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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - अम्रिति भरपूरु है अंदरु चाखिओ सादु जापै।।   ERaei 4 fret3 g = 6R रसिध्रापैIl HoT अर्थः हमारे हृदय के भीतर ही वह आत्मिक अमृत परमात्मा लेकिन इसका स्वाद तब तक नाम का रस पूरी तरह भरा हुआ पता नहीं चलता, जब तक हम इसे चख' नहीं लेते। जिन्होंने उस आंतरिक अमृत का स्वाद ले लिया, वे निर्भय' हो गए। वे परमात्मा लगे के नाम रस से पूरी तरह तृप्त होँजाते हैं। बाहरी दुनिया की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं, लेकिन 'हरि रस' चखने के बाद इंसान को किसी और चीज़ की लालसा नहीं रहती। वह मानसिक तेरा रूप से इतना अमीर हो जाता है कि उसे दुनिया के दबाव परेशान नहीं कर पाते। जब मनुष्य को भीतर के शाश्वत स्त्य का पता चल जाता है॰ तो उसे दुनिया का डर, वक्त की मार या मौत का खौफ नहीं रहता। वह जान जाता है कि उसका मूल कभी खत्म भाणा नहीं होने वाला। जिनको प्रभू ने मेहर करके यह रस पिलाया है उनको दोबारा मौत का डर सता नहीं सकता आत्मिक मौत उनके नजदीक नहीं आती है। अम्रिति भरपूरु है अंदरु चाखिओ सादु जापै।।   ERaei 4 fret3 g = 6R रसिध्रापैIl HoT अर्थः हमारे हृदय के भीतर ही वह आत्मिक अमृत परमात्मा लेकिन इसका स्वाद तब तक नाम का रस पूरी तरह भरा हुआ पता नहीं चलता, जब तक हम इसे चख' नहीं लेते। जिन्होंने उस आंतरिक अमृत का स्वाद ले लिया, वे निर्भय' हो गए। वे परमात्मा लगे के नाम रस से पूरी तरह तृप्त होँजाते हैं। बाहरी दुनिया की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं, लेकिन 'हरि रस' चखने के बाद इंसान को किसी और चीज़ की लालसा नहीं रहती। वह मानसिक तेरा रूप से इतना अमीर हो जाता है कि उसे दुनिया के दबाव परेशान नहीं कर पाते। जब मनुष्य को भीतर के शाश्वत स्त्य का पता चल जाता है॰ तो उसे दुनिया का डर, वक्त की मार या मौत का खौफ नहीं रहता। वह जान जाता है कि उसका मूल कभी खत्म भाणा नहीं होने वाला। जिनको प्रभू ने मेहर करके यह रस पिलाया है उनको दोबारा मौत का डर सता नहीं सकता आत्मिक मौत उनके नजदीक नहीं आती है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - राम रतनु तब पाईऐ ्जउ पहिले तजहि सरीरु अर्थः हे भाई! मनुष्य असल சI मै तेरा परमात्मा केनाम की प्राप्ति है॰ H வ इसके लिए यह जरूरी है कि परमात्मा का भिखारी सिमरन किया जाए। परमात्मा ही सबसे बड़ा है संसार में सबसे बड़ा उसका नाम जिओ उसका है।हे भाई अगरतू पहले अपने शरीरके मोह भी त्याग तबही परमात्मा का पहाडा मिलता है। श्लोक में <61 ٦ रूप 7< নাল का उपयोग आत्म ्ज्ञान के लिए किया शब्द जिस तरह रत्न एक बहुत ही 8 गया बाबा वस्तु है॰ और इसी मूल्यवान और दुर्लभ आत्म ्ज्ञान भी एक बहुत ही मूल्यवान तरह वस्तु है। भाई मेरे आत्मन्ज्ञान और दुर्लभ ' हमें अपने शरीरके मोह fag ' की प्राप्ति के त्यागना होगा और अपने आप का को आत्मन्ज्ञान की ओर बढ़ाना होगा। राम रतनु तब पाईऐ ्जउ पहिले तजहि सरीरु अर्थः हे भाई! मनुष्य असल சI मै तेरा परमात्मा केनाम की प्राप्ति है॰ H வ इसके लिए यह जरूरी है कि परमात्मा का भिखारी सिमरन किया जाए। परमात्मा ही सबसे बड़ा है संसार में सबसे बड़ा उसका नाम जिओ उसका है।