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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी, उन तमाम ख़्वाहिशों को. जिन्हें जीना चाहा था मैंने, पर वक़्त ने इजाज़त ही ना दी। कुछ सपने थे, जो आँखों में ही रह गए, कुछ रास्ते थे, जो कदमों तक आकर मुड़ गए, मैं चाहती थी खुलकर आसमान छूना, पर ज़िम्मेदारियों के धागों में बंध कर रुक गई। मेरी भी ख्वाहिश थी बेवजह मुस्कुराने की, बिना डरे, बेपरवाह उड़़ जाने की, पर हर बार खुद को ही समझा लिया मैंने , और दिल को चुप कराना सीख लिया मैंने। कभी लिखूँगी उस " मैं॰ को, जो कहीं भीड़ में खो गई है, जो हँसती तो है हर रोज़़, पर अंदर से थोड़ी सी रो गई है। कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी. Iehen igeheart Follow कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी, उन तमाम ख़्वाहिशों को. जिन्हें जीना चाहा था मैंने, पर वक़्त ने इजाज़त ही ना दी। कुछ सपने थे, जो आँखों में ही रह गए, कुछ रास्ते थे, जो कदमों तक आकर मुड़ गए, मैं चाहती थी खुलकर आसमान छूना, पर ज़िम्मेदारियों के धागों में बंध कर रुक गई। मेरी भी ख्वाहिश थी बेवजह मुस्कुराने की, बिना डरे, बेपरवाह उड़़ जाने की, पर हर बार खुद को ही समझा लिया मैंने , और दिल को चुप कराना सीख लिया मैंने। कभी लिखूँगी उस " मैं॰ को, जो कहीं भीड़ में खो गई है, जो हँसती तो है हर रोज़़, पर अंदर से थोड़ी सी रो गई है। कभी खुद पर लिख पाऊँ तो लिखूँगी. Iehen igeheart Follow - ShareChat