
बहुत छेड़ लिया
अच्छा नही लगता,
यूँ ही खुदको
सताने से क्या होगा!
कुछ मीले ना मिले
फर्क नही पड़ता,
सिवाय तुम्हरे
कुछ गँवाने से क्या होगा!
अकेला है दिल भीड़
व बादलों में,
पर हर किसी को
बताने से क्या होगा!
जो सीखा खाना बनाना
मेरे लिए ही,
बगैर मेरे सबको
खिलाने से क्या होगा!
तुम्हारे बगैर सब
फीका-फीका है,
खरीदकर जहर
खाने से क्या होगा!
ताउम्र यादों में अकेले ही
तड़पता रहूँ,
लोलमती खाली तुम्हरे
मर जाने से क्या होगा!💕💞
........✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #😘लव डोज💓 #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


