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#Successful Life #success #struggle #pain #dard
Successful Life - अगर मैं कामयाब नहीं हुआ तो हर रात, सोने से ठीक पहले... एक ही सवाल मेरे दिमाग में बार-बार घूमता है "3 # 7 कामयाब नहीं हुआ... तो मेरा क्या होगा?" और यकीन मान, ये सवाल सिर्फ सवाल नहीं है... ये धीरे-धीरे अंदर से तोड़ देता है। छत को घूरते-घूरते कब आँखें भर जाती हैं, पता ही नहीं आँसू खुद ब॰खुद निकल आते हैं... बिना  चलता| आवाज़़ के, बिना किसी को बताए। दिन में तो मैं ठीक होने का नाटक कर लेता हूँ॰॰ लोगों के बीच हँस भी लेता हूँ॰॰. पर रात? रात सच दिखा देती है। हर वो ख्वाब जो पूरा नहीं हुआ... हर वो कोशिश जो अधूरी रह गई... सब सामने आकर खड़े हो जाते हैं। और फिर लगता है जैसे मैं खुद से ही हार रहा हूँ। डर लगता है... कि कहीं ये मेहनत, ये सपने... सब बेकार ना हो जाएँ। कि कहीं मैं भी उन लोगों में शामिल ना हो जाऊँ, जिनकी कहानियाँ कभी पूरी ही नहीं होतीं। पर अजीब बात ये है... इतने डर, इतने आँसुओं के बाद भी॰॰. अंदर कहीं एक छोटी सी उम्मीद अब भी जिंदा है। बहुत कमजोर है, पर है। वही मुझे हर सुबह उठाकर फिर से कोशिश करने पर मजबूर करती है। ٩ ٤٤ रहा हू॰॰. पर पूरी तरह टूटा नहीं हूँ। शायद शायद मैं डर रहा हूँ॰॰. पर रुका नहीं हूँ। आँसू॰ और शायद... एक दिन यही रातें, यही मेरी कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा बन जाएँगे। अगर मैं कामयाब नहीं हुआ तो हर रात, सोने से ठीक पहले... एक ही सवाल मेरे दिमाग में बार-बार घूमता है "3 # 7 कामयाब नहीं हुआ... तो मेरा क्या होगा?" और यकीन मान, ये सवाल सिर्फ सवाल नहीं है... ये धीरे-धीरे अंदर से तोड़ देता है। छत को घूरते-घूरते कब आँखें भर जाती हैं, पता ही नहीं आँसू खुद ब॰खुद निकल आते हैं... बिना  चलता| आवाज़़ के, बिना किसी को बताए। दिन में तो मैं ठीक होने का नाटक कर लेता हूँ॰॰ लोगों के बीच हँस भी लेता हूँ॰॰. पर रात? रात सच दिखा देती है। हर वो ख्वाब जो पूरा नहीं हुआ... हर वो कोशिश जो अधूरी रह गई... सब सामने आकर खड़े हो जाते हैं। और फिर लगता है जैसे मैं खुद से ही हार रहा हूँ। डर लगता है... कि कहीं ये मेहनत, ये सपने... सब बेकार ना हो जाएँ। कि कहीं मैं भी उन लोगों में शामिल ना हो जाऊँ, जिनकी कहानियाँ कभी पूरी ही नहीं होतीं। पर अजीब बात ये है... इतने डर, इतने आँसुओं के बाद भी॰॰. अंदर कहीं एक छोटी सी उम्मीद अब भी जिंदा है। बहुत कमजोर है, पर है। वही मुझे हर सुबह उठाकर फिर से कोशिश करने पर मजबूर करती है। ٩ ٤٤ रहा हू॰॰. पर पूरी तरह टूटा नहीं हूँ। शायद शायद मैं डर रहा हूँ॰॰. पर रुका नहीं हूँ। आँसू॰ और शायद... एक दिन यही रातें, यही मेरी कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा बन जाएँगे। - ShareChat