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😂😜मुन्ना भाई मीम्स😂 - कई साल से भैंस के आगे बीन बजा रहा था , नहीं सुनती. चलो , बीन से भाई, साज बदलने नहीं माना तो से कुछ नहीं होने अब हारमोनियम वाला..० #6... ?mG সন্স মুন ল!  साज़ बदल गया, रिज़ल्ट वही का वही! कई साल से भैंस के आगे बीन बजा रहा था , नहीं सुनती. चलो , बीन से भाई, साज बदलने नहीं माना तो से कुछ नहीं होने अब हारमोनियम वाला..० #6... ?mG সন্স মুন ল!  साज़ बदल गया, रिज़ल्ट वही का वही! - ShareChat
#मन की बात #🎞️आज के वायरल अपडेट्स #🗞️पॉलिटिकल अपडेट आज Narendra Modi जी की “मन की बात” सुनी, जिसमें उन्होंने महिलाओं को आरक्षण और सशक्तिकरण की बात की। यह विषय नया नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी कई सरकारें महिलाओं के अधिकारों को बढ़ाने के लिए कानून और योजनाएँ ला चुकी हैं। महिलाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश एक सकारात्मक पहल है, लेकिन इसके साथ कुछ सवाल भी खड़े होते हैं। भारत में महिलाओं के लिए कई सख्त कानून बनाए गए हैं, जैसे Section 498A IPC और Section 406 IPC। इनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा देना था, ताकि वे घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से बच सकें। लेकिन समाज में ऐसी घटनाएँ भी सामने आई हैं, जहाँ इन कानूनों के दुरुपयोग की बात कही जाती है। कुछ परिवारों के टूटने के पीछे लोग इन कानूनों को कारण मानते हैं। इसी संदर्भ में एक सोच यह भी उभरती है कि अब भारत को केवल “पुरुष प्रधान देश” कहना शायद पूरी तरह सही नहीं रह गया है। समाज बदल रहा है—महिलाएँ शिक्षा, राजनीति, सेना, खेल और व्यापार हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना ज्यादा उचित होगा कि भारत धीरे-धीरे एक संतुलित समाज की ओर बढ़ रहा है, जहाँ पुरुष और महिला दोनों की भूमिका बराबर हो रही है। लेकिन यहाँ संतुलन सबसे जरूरी है। अगर किसी भी पक्ष को मिली शक्ति का गलत उपयोग होता है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। इसलिए न केवल अधिकार, बल्कि जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है—चाहे वह पुरुष हो या महिला। महिला सशक्तिकरण का असली अर्थ यही होना चाहिए कि महिलाओं को समान अवसर मिलें, वे आत्मनिर्भर बनें, और समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सकें। साथ ही कानूनों का निष्पक्ष और सही उपयोग हो, ताकि न किसी के साथ अन्याय हो और न ही कोई उनका दुरुपयोग कर सके। अंत में, भारत की ताकत हमेशा उसके संतुलन और परिवार व्यवस्था में रही है। इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि भारत न केवल पुरुषों का है और न केवल महिलाओं का—यह दोनों का समान रूप से है। आपकी क्या राय है? क्या आप मानते हैं कि भारत अब संतुलित समाज की ओर बढ़ रहा है, या अभी भी कहीं न कहीं असंतुलन है? अपनी राय जरूर साझा करें।
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😂😜मुन्ना भाई मीम्स😂 - सैोंफ डालेंगे तो कुल बदल जाएगा! Expectation: Reality:  3icஎlaf अंट ही रहेगा ! Ranjan Chhibber सैोंफ डालेंगे तो कुल बदल जाएगा! Expectation: Reality:  3icஎlaf अंट ही रहेगा ! Ranjan Chhibber - ShareChat
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😂😜मुन्ना भाई मीम्स😂 - पहले लोग खुले में शोच करने जाते थे। एकदिन किसो ने खबेत में ऐसा ` नमूना' छोड़ दिया जो बिवलुल चक्की जेसा दिख रहा था। ओए! ये चक्को तेरी हैक्या? क्यों? गेहूं पोसना है क्या? पहले लोग खुले में शोच करने जाते थे। एकदिन किसो ने खबेत में ऐसा ` नमूना' छोड़ दिया जो बिवलुल चक्की जेसा दिख रहा था। ओए! ये चक्को तेरी हैक्या? क्यों? गेहूं पोसना है क्या? - ShareChat
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😅फनी रिएक्शन - इतनी शक्ति हमेदैनादता , मन का विश्वास कमजोर होना Ranjan Chhibber] इतनी शक्ति हमेदैनादता , मन का विश्वास कमजोर होना Ranjan Chhibber] - ShareChat
#💔 I am Sorry #🖋कहानी: टूटे दिल की💔
💔 I am Sorry - आवाजेॅ कशौ मरती नहौ , वो धश थादोॅ में वश जाती है... दिलौ में उतर जार , शुर जों ঢক कहलातौ है । वो २्मेशा अमर Aslకt, आवका समीत रावां झिंदा रहेमा RIP नहौ, बरिक Respect Forever  आवाजेॅ कशौ मरती नहौ , वो धश थादोॅ में वश जाती है... दिलौ में उतर जार , शुर जों ঢক कहलातौ है । वो २्मेशा अमर Aslకt, आवका समीत रावां झिंदा रहेमा RIP नहौ, बरिक Respect Forever - ShareChat
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