ShareChat
click to see wallet page
search
#*let us understand our religion #सोचने वाली बात #points to ponder #quran
*let us understand our religion - एसिर्फ पढ़ना नहीं, समझना भी ज़रूरी है ~ क़ुरआन की पुकार" 22/4/26 (1) ಟಾ3   4:82 "क्या वे क़ुरआन पर ग़ौर (विचार) नहीं करते? अगर यह अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ़ से होता, तो वे इसमें बहुतनसा विरोध (विसंगति) पाते।" (2). 5<3/7 38:29 "यह एक बरकत वाली किताब है जिसे हमने आपकी ओर उतारा है, ताकि लोग इसकी आयतों पर ग़ौर करें और समझदार लोग नसीहत हासिल करें।" (3). 5<3/1747:24 "तो क्या वे क़ुरआन पर ग़ौर नहीं करते, या उनके दिलों पर ताले लगे 38?" (क्या हम सच में इस क़ुरआनी नसीहत को सूरनेंगे?) एसिर्फ पढ़ना नहीं, समझना भी ज़रूरी है ~ क़ुरआन की पुकार" 22/4/26 (1) ಟಾ3   4:82 "क्या वे क़ुरआन पर ग़ौर (विचार) नहीं करते? अगर यह अल्लाह के सिवा किसी और की तरफ़ से होता, तो वे इसमें बहुतनसा विरोध (विसंगति) पाते।" (2). 5<3/7 38:29 "यह एक बरकत वाली किताब है जिसे हमने आपकी ओर उतारा है, ताकि लोग इसकी आयतों पर ग़ौर करें और समझदार लोग नसीहत हासिल करें।" (3). 5<3/1747:24 "तो क्या वे क़ुरआन पर ग़ौर नहीं करते, या उनके दिलों पर ताले लगे 38?" (क्या हम सच में इस क़ुरआनी नसीहत को सूरनेंगे?) - ShareChat