हे भाई अगरतू पहले अपने शरीरके मोह भी त्याग तबही परमात्मा का पहाडा मिलता है। श्लोक में <61 ٦ रूप 7< নাল का उपयोग आत्म ्ज्ञान के लिए किया शब्द जिस तरह रत्न एक बहुत ही 8 गया बाबा वस्तु है॰ और इसी मूल्यवान और दुर्लभ आत्म ्ज्ञान भी एक बहुत ही मूल्यवान तरह वस्तु है। भाई मेरे आत्मन्ज्ञान और दुर्लभ ' हमें अपने शरीरके मोह fag ' की प्राप्ति के त्यागना होगा और अपने आप का को आत्मन्ज्ञान की ओर बढ़ाना होगा। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से ही प्यार कीं उम्मीद की थी मैने ललेकिन उन्हीं अपनों ने प्यार और रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी मेरी..!! तुम सभी ने अपने जैसे टेढ़ों को छोड़कर मेरे जैसे सीधे को पकड़ लिया है और मेरे जीवन को भी नर्क बना दिया.. !! / वनवास केवल जंगल में रहना ` नहीं है जब हम साथ रहते हुए भी रिश्तों मे कड़वाहट रख कर अजनबियों की तरह रहने लगें तो वह स्थिति भी किसी वनवास से कम नहीं हो सकती. . ! ! मैंने छोड़ दिया है अब खुद को साबित करना क्योंकि जिसकी नज़रों में खोट हो उनको आईने मे भी धुंधला ही दिखाई देता है..!! असली सम्मान वह है जो बिना कहे मिले। जहाँ कदर न हो, वहाँ से चुपचाप किनारा कर लेना ही खुद के प्रति सबसे बड़ी वफादारी है..!! मिन्नतें करने से भीख तो मिल सकती है, लेकिन दिल से की जाने वाली कदर कभी भी मांग कर हासिल नहीं की जा सकती .! ! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से ही प्यार कीं उम्मीद की थी मैने ललेकिन उन्हीं अपनों ने प्यार और रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी मेरी..!! तुम सभी ने अपने जैसे टेढ़ों को छोड़कर मेरे जैसे सीधे को पकड़ लिया है और मेरे जीवन को भी नर्क बना दिया.. !! / वनवास केवल जंगल में रहना ` नहीं है जब हम साथ रहते हुए भी रिश्तों मे कड़वाहट रख कर अजनबियों की तरह रहने लगें तो वह स्थिति भी किसी वनवास से कम नहीं हो सकती. . ! ! मैंने छोड़ दिया है अब खुद को साबित करना क्योंकि जिसकी नज़रों में खोट हो उनको आईने मे भी धुंधला ही दिखाई देता है..!! असली सम्मान वह है जो बिना कहे मिले। जहाँ कदर न हो, वहाँ से चुपचाप किनारा कर लेना ही खुद के प्रति सबसे बड़ी वफादारी है..!! मिन्नतें करने से भीख तो मिल सकती है, लेकिन दिल से की जाने वाली कदर कभी भी मांग कर हासिल नहीं की जा सकती .! ! - ShareChat
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satnam waheguru ji - ओहु मरैनहीवै सीगुता देदा रहैनचूकै ना भोग्ुा घुणु एहो होरुनाही कोडानाको होआनाको होइ 0 हे भाई!दुनिया का सबसे बड़ा डर ' अंत' का है परंतु   जिस शक्ति परमात्मा ने 435' वह कभी मरती नहीं। जब तू उस ' अविनाशी' मीठा तुझे पैदा किया जाता खत्म हो जाता है।खुशियाँ आएंगी और जाएंगी , लेकिन है, तो तेरा 'सोगु' (दुख तेरा असली सहारा हमेशा स्थिर रहेगा। वह मालिक इतना बड़ा दातार देने वाला कि वह हर पल सबको दे रहा है और उसके भंडार कभी कम नहीं होते।