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#शुभ मुहूर्त #व्रत एवं त्योहार #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 23-04-26 गंगा सप्तमी गुरुवार ক্রী হুবল  वैसाख मास पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी का पर्व है, इसे गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। च वैसाख मनाया जाता ক্কী হুবল  की सप्तमी को जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित  मास "8 होने के कारण इस दिन को जान्हु सप्तमी भी कहा जाता है। की शुक्ल  पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है, इसे वैसाख मास गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। वैसाख  मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित होने के कारण इस दिन को जान्हु सप्तमी भी कहा जाता है, जान्हु ऋषि की पुत्री होने के कारण ही माँ गंगा का एक नाम जान्हवी भी है। गंगा सप्तमी पूजा विधिः १. स्नान से दिन की शुरुआत करेंः प्रातः काल गंगा नदी में स्नान करें या गंगा जल की कुछ बूंदें अपने स्नान जल में डालें| की पूजा ` के लिए फल, फूल, धूप, दीप, और मिठाई २. पूजन सामग्री तैयार करेंः माँ गंगा ` तैयार रखें। और उन्हें पुष्प अर्पित करें। ३. माँ   गंगा की आरतीः स्नान के बाद गंगा माँ की आरती करें ४. ध्यान और प्रार्थनाः शांत मन से ध्यान करें और प्रार्थना में अपने पितरों की शांति के लिए गंगा माँ से आशीर्वाद मांगें | ५. दान का महत्वः जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें। गंगा सप्तमी के इस दिन उपरोक्त विधियों का पालन करने से आपके जीवन में सुख समृद्धि का वास होगा और आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। 23-04-26 गंगा सप्तमी गुरुवार ক্রী হুবল  वैसाख मास पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी का पर्व है, इसे गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। च वैसाख मनाया जाता ক্কী হুবল  की सप्तमी को जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित  मास "8 होने के कारण इस दिन को जान्हु सप्तमी भी कहा जाता है। की शुक्ल  पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है, इसे वैसाख मास गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। वैसाख  मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित होने के कारण इस दिन को जान्हु सप्तमी भी कहा जाता है, जान्हु ऋषि की पुत्री होने के कारण ही माँ गंगा का एक नाम जान्हवी भी है। गंगा सप्तमी पूजा विधिः १. स्नान से दिन की शुरुआत करेंः प्रातः काल गंगा नदी में स्नान करें या गंगा जल की कुछ बूंदें अपने स्नान जल में डालें| की पूजा ` के लिए फल, फूल, धूप, दीप, और मिठाई २. पूजन सामग्री तैयार करेंः माँ गंगा ` तैयार रखें। और उन्हें पुष्प अर्पित करें। ३. माँ   गंगा की आरतीः स्नान के बाद गंगा माँ की आरती करें ४. ध्यान और प्रार्थनाः शांत मन से ध्यान करें और प्रार्थना में अपने पितरों की शांति के लिए गंगा माँ से आशीर्वाद मांगें | ५. दान का महत्वः जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें। गंगा सप्तमी के इस दिन उपरोक्त विधियों का पालन करने से आपके जीवन में सुख समृद्धि का वास होगा और आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। - ShareChat