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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - अधूरे सपने , जिन्हें सुनकर मृत्युशय्या पर रावण के 9 राम भी सोच में पड़ गए मृत्युशय्या पर पडे़ रावण ने अपने जीवन के वे नौ सपने बताए, जिन्हें सुनकर स्वयं श्रीराम भी कुछ पल मौन हो गए।  रावण का पहला सपना था धरती और स्वर्ग को जोड़ने वाली सीढ़ी बनाना, ताकि इंसान पैदल ही देवताओं तक पहुंच सके।  दूसरा सपना था कि कोई भी पुत्र अपने पिता के रहते मृत्यु को न पाए, क्योंकि रावण के अनुसार यह सबसे बड़ा अन्याय है। तीसरा सपना था मृत्यु के नियम बदलना , ताकि मरते समय मनुष्य स्वयं अपने पाप और पुण्य देख सके।  समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाना, जिससे पूरी चौथा सपना था दुनिया की प्यास बुझ सके।  की दुर्गंध को खत्म करना, ताकि लोग बिना पांचवां सपना था शराब झिझक उसे पी सकें। सोने में खुशबू भरना , ताकि असली और नकली की তঠা মপনা থা पहचान सूंघ कर हो सके। भार उठाने से मुक्त करना।  सातवां सपना था शेषनाग को पृथ्वी का " आठवा सपना था खून का रंग सफेद कर देना , ताकि हिंसा का भय कम हो जाए। और नौवां सपना था कि दुनिया में रंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। यही थे रावण के वे अधूरे सपने , जो उसे महापुरुष भी बनाते हैं और जय श्री राम अपराधी भी। कृपया पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर किसी को यह जानकारी मिल सके। अधूरे सपने , जिन्हें सुनकर मृत्युशय्या पर रावण के 9 राम भी सोच में पड़ गए मृत्युशय्या पर पडे़ रावण ने अपने जीवन के वे नौ सपने बताए, जिन्हें सुनकर स्वयं श्रीराम भी कुछ पल मौन हो गए।  रावण का पहला सपना था धरती और स्वर्ग को जोड़ने वाली सीढ़ी बनाना, ताकि इंसान पैदल ही देवताओं तक पहुंच सके।  दूसरा सपना था कि कोई भी पुत्र अपने पिता के रहते मृत्यु को न पाए, क्योंकि रावण के अनुसार यह सबसे बड़ा अन्याय है। तीसरा सपना था मृत्यु के नियम बदलना , ताकि मरते समय मनुष्य स्वयं अपने पाप और पुण्य देख सके।  समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाना, जिससे पूरी चौथा सपना था दुनिया की प्यास बुझ सके।  की दुर्गंध को खत्म करना, ताकि लोग बिना पांचवां सपना था शराब झिझक उसे पी सकें। सोने में खुशबू भरना , ताकि असली और नकली की তঠা মপনা থা पहचान सूंघ कर हो सके। भार उठाने से मुक्त करना।  सातवां सपना था शेषनाग को पृथ्वी का " आठवा सपना था खून का रंग सफेद कर देना , ताकि हिंसा का भय कम हो जाए। और नौवां सपना था कि दुनिया में रंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। यही थे रावण के वे अधूरे सपने , जो उसे महापुरुष भी बनाते हैं और जय श्री राम अपराधी भी। कृपया पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर किसी को यह जानकारी मिल सके। - ShareChat