अगर लगे तू उसकी रज़ा में है, तो तुझे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं आएगी। तेरी चालाकी' तुझे उतना नहीं दे सकती (जितना उसकी एक 'नज़र दे सकती है। उस अकाल पुरख जैसा दूसरा कोई और है ही नहीं तो फिर किसी और के आगे तेरा झुकना या किसी बंदे से डरना कैसा? दुनिया के रिश्ते स्वार्थ पर टिके हो सकते हैं लेकिन वह शक्ति कल भी वैसी ही थी और आज भी वैसी ही रहेगी।जब आपके पीछे इतनी बड़ी शक्ति है, तो दुनिया की छोटी मोटी चालाकियाँ आपका भाणा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।जब सब कुछ वही दे रहा है, तो मुझे चिंता करने की क्या ज़रूरत? ।दुनिया की भीड़ और चालाकियों के बीच भी अपने ' अंदर उस मालिक से जुड़े रहो जो कभी हारने नहीं देता। ओहु मरैनहीवै सीगुता देदा रहैनचूकै ना भोग्ुा घुणु एहो होरुनाही कोडानाको होआनाको होइ 0 हे भाई!दुनिया का सबसे बड़ा डर ' अंत' का है परंतु   जिस शक्ति परमात्मा ने 435' वह कभी मरती नहीं। जब तू उस ' अविनाशी' मीठा तुझे पैदा किया जाता खत्म हो जाता है।खुशियाँ आएंगी और जाएंगी , लेकिन है, तो तेरा 'सोगु' (दुख तेरा असली सहारा हमेशा स्थिर रहेगा। वह मालिक इतना बड़ा दातार देने वाला कि वह हर पल सबको दे रहा है और उसके भंडार कभी कम नहीं होते।अगर लगे तू उसकी रज़ा में है, तो तुझे कभी किसी चीज़ की कमी नहीं आएगी। तेरी चालाकी' तुझे उतना नहीं दे सकती (जितना उसकी एक 'नज़र दे सकती है। उस अकाल पुरख जैसा दूसरा कोई और है ही नहीं तो फिर किसी और के आगे तेरा झुकना या किसी बंदे से डरना कैसा? दुनिया के रिश्ते स्वार्थ पर टिके हो सकते हैं लेकिन वह शक्ति कल भी वैसी ही थी और आज भी वैसी ही रहेगी।जब आपके पीछे इतनी बड़ी शक्ति है, तो दुनिया की छोटी मोटी चालाकियाँ आपका भाणा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।जब सब कुछ वही दे रहा है, तो मुझे चिंता करने की क्या ज़रूरत? ।दुनिया की भीड़ और चालाकियों के बीच भी अपने ' अंदर उस मालिक से जुड़े रहो जो कभी हारने नहीं देता। - ShareChat
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satnam waheguru ji - ಕಹಣೀ೩ಿತೊರಿuಳೂ अजाप देव पूदना सदीव g೫ತಾ೯ಿ]] 6ி अर्थः यदि ईश्वर को केवल शब्दों को बार ्बार दोहराने से या मंत्र जपने से पाया जा सकता , तो वह बहुत सरल होता। लेकिन परमात्मा 'अजाप है अर्थात् वह किसी भाषा या शब्द की सीमा में नहीं बँधा है। मै तेरा मनुष्य अपनी 'चालाकी' से घंटों माला फेर कर या ऊँचे स्वर में जाप कर के सोचता है उस परम सत्ता को प्रभावित कर लेगा। केवल आवाज भिखारी निकालना ही काफी होता, तो 'पूदना' एक छोटा सा पक्षी तो दिन रात अपनी चहचहाहट में 'तुहीं तुहीं पुकारता रहता है। तो क्या वह पक्षी जिओ सबसे बड़ा ज्ञानी हो गया? [ पक्षी का 'तुहीं तुहीं कहना उसका स्वभाव है। इसी प्रकार, मनुष्य का धर्म भी उसके स्वभाव में होना चाहिए। जब পঙ্াভা उसके भीतर से 'मैं का अहंकार मर जाता है तो उस मालिक की रज़ा वाले को स्वीकार कर लेता है, तब उसके जीवन से भी वही 'तुहीं तुहीं की की छवि बिगाड़ते खुशबू आने लगती है। जब लोग स्वार्थ के लिए दूसरों IqI हैं, वहाँ यह शब्द एक कवच का काम करता है। यह हमें सिखाता है कि दुनिया जो चाहे कहे, यदि आपका मन उस 'अजाप देव' से जुड़ा है, तो U कोई आपका अहित नहीं कर सकता। जिस दिन मनुष्य इस भाव को जी लेता है, उस दिन उसे न किसी