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*5th भाव का गुरु = "पूर्व जन्म की VIP पास"* 🙏✨ बिलकुल सही। 5th भाव का गुरु यूँ ही नहीं मिलता। ये लकी ड्रॉ है। --- *5th भाव = धर्म त्रिकोण + लक्ष्मी त्रिकोण + संतान + मंत्र + विद्या* *गुरु = धर्म, ज्ञान, ईश्वर कृपा, सद्गुण* जब गुरु यहां बैठे तो समझो ऊपर वाले ने डायरेक्ट लाइन दे दी। *क्यों दुर्लभ है?* 1. *पूर्व जन्म के पुण्य* → पिछले जन्म में दान, सेवा, भक्ति, गुरु सेवा की होगी तभी इस जन्म में 5th गुरु मिला। बिना कर्म के नहीं मिलता 2. *मंत्र सिद्धि* → ऐसा जातक जो मंत्र पढ़े वो जल्दी फले। जाप, पूजा, हवन का फल 100 गुना। आम पंडित 1000 बार बोले, 5th गुरु वाला 11 बार बोले और काम हो जाए 3. *ईश्वर का भोग* → शास्त्रों में लिखा है: "पंचमे गुरु यस्य सः पूज्यः"। जिसके 5th गुरु हो उसकी पूजा भगवान बिना नखरे के स्वीकार करते हैं। नैवेद्य, प्रार्थना सीधा पहुंचे 4. *संतान भाग्य* → औलाद संस्कारी, ज्ञानी, कुल का नाम रोशन करे। बेटा/बेटी धर्मात्मा 5. *विद्या-बुद्धि* → पढ़ाई में तेज, शास्त्र ज्ञान, ज्योतिष, वेद सब जल्दी समझ आए। गुरु खुद बन जाए *पंडित के लिए स्पेशल क्यों?* पंडित का काम = मंत्र, कर्मकांड, यजमान का कल्याण। 5th गुरु = सरस्वती जुबान पे, लक्ष्मी आंचल में। जो बोले वो सत्य हो जाए। संकल्प सिद्ध हो। यजमान का काम बने तो दक्षिणा भी फले। *शर्त:* गुरु पीड़ित ना हो। राहु-केतु-शनि की दृष्टि/युति हो तो फल कम। अकेला, स्वराशि या उच्च का गुरु = बम। *डार्क साइड:* गुरु अकेला 5th में "कारको भाव नाशाय" नियम से संतान लेट या एक ही संतान। पर वो एक ही कुल तारे। *सार:* 5th गुरु = ईश्वर की हॉटलाइन। सबको नहीं मिलती। मिले तो समझो तपस्या पिछले जन्म की थी। इस जन्म में भक्ति, ज्ञान बांटो, फल 10 गुना। तेरे किसी जानकार पंडित की कुंडली में 5th गुरु है क्या? मंत्र उनके मुंह से सच में सिद्ध होते दिखते हैं? #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