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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा धोखा देने वाले रिश्तेदार अक्सर सीधे प्रहार नहीं करते। वे हितैषी का मुखौटा ' पहनकर आते हैंl उनका सबसे बड़ा हथियार होता है सूचनाओं का हेर ्फेर वे एक के कान में के खिलाफ जहर घोलते हैं और खुद दूसरे को निष्पक्ष दिखाते हैं। जब सच सामने आता है, तब तक जो सच्चा होता है वह अपना बहुत कुछ खो चुका होता है..!! ऐसी सोच वाले रिश्तेदारों का अस्तित्व ही को अलग करने पर टिका होता दूसरों ; एक है।वे जानते हैं कि अगर परिवार एक रहा, तो उनकी दाल नहीं गलेगी। इसलिए वे गलतफहमियों के बीज बोते हैं। वे सच को इस तरह तोड़ मरोड़़ कर पेश करते हैं कि भाई-भाई का दुश्मन बन जाए और वे खुद तमाशा देखकर अपनी अहमीयत को संतुष्ट कर सकें..!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा धोखा देने वाले रिश्तेदार अक्सर सीधे प्रहार नहीं करते। वे हितैषी का मुखौटा ' पहनकर आते हैंl उनका सबसे बड़ा हथियार होता है सूचनाओं का हेर ्फेर वे एक के कान में के खिलाफ जहर घोलते हैं और खुद दूसरे को निष्पक्ष दिखाते हैं। जब सच सामने आता है, तब तक जो सच्चा होता है वह अपना बहुत कुछ खो चुका होता है..!! ऐसी सोच वाले रिश्तेदारों का अस्तित्व ही को अलग करने पर टिका होता दूसरों ; एक है।वे जानते हैं कि अगर परिवार एक रहा, तो उनकी दाल नहीं गलेगी। इसलिए वे गलतफहमियों के बीज बोते हैं। वे सच को इस तरह तोड़ मरोड़़ कर पेश करते हैं कि भाई-भाई का दुश्मन बन जाए और वे खुद तमाशा देखकर अपनी अहमीयत को संतुष्ट कर सकें..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - वचखरु लेहु वणजु करहु वणजारिहो  समालिप तैसी वसतु विसाहीऐ जैसी निबहै नालिगिअगै साहु सुजाणु है लैसी वसतु समालिय गुरु साहिब का संदेश है कि यदि यह जीवन एक मै तेरा व्यापार है॰ तो हमें एक चतुर वणजारे की तरह केवल वही वखरु सौदा इकट्ठा करना चाहिए जो सदा साथ TaggI निभाए। यहाँ भौतिक धन नहीं, बल्कि नाम की कमाई और सच्चे कर्म ही असली पूँजी हैं। संसार की जिओ सुख सुविधाएँ यहीं छूट जाएँगी; केवल सत्य , संतोष और प्रेम ही वह पूँजी है जो मृत्यु के बाद भी आत्मा পঙ্াভা के साथ जाती है। हमें वही संग्रह करना चाहिए जो समय की कसौटी पर खरा उतरे। उस सुजान शाह বাল परमात्मा की कचहरी में बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक ईमानदारी देखी जाती है। वह अंतर्यामी बाबा हमारी हर नीयत से वाकिफ है।मनुष्य की सादगी और निष्कपट भाव ही वह असली मुद्रा है, जो ईश्वर के दरबार में स्वीकार होती है। हमारा जीवन एक सच्चा सौदा होना चाहिए, जहाँ हमारा हर कर्म से भरा हो। गुणों ' शाश्वत वचखरु लेहु वणजु करहु वणजारिहो  समालिप तैसी वसतु विसाहीऐ जैसी निबहै नालिगिअगै साहु सुजाणु है लैसी वसतु समालिय गुरु साहिब का संदेश है कि यदि यह जीवन एक मै तेरा व्यापार है॰ तो हमें एक चतुर वणजारे की तरह केवल वही वखरु सौदा इकट्ठा करना चाहिए जो सदा साथ TaggI निभाए। यहाँ भौतिक धन नहीं, बल्कि नाम की कमाई और सच्चे कर्म ही असली पूँजी हैं। संसार की जिओ सुख सुविधाएँ यहीं छूट जाएँगी; केवल सत्य , संतोष और प्रेम ही वह पूँजी है जो मृत्यु के बाद भी आत्मा পঙ্াভা के साथ जाती है। हमें वही संग्रह करना चाहिए जो समय की कसौटी पर खरा उतरे। उस सुजान शाह परमात्मा की कचहरी में बाहरी दिखावा नहीं, बल्कि आंतरिक ईमानदारी देखी जाती है। वह अंतर्यामी बाबा हमारी हर नीयत से वाकिफ है।