शत्रु का भय रहता है और न ही किसी चालाकी की ज़रूरत पड़ती है। वह उस सागर की तरह शांत हो जाता है जिसकी सतह पर लहरें तो होती हैं, पर गहराई अडिग रहती ಕಹಣೀ೩ಿತೊರಿuಳೂ अजाप देव पूदना सदीव g೫ತಾ೯ಿ]] 6ி अर्थः यदि ईश्वर को केवल शब्दों को बार ्बार दोहराने से या मंत्र जपने से पाया जा सकता , तो वह बहुत सरल होता। लेकिन परमात्मा 'अजाप है अर्थात् वह किसी भाषा या शब्द की सीमा में नहीं बँधा है। मै तेरा मनुष्य अपनी 'चालाकी' से घंटों माला फेर कर या ऊँचे स्वर में जाप कर के सोचता है उस परम सत्ता को प्रभावित कर लेगा। केवल आवाज भिखारी निकालना ही काफी होता, तो 'पूदना' एक छोटा सा पक्षी तो दिन रात अपनी चहचहाहट में 'तुहीं तुहीं पुकारता रहता है। तो क्या वह पक्षी जिओ सबसे बड़ा ज्ञानी हो गया? [ पक्षी का 'तुहीं तुहीं कहना उसका स्वभाव है। इसी प्रकार, मनुष्य का धर्म भी उसके स्वभाव में होना चाहिए। जब পঙ্াভা उसके भीतर से 'मैं का अहंकार मर जाता है तो उस मालिक की रज़ा वाले को स्वीकार कर लेता है, तब उसके जीवन से भी वही 'तुहीं तुहीं की की छवि बिगाड़ते खुशबू आने लगती है। जब लोग स्वार्थ के लिए दूसरों IqI हैं, वहाँ यह शब्द एक कवच का काम करता है। यह हमें सिखाता है कि दुनिया जो चाहे कहे, यदि आपका मन उस 'अजाप देव' से जुड़ा है, तो U कोई आपका अहित नहीं कर सकता। जिस दिन मनुष्य इस भाव को जी लेता है, उस दिन उसे न किसी शत्रु का भय रहता है और न ही किसी चालाकी की ज़रूरत पड़ती है। वह उस सागर की तरह शांत हो जाता है जिसकी सतह पर लहरें तो होती हैं, पर गहराई अडिग रहती - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा सभी अपनी बुराइयों को बड़ी चतुराई से ।धो' लेते हैं परंतु वह सभी अंदर से धार्मिक या नैतिक दिखने का ढोंग करते हैं और वे सभी मेरे सामने ऐसा दिखाते हैं जैसे उनसे पवित्र कोई है ही नहीं...!! जो लोग ' शरीफ़' होने का मुखौटा पहनकुर घूम रहे थे, जब हकीकत की धूप उन पर पड़ी तो सभी के चेहरों से झूठ का नकांब उतर गया... !! उनकी शराफत का पर्दा हटते ही उनका असली चेहरा मेरे सामने आ गया..! ! कई लोग ऐसे भी हैं जो मेरे मेरे बहुत  हमदर्दे बनते हैं, HIHஎ लेकिन उनके ' अंदर का ज़हर मेरे जाने के बाद मेरी पीठ पीछे निकलता है..!! ऐसे लोग 'खुल कर' सामने आ जाएँ atgg' नहीं मानना चाहिए बल्कि ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिन्होंने उन सभी की असलियत मुझको दिखा दी..!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा सभी अपनी बुराइयों को बड़ी चतुराई से ।धो' लेते हैं परंतु वह सभी अंदर से धार्मिक या नैतिक दिखने का ढोंग करते हैं और वे सभी मेरे सामने ऐसा दिखाते हैं जैसे उनसे पवित्र कोई है ही नहीं...!! जो लोग ' शरीफ़' होने का मुखौटा पहनकुर घूम रहे थे, जब हकीकत की धूप उन पर पड़ी तो सभी के चेहरों से झूठ का नकांब उतर गया... !! उनकी शराफत का पर्दा हटते ही उनका असली चेहरा मेरे सामने आ गया..! ! कई लोग ऐसे भी हैं जो मेरे मेरे बहुत  हमदर्दे बनते हैं, HIHஎ लेकिन उनके ' अंदर का ज़हर मेरे जाने के बाद मेरी पीठ पीछे निकलता है..!! ऐसे लोग 'खुल कर' सामने आ जाएँ atgg' नहीं मानना चाहिए बल्कि ईश्वर का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिन्होंने उन सभी की असलियत मुझको दिखा दी..