Pintu Kumar
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Pintu Kumar
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Wish you a happy journey🚅 Thank you,Same to yo🦃
https://youtube.com/watch?v=PKTC3Zv9w7Q&si=BjDlVx1YwuyAF5ha #pm modi ji #kisan #farmer
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🌿 वट सावित्री व्रत के स्पेशल प्रसाद बनाने की पारंपरिक विधि 🌿 वट सावित्री व्रत केवल पूजा और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस पावन दिन पर बनाए जाने वाले प्रसा #💐वट सावित्री व्रत 🙏🏼 #🙏वट सावित्री पूजा विधि एवं मुहूर्त 🌟 #वट सावित्री व्रत 🙏🙏 #वट सावित्री व्रत #प्रसाद द में श्रद्धा, शुद्धता और प्रेम का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं इस व्रत के खास और स्वादिष्ट प्रसाद बनाने की आकर्षक विधि — 🍯 1. ठेकुआ – व्रत का पारंपरिक प्रसाद सुगंधित घी और गुड़ से बना ठेकुआ हर पूजा की शान माना जाता है। बनाने की विधि: गेहूं के आटे में गुड़ का मीठा घोल मिलाएं। उसमें थोड़ा घी, सौंफ और नारियल का बुरादा डालें। आटे को अच्छी तरह गूंधकर छोटे-छोटे आकार दें। धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें। ✨ जब ठेकुआ की खुशबू पूरे घर में फैलती है, तो पूजा का माहौल और भी पावन हो जाता है। --- 🍚 2. खीर – मिठास और श्रद्धा का संगम दूध, चावल और मेवों से बनी खीर प्रसाद में विशेष स्थान रखती है। बनाने की विधि: दूध को धीमी आंच पर गाढ़ा करें। उसमें धुले हुए चावल डालें और पकाएं। चीनी या गुड़ मिलाकर इलायची और ड्राई फ्रूट्स डालें। ✨ मलाईदार खीर का स्वाद पूजा की मिठास को कई गुना बढ़ा देता है। --- 🍌 3. फल और पंचामृत वट सावित्री पूजा में केले, आम, सेब और पंचामृत का भी विशेष महत्व होता है। पंचामृत कैसे बनाएं? दूध दही शहद घी शक्कर इन पांच चीजों को मिलाकर पवित्र पंचामृत तैयार किया जाता है। ✨ इसे प्रसाद के रूप में बांटना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। --- 🪔 प्रसाद बनाते समय रखें ये खास बातें 🌸 प्रसाद पूरी श्रद्धा और साफ-सफाई से बनाएं। 🌸 पूजा के दौरान वट वृक्ष को भी प्रसाद अर्पित करें। 🌸 घर में सकारात्मक और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें। 🌺 मान्यता है कि सच्चे मन से बनाया गया प्रसाद माता सावित्री और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होता है। 🌺
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वट सावित्री व्रत - दांपत्य का प्रतीक अखंड सौभात्य ओर gசி ١١٩٤١١٩٩٨ ٩٨ ١١ पूजा विधि एवं मुहूर्त सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्धायु, अच्छे स्वास्थ्य यह व्रत और परिवार की सुख-्समूद्धि के लिए करती हैं। बट वूक्ष की पूजा करने से सावित्री व्रत२०२६ अखंड सौभाग्य, d( सुख , शांति और तिथि ज्येष्ठ अमावस्या মমূল্তি কী সাদি दिनांक : १ ६ मई २०२६ होती है। पूजा मुहूर्त 05:23 নতী ম সান: ক্রাল 08:15 নতী নক্ক प्रातः काल 005= पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप ) पूजा सामग्री वट वूक्ष की जड़ में बांधने के लिए कच्चा सूत  मुहूर्त में  उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। সমস जल से भरा लोटा व्रत का संकल्प लें - अपने पति की दीर्धायु और सुख-्समृद्धि के लिए। सनह বলী; ওম্ন हल्दी वट वूक्ष के पास और भूमि को साफ करके पूजा की तैयारी करें। जाए पुष्प (सफेद और लाल वट वूक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएं।  