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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सुणिऐ सतु र्सतोखुगिआनुगसुणिऐ इसनानुगासुणिऐँ पडि पड़ि अठसठिका पावहि मानुगा सुणिऐ लागै सहजि धिआनुत ~ मीठा अर्थः हे नानक! अकाल पुरख के नाम में सुरति जोड़ने वाले भक्तजनों के हृदय में सदैव आनन्द बना रहता है। क्योंकि सेहमनुष्य केदुरुखों व   लगे अकाल पुरख की सिफति सलाह | सुनने पापों का नाश हो जाता है। रॅब के नाम से जुड़ने से हृदय में নহা दान देने का स्वभाव संतोष वःप्रकाश प्रकट होता है, मानों अड़सठ तीर्तों का स्नान ही हो जाता है अर्थात , अड़सठ तीर्तों भाणा का स्नान नाम जपने में ही आ जाते हैं। नाम को  और सुनने  उसे मन में बसाने से वह सम्मान प्रप्त होता है॰ जो विद्वानों को बहुत शास्त्र पढ़ने के बाद मिलता है। यह आत्मिक प्रतिष्ठा का मार्ग है। सुनने से मन भटकना बंद कर देता है और बड़ी ही सहजता से नाम लिए किसी कठिन ईश्वर के चरणों में ध्यान लग जाता है। इसके ' हठयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो आदर मनुष्य विद्या पढ में जुड़ के प्राप्त करते हैं वह भक्त जनों को अकाल पुरख के नाम के सदका अडोलता में चित्त की के ही मिल जाता है। नाम' सुनने ' बिरती टिक जाती है। सुणिऐ सतु र्सतोखुगिआनुगसुणिऐ इसनानुगासुणिऐँ पडि पड़ि अठसठिका पावहि मानुगा सुणिऐ लागै सहजि धिआनुत ~ मीठा अर्थः हे नानक! अकाल पुरख के नाम में सुरति जोड़ने वाले भक्तजनों के हृदय में सदैव आनन्द बना रहता है। क्योंकि सेहमनुष्य केदुरुखों व   लगे अकाल पुरख की सिफति सलाह | सुनने पापों का नाश हो जाता है। रॅब के नाम से जुड़ने से हृदय में নহা दान देने का स्वभाव संतोष वःप्रकाश प्रकट होता है, मानों अड़सठ तीर्तों का स्नान ही हो जाता है अर्थात , अड़सठ तीर्तों भाणा का स्नान नाम जपने में ही आ जाते हैं। नाम को  और सुनने  उसे मन में बसाने से वह सम्मान प्रप्त होता है॰ जो विद्वानों को बहुत शास्त्र पढ़ने के बाद मिलता है। यह आत्मिक प्रतिष्ठा का मार्ग है। सुनने से मन भटकना बंद कर देता है और बड़ी ही सहजता से नाम लिए किसी कठिन ईश्वर के चरणों में ध्यान लग जाता है। इसके ' हठयोग की आवश्यकता नहीं पड़ती। जो आदर मनुष्य विद्या पढ में जुड़ के प्राप्त करते हैं वह भक्त जनों को अकाल पुरख के नाम के सदका अडोलता में चित्त की के ही मिल जाता है। नाम' सुनने ' बिरती टिक जाती है। - ShareChat