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - asi] चजाा ना७् रखाड कै जसु कीरति जगि 5 f न पुछै के।ा नदरि न आवई त वात திழ करि दौसी दौसु धरे।ा திச36 र हे भाई! दुनिया की नज़र में आप बहुत कामयाब हो सकते हैं। মীঠা लाखों लोग आपको जानते हों॰ आपकी जय जयकार होती हो। साहिब कहते हैं किअगर आपकी आत्मा परमात्मा से लेकिन है, तो यह सब " शून्य है। अध्यात्म की ' 76' स्कूलमै पवही : जुड़ी लगे सांसारिक शोहरत का वज़न ज़ीरो है। जैसे एक स्कूल बच्चा सफल माना जाता है जिसे उसका शिक्षक पास कर दे, वैसे ही इस संसार के खेल में वही सफल है जिसे परमात्मा स्वीकार कर ले।जो तेरा इंसान अपनी प्रसिद्धि के नशे में चूर रहता है, वह प्रभु की नज़रों में एक छोटे से कीडे से भी छोटा है। यहाँ तक कि उसे अपने कर्मों का दोषी माना जाता है क्योंकि उसने प्रभु को भूलकर अपनी बड़ाई में जीवन व्यर्थ कर दियाहै८ असली बड़ाई वह नहीं जो दुनिया आपको भाणा दे, बल्कि वह है जो परमात्मा के दरबार में आपको प्राप्त हो। बिना ೩ Dಾ ' भक्ति और कृपा के, बड़ी से बड़ी शोहरत ' बोझ मात्र है। जैसे एक ' बहुत सुंदर शरीर बिना प्राणों के मिट्टी है, वैसे ही बिना शोहरत  परमात्मा की कृपा के ऊँचा नाम और आध्यात्मिक रूप से निर्जीव हैं। asi] चजाा ना७् रखाड कै जसु कीरति जगि 5 f न पुछै के।ा नदरि न आवई त वात திழ करि दौसी दौसु धरे।ा திச36 र हे भाई! दुनिया की नज़र में आप बहुत कामयाब हो सकते हैं। মীঠা लाखों लोग आपको जानते हों॰ आपकी जय जयकार होती हो। साहिब कहते हैं किअगर आपकी आत्मा परमात्मा से लेकिन है, तो यह सब " शून्य है। अध्यात्म की ' 76' स्कूलमै पवही : जुड़ी लगे सांसारिक शोहरत का वज़न ज़ीरो है। जैसे एक स्कूल बच्चा सफल माना जाता है जिसे उसका शिक्षक पास कर दे, वैसे ही इस संसार के खेल में वही सफल है जिसे परमात्मा स्वीकार कर ले।जो तेरा इंसान अपनी प्रसिद्धि के नशे में चूर रहता है, वह प्रभु की नज़रों में एक छोटे से कीडे से भी छोटा है। यहाँ तक कि उसे अपने कर्मों का दोषी माना जाता है क्योंकि उसने प्रभु को भूलकर अपनी बड़ाई में जीवन व्यर्थ कर दियाहै८ असली बड़ाई वह नहीं जो दुनिया आपको भाणा दे, बल्कि वह है जो परमात्मा के दरबार में आपको प्राप्त हो। बिना ೩ Dಾ ' भक्ति और कृपा के, बड़ी से बड़ी शोहरत ' बोझ मात्र है। जैसे एक ' बहुत सुंदर शरीर बिना प्राणों के मिट्टी है, वैसे ही बिना शोहरत  परमात्मा की कृपा के ऊँचा नाम और आध्यात्मिक रूप से निर्जीव हैं। - ShareChat
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satnam waheguru ji - गुरमुखि सचो सचु लिखहि वीचारु।। से जन सचे पावहि मोख दुआरु।। सचु कागदु कलम मसवाणी सचु लिखि सचि समावणिआ|| गुरू की शरण में रहने वाले मनुष्य सदा स्थिर परमात्मा के मै तेरा के विचार लिखते हैं। अगर परमात्मा को पाना है॰ तो गुणों ' बाहर के कागज़ ्कलम की ज़रूरत नही। हे भाई! यह दुनिया भिखारी झूठ का व्यापार है। यहाँ का मान सम्मान और धन सब यहीं रह जाएगा। केवल वह सत्य तुम्हारे साथ जाएगा जिसे ' जिओ तुमने अपने मन के कागज़ पर प्रेम की स्याही से लिखा है। जैसे