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#वट सावित्री व्रत #वट सावित्री व्रत 🙏🙏 #💐वट सावित्री व्रत 🙏🏼 #🙏वट सावित्री पूजा विधि एवं मुहूर्त 🌟
वट सावित्री व्रत - दांपत्य का प्रतीक अखंड सौभात्य ओर gசி ١١٩٤١١٩٩٨ ٩٨ ١١ पूजा विधि एवं मुहूर्त सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्धायु, अच्छे स्वास्थ्य यह व्रत और परिवार की सुख-्समूद्धि के लिए करती हैं। बट वूक्ष की पूजा करने से सावित्री व्रत२०२६ अखंड सौभाग्य, d( सुख , शांति और तिथि ज्येष्ठ अमावस्या মমূল্তি কী সাদি दिनांक : १ ६ मई २०२६ होती है। पूजा मुहूर्त 05:23 নতী ম সান: ক্রাল 08:15 নতী নক্ক प्रातः काल 005= पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप ) पूजा सामग्री वट वूक्ष की जड़ में बांधने के लिए कच्चा सूत  मुहूर्त में  उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। সমস जल से भरा लोटा व्रत का संकल्प लें - अपने पति की दीर्धायु और सुख-्समृद्धि के लिए। सनह বলী; ওম্ন हल्दी वट वूक्ष के पास और भूमि को साफ करके पूजा की तैयारी करें। जाए पुष्प (सफेद और लाल वट वूक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएं।  नैवेव्य दीप 4, ಇ9ಿ सूत वूक्ष की परिक्रमा करते हुए ७, ११ या १०८ बार बांधें। फल, मिठाई कच्चा सावित्री - सत्यवान जी की कथा पढ़ें या सुनें। पान सुपारी 06 বল্স (মাভী) धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पति के लंबे जीवन की कामना करें। दक्षिणा ন৫ বুঃ কী 7, 11 যরা 108 परिक्रमा करें। वार जी Pa सुहागिन महिलाओं आशीर्वाद लें 817 && वराह्मण या का उनका व्रत का पारण अगले दिन प्रातः या मुहूर्त अुनुसार करें। व्त कथा (सार  ब्रत के लाथ माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज वापस प्रात किया था। उनकी अट्रूट पविव्रता शक्ति, पति की दीर्धायु होती है सभी मनोकामनाएं साहस और भक्ति से प्रसन्न्न होकर यमराज पूर्ण होती हैं वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है सत्यवान जीवनदान दिया। इस व्रत को करने से वही 9 को अखंड सौभाग्य का परिवार में सुख-शांति और समूद्धि आती है दीर्धायु का वरदान अखंड सौभाग्य और पति की आशीर्वाद मिलता है प्राप्त होता है। I। वट सावित्री माता कीजय ।l सच्ची श्रद्धा, भक्ति और नियम से किया गया ब्रत अवश्य फलदायी होता है। दांपत्य का प्रतीक अखंड सौभात्य ओर gசி ١١٩٤١١٩٩٨ ٩٨ ١١ पूजा विधि एवं मुहूर्त सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्धायु, अच्छे स्वास्थ्य यह व्रत और परिवार की सुख-्समूद्धि के लिए करती हैं। बट वूक्ष की पूजा करने से सावित्री व्रत२०२६ अखंड सौभाग्य, d( सुख , शांति और तिथि ज्येष्ठ अमावस्या মমূল্তি কী সাদি दिनांक : १ ६ मई २०२६ होती है। पूजा मुहूर्त 05:23 নতী ম সান: ক্রাল 08:15 নতী নক্ক प्रातः काल 005= पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप ) पूजा सामग्री वट वूक्ष की जड़ में बांधने के लिए कच्चा सूत  मुहूर्त में  उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। সমস जल से भरा लोटा व्रत का संकल्प लें - अपने पति की दीर्धायु और सुख-्समृद्धि के लिए। सनह বলী; ওম্ন हल्दी वट वूक्ष के पास और भूमि को साफ करके पूजा की तैयारी करें। जाए पुष्प (सफेद और लाल वट वूक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएं।  नैवेव्य दीप 4, ಇ9ಿ सूत वूक्ष की परिक्रमा करते हुए ७, ११ या १०८ बार बांधें। फल, मिठाई कच्चा सावित्री - सत्यवान जी की कथा पढ़ें या सुनें। पान सुपारी 06 বল্স (মাভী) धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पति के लंबे जीवन की कामना करें। दक्षिणा ন৫ বুঃ কী 7, 11 যরা 108 परिक्रमा करें। वार जी Pa सुहागिन महिलाओं आशीर्वाद लें 817 && वराह्मण या का उनका व्रत का पारण अगले दिन प्रातः या मुहूर्त अुनुसार करें। व्त कथा (सार  ब्रत के लाथ माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज वापस प्रात किया था। उनकी अट्रूट पविव्रता शक्ति, पति की दीर्धायु होती है सभी मनोकामनाएं साहस और भक्ति से प्रसन्न्न होकर यमराज पूर्ण होती हैं वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है सत्यवान जीवनदान दिया। इस व्रत को करने से वही 9 को अखंड सौभाग्य का परिवार में सुख-शांति और समूद्धि आती है दीर्धायु का वरदान अखंड सौभाग्य और पति की आशीर्वाद मिलता है प्राप्त होता है। I। वट सावित्री माता कीजय ।l सच्ची श्रद्धा, भक्ति और नियम से किया गया ब्रत अवश्य फलदायी होता है। - ShareChat