नैवेव्य दीप 4, ಇ9ಿ सूत वूक्ष की परिक्रमा करते हुए ७, ११ या १०८ बार बांधें। फल, मिठाई कच्चा सावित्री - सत्यवान जी की कथा पढ़ें या सुनें। पान सुपारी 06 বল্স (মাভী) धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पति के लंबे जीवन की कामना करें। दक्षिणा ন৫ বুঃ কী 7, 11 যরা 108 परिक्रमा करें। वार जी Pa सुहागिन महिलाओं आशीर्वाद लें 817 && वराह्मण या का उनका व्रत का पारण अगले दिन प्रातः या मुहूर्त अुनुसार करें। व्त कथा (सार  ब्रत के लाथ माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज वापस प्रात किया था। उनकी अट्रूट पविव्रता शक्ति, पति की दीर्धायु होती है सभी मनोकामनाएं साहस और भक्ति से प्रसन्न्न होकर यमराज पूर्ण होती हैं वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है सत्यवान जीवनदान दिया। इस व्रत को करने से वही 9 को अखंड सौभाग्य का परिवार में सुख-शांति और समूद्धि आती है दीर्धायु का वरदान अखंड सौभाग्य और पति की आशीर्वाद मिलता है प्राप्त होता है। I। वट सावित्री माता कीजय ।l सच्ची श्रद्धा, भक्ति और नियम से किया गया ब्रत अवश्य फलदायी होता है। दांपत्य का प्रतीक अखंड सौभात्य ओर gசி ١١٩٤١١٩٩٨ ٩٨ ١١ पूजा विधि एवं मुहूर्त सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्धायु, अच्छे स्वास्थ्य यह व्रत और परिवार की सुख-्समूद्धि के लिए करती हैं। बट वूक्ष की पूजा करने से सावित्री व्रत२०२६ अखंड सौभाग्य, d( सुख , शांति और तिथि ज्येष्ठ अमावस्या মমূল্তি কী সাদি दिनांक : १ ६ मई २०२६ होती है। पूजा मुहूर्त 05:23 নতী ম সান: ক্রাল 08:15 নতী নক্ক प्रातः काल 005= पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप ) पूजा सामग्री वट वूक्ष की जड़ में बांधने के लिए कच्चा सूत  मुहूर्त में  उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। সমস जल से भरा लोटा व्रत का संकल्प लें - अपने पति की दीर्धायु और सुख-्समृद्धि के लिए। सनह বলী; ওম্ন हल्दी वट वूक्ष के पास और भूमि को साफ करके पूजा की तैयारी करें। जाए पुष्प (सफेद और लाल वट वूक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, पुष्प चढ़ाएं।  नैवेव्य दीप 4, ಇ9ಿ सूत वूक्ष की परिक्रमा करते हुए ७, ११ या १०८ बार बांधें। फल, मिठाई कच्चा सावित्री - सत्यवान जी की कथा पढ़ें या सुनें। पान सुपारी 06 বল্স (মাভী) धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें और पति के लंबे जीवन की कामना करें। दक्षिणा ন৫ বুঃ কী 7, 11 যরা 108 परिक्रमा करें। वार जी Pa सुहागिन महिलाओं आशीर्वाद लें 817 && वराह्मण या का उनका व्रत का पारण अगले दिन प्रातः या मुहूर्त अुनुसार करें। व्त कथा (सार  ब्रत के लाथ माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज वापस प्रात किया था। उनकी अट्रूट पविव्रता शक्ति, पति की दीर्धायु होती है सभी मनोकामनाएं साहस और भक्ति से प्रसन्न्न होकर यमराज पूर्ण होती हैं वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम बढ़ता है सत्यवान जीवनदान दिया। इस व्रत को करने से वही 9 को अखंड सौभाग्य का परिवार में सुख-शांति और समूद्धि आती है दीर्धायु का वरदान अखंड सौभाग्य और पति की आशीर्वाद मिलता है प्राप्त होता है। I। वट सावित्री माता कीजय ।l सच्ची श्रद्धा, भक्ति और नियम से किया गया ब्रत अवश्य फलदायी होता है। - ShareChat