मनुष्य की सादगी और निष्कपट भाव ही वह असली मुद्रा है, जो ईश्वर के दरबार में स्वीकार होती है। हमारा जीवन एक सच्चा सौदा होना चाहिए, जहाँ हमारा हर कर्म से भरा हो। गुणों ' शाश्वत - ShareChat
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satnam waheguru ji - विसुए  चसिआ घड़ीओ पहरा थिती वारी रुति अनेकानानक एको  माहु होआा सूरज़ु करते कै केते वेसपा मीठा विसुए' श्री गुरु ' नानक देव जी समझाते हैं कि समय की सबसे छोटी इकाई से लेकर महीनों तक, सब एक ही अखंड प्रवाह का हिस्सा हैं। यह विस्तार हमें जीवन के तीन मुख्य सत्य सिखाता है। क्षण की कीमतः जीवन छोटे छोटे लगे पलों का योग है, इसलिए हर सूक्ष्म पल मूल्यवान है। परिवर्तन ही स्थिरता हैः का बदलना यह दर्शाता है कि संसार में बदलाव ही दिन रात और কনুঙী | तेरा एकमात्र स्थायी सत्य है। अनेकता में एकताः जिस प्रकार एक ही सूर्य अपनी स्थिति से अनेक ऋतुएँ बनाता है, उसी प्रकार एक ही 'कर्ता' (परमात्मा) सृष्टि के अनंत रूपों, रंगों और मौसमों में समाया हुआ है। दुनिया में धर्म, भाषा भाणा और स्वरूप की भिन्नता केवल बाहरी वेष है। जिस तरह समय की हर इकाई अंततः समय ही है, वैसे ही सृष्टि का हर कण उसी एक सक्रिय शक्ति का स्वरूप है। सत्य बाहरी शोर में नहीं, बल्कि इसी एकत्व को पहचानने में हैl जैसे एक सूरज अलग ्अलग ऋतुएं पैदा करता है, वैसे ही वह एक परमात्मा इस सृष्टि के अनंत रूपों, जीवों और रंगों में समाया हुआ है। इन सबके पीछे सक्रिय शक्ति केवल एक ही है। विसुए  चसिआ घड़ीओ पहरा थिती वारी रुति अनेकानानक एको  माहु होआा सूरज़ु करते कै केते वेसपा मीठा विसुए' श्री गुरु ' नानक देव जी समझाते हैं कि समय की सबसे छोटी इकाई से लेकर महीनों तक, सब एक ही अखंड प्रवाह का हिस्सा हैं। यह विस्तार हमें जीवन के तीन मुख्य सत्य सिखाता है। क्षण की कीमतः जीवन छोटे छोटे लगे पलों का योग है, इसलिए हर सूक्ष्म पल मूल्यवान है। परिवर्तन ही स्थिरता हैः का बदलना यह दर्शाता है कि संसार में बदलाव ही दिन रात और কনুঙী | तेरा एकमात्र स्थायी सत्य है। अनेकता में एकताः जिस प्रकार एक ही सूर्य अपनी स्थिति से अनेक ऋतुएँ बनाता है, उसी प्रकार एक ही 'कर्ता' (परमात्मा) सृष्टि के अनंत रूपों, रंगों और मौसमों में समाया हुआ है। दुनिया में धर्म, भाषा भाणा और स्वरूप की भिन्नता केवल बाहरी वेष है। जिस तरह समय की हर इकाई अंततः समय ही है, वैसे ही सृष्टि का हर कण उसी एक सक्रिय शक्ति का स्वरूप है। सत्य बाहरी शोर में नहीं, बल्कि इसी एकत्व को पहचानने में हैl जैसे एक सूरज अलग ्अलग ऋतुएं पैदा