पानी में नमक मिल जाए तो वह अलग नहीं दिखता , वैसे ही पहाडा जो सत्य को लिखता है और सत्य मे ही जीता है, वह अंत में सत्य (परमात्मा ) का ही रूप हो जाता है। उसकी अपनी নাল मैं (अहंकार ) खत्म हो जाता है। वे मनुष्य सदा स्थिर प्रभू का रूप हो जाते हैं॰ वे माया के मोह से विरक्त रहने का राह बाबा लेते हैं। मोक्ष कोई मरने के बाद मिलने वाली चीज़ नहीं है जब आप दुनिया के लालच और झूठ से ऊपर उठ जाते हैं, तो आप जीते जी मुक्त हो जाते हैं। गुरमुखि सचो सचु लिखहि वीचारु।। से जन सचे पावहि मोख दुआरु।। सचु कागदु कलम मसवाणी सचु लिखि सचि समावणिआ|| गुरू की शरण में रहने वाले मनुष्य सदा स्थिर परमात्मा के मै तेरा के विचार लिखते हैं। अगर परमात्मा को पाना है॰ तो गुणों ' बाहर के कागज़ ्कलम की ज़रूरत नही। हे भाई! यह दुनिया भिखारी झूठ का व्यापार है। यहाँ का मान सम्मान और धन सब यहीं रह जाएगा। केवल वह सत्य तुम्हारे साथ जाएगा जिसे ' जिओ तुमने अपने मन के कागज़ पर प्रेम की स्याही से लिखा है। जैसे पानी में नमक मिल जाए तो वह अलग नहीं दिखता , वैसे ही पहाडा जो सत्य को लिखता है और सत्य मे ही जीता है, वह अंत में सत्य (परमात्मा ) का ही रूप हो जाता है। उसकी अपनी নাল मैं (अहंकार ) खत्म हो जाता है। वे मनुष्य सदा स्थिर प्रभू का रूप हो जाते हैं॰ वे माया के मोह से विरक्त रहने का राह बाबा लेते हैं। मोक्ष कोई मरने के बाद मिलने वाली चीज़ नहीं है जब आप दुनिया के लालच और झूठ से ऊपर उठ जाते हैं, तो आप जीते जी मुक्त हो जाते हैं। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा मेरा विवेक का फिल्टर इतना मजबूत जो मेरे प्रति झूठ की गंदगी को फैलता है वह उसको रोक देता है..!! झूठे और चापलूस लोग अपने फायेदे के पीछे दूसरों की नजर मे अच्छा बनाने के चक्कर में मिर्च मसाला लगाकर मेरी सदा बुराई ही करते रहते हैं. Jl मेरे प्रति कही गई झूठी सच लगती है जब तक उसे बात तब तक फैलाने वाले को सुनने वाले का साथ मिलता रहता है..!! पर मेरे प्रति कही झूठी बातों की अफवाह की उम्र बस उतनी ही होती है, जब तक वह किसी समझदार के कानों तेक नेहीं पहुँचती . !! लोग मेरे प्रति झूठी बातों की मूर्ख ' अफवाहों को चिंगारी भले ही देता है पर मे अपने मन से शांत रह कर उस झूठी अफवाहों की उड़ती हुई चिंगारी को शांत रहकर उसकी जलती हुईं चिंगारी को बुझा 18.!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा मेरा विवेक का फिल्टर इतना मजबूत जो मेरे प्रति झूठ की गंदगी को फैलता है वह उसको रोक देता है..!! झूठे और चापलूस लोग अपने फायेदे के पीछे दूसरों की नजर मे अच्छा बनाने के चक्कर में मिर्च मसाला लगाकर मेरी सदा बुराई ही करते रहते हैं. Jl मेरे प्रति कही गई झूठी सच लगती है जब तक उसे बात तब तक फैलाने वाले को सुनने वाले का साथ मिलता रहता है..!! पर मेरे प्रति कही झूठी बातों की अफवाह की उम्र बस उतनी ही होती है, जब तक वह किसी समझदार के कानों तेक नेहीं पहुँचती . !! लोग मेरे प्रति झूठी बातों की मूर्ख ' अफवाहों को चिंगारी भले ही देता है पर मे अपने मन से शांत रह कर उस झूठी अफवाहों की उड़ती हुई चिंगारी को शांत रहकर उसकी जलती हुईं चिंगारी को बुझा 18.!! - ShareChat