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कभी-कभी समस्या जगह की नहीं, लोगों की सोच और जरूरत की होती है। #😛 व्यंग्य 😛 #motivational #reality of life
😛 व्यंग्य 😛 - कभी-कभी समस्या जगह की नहीं , लोगों की सोच और जरुरत की होती है। मैंने कहा - कुछ दिन पहले "फिर यहाँ एक ठेका लोग खुद एक पुराने मित्र खोल दो, से मुलाकात हुई। 379:}/' चलकर वो बहुत उदास थे। aid. पूछा तो ; कारण "भाई, दुकान है अंदर गली में.. ग्राहक ही नहीं आते, d81" बिक्रो ' वो हँसकर बोले - मैंने कहा - *ये गरीबों की बस्ती है, "जो 5 kg राशन के लिए ठेका यहाँ खाने के पैसे नहीं , लाइन में खड़े होकर RIq दारू कौन पियेगा ?" सोना खरीदने की बात 37i ; व देसी शराब ' करते हैं, क्या दारू उपलथ्थ है। न पी सकेंगे!" कुछ समय बाद वही जगह बदल गई. जहाँ पहले सन्न्नाटा था, वहाँ अब भीड़ है। वही मित्र और आज उसका बेटा रोज पार्टी करते हैं, लोग ढूंढ़ - ढूंढ़ पर पहुचते हैं कर ठेके ' सीख बस इतनी है लोगों की जरुरत को समझो , _ सही जगह सही चीज़ दो, सफलता खुद चलकर आएगी| कभी-कभी समस्या जगह की नहीं , लोगों की सोच और जरुरत की होती है। मैंने कहा - कुछ दिन पहले "फिर यहाँ एक ठेका लोग खुद एक पुराने मित्र खोल दो, से मुलाकात हुई। 379:}/' चलकर वो बहुत उदास थे। aid. पूछा तो ; कारण "भाई, दुकान है अंदर गली में.. ग्राहक ही नहीं आते, d81" बिक्रो ' वो हँसकर बोले - मैंने कहा - *ये गरीबों की बस्ती है, "जो 5 kg राशन के लिए ठेका यहाँ खाने के पैसे नहीं , लाइन में खड़े होकर RIq दारू कौन पियेगा ?" सोना खरीदने की बात 37i ; व देसी शराब ' करते हैं, क्या दारू उपलथ्थ है। न पी सकेंगे!" कुछ समय बाद वही जगह बदल गई. जहाँ पहले सन्न्नाटा था, वहाँ अब भीड़ है। वही मित्र और आज उसका बेटा रोज पार्टी करते हैं, लोग ढूंढ़ - ढूंढ़ पर पहुचते हैं कर ठेके ' सीख बस इतनी है लोगों की जरुरत को समझो , _ सही जगह सही चीज़ दो, सफलता खुद चलकर आएगी| - ShareChat