#🙏वट सावित्री पूजा विधि एवं मुहूर्त 🌟 #💐वट सावित्री व्रत 🙏🏼 #वट सावित्री व्रत 🙏🙏 #वट सावित्री व्रत 🌳 वट सावित्री व्रत 2026 ✨ पूजा विधि, शुभ मुहूर्त एवं महत्व ✨ भारतीय संस्कृति में वट सावित्री व्रत को पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का पावन पर्व माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर माता सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं। --- 🌺 वट सावित्री व्रत का महत्व पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। 🌿 बरगद का पेड़ लंबी आयु, स्थिरता और अमरता का प्रतीक माना जाता है। --- 🕉️ पूजा का शुभ मुहूर्त (2026) ☀️ व्रत तिथि: ज्येष्ठ अमावस्या 🌅 पूजा का श्रेष्ठ समय: प्रातःकाल से दोपहर तक 🌳 बरगद पूजा का शुभ समय: सुबह स्नान के बाद (स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।) --- 🌸 वट सावित्री व्रत पूजा विधि ✨ पूजा सामग्री रोली, अक्षत, फूल सूत या कच्चा धागा जल से भरा लोटा दीपक, अगरबत्ती फल एवं मिठाई सावित्री-सत्यवान की कथा पुस्तक --- 🌿 पूजा करने की विधि 1️⃣ प्रातः स्नान करें सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2️⃣ व्रत का संकल्प लें भगवान विष्णु एवं माता सावित्री का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। 3️⃣ बरगद के पेड़ की पूजा करें वट वृक्ष में जल अर्पित करें, रोली-अक्षत चढ़ाएं और दीपक जलाएं। 4️⃣ धागा बांधें बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें। 5️⃣ कथा सुनें सावित्री और सत्यवान की पवित्र कथा सुनें या पढ़ें। 6️⃣ आरती करें पूजा के अंत में आरती कर परिवार के सुख और पति की लंबी आयु की कामना करें। --- 🌼 व्रत के विशेष नियम ✅ क्रोध और गलत शब्दों से बचें ✅ श्रद्धा और शांति से पूजा करें ✅ जरूरतमंदों को दान दें ✅ परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें --- 🌟 सुंदर संदेश 🌿 “सावित्री के प्रेम, विश्वास और तप की शक्ति हर दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और लंबी आयु लाए।” 🌿 🙏 शुभ वट सावित्री व्रत 🙏
#🌳बरगद के पेड़ का महत्व 😊 🌳 बरगद का पेड़ — प्रकृति का अमूल्य उपहार वट सावित्री #आप सभी को वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं #💐वट सावित्री व्रत 🙏🏼 #वट सावित्री व्रत #वट सावित्री व्रत 🙏🙏 व्रत ✨ जब भी गांव की ठंडी छांव, पक्षियों की चहचहाहट और शांति की बात होती है, तब सबसे पहले याद आता है — वट वृक्ष। बरगद केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, जीवन और प्रकृति की पहचान है। 🌿 क्यों खास है बरगद का पेड़? 🌞 1. ठंडी छांव का राजा बरगद की विशाल शाखाएं दूर-दूर तक फैलती हैं। इसकी छांव में गर्मी भी ठंडी लगती है। गांवों में लोग इसके नीचे बैठकर आराम, बातचीत और बैठक करते हैं। 💨 2. स्वच्छ हवा का खजाना यह पेड़ भरपूर ऑक्सीजन देता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है। इसलिए इसे “धरती का प्राकृतिक एयर कूलर” भी कहा जाता है। 🐦 3. पक्षियों और जीवों का घर बरगद अनेक पक्षियों, गिलहरियों और छोटे जीवों को आश्रय देता है। इसकी शाखाओं पर प्रकृति का सुंदर संसार बसता है। 🛕 4. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भारत में बरगद को पवित्र माना जाता है। वट सावित्री व्रत पर महिलाएं इसकी पूजा करती हैं और सुखी परिवार की कामना करती हैं। 🌱 5. औषधीय गुणों से भरपूर इसकी छाल, पत्तियां और जड़ें आयुर्वेद में उपयोग की जाती हैं। कई घरेलू उपचारों में बरगद का महत्व बताया गया है। 💚 प्रेरणादायक संदेश “जो पेड़ हमें जीवनभर छाया और सांस देता है, उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।” 🌳 आइए, पेड़ों को बचाएं और प्रकृति को सुरक्षित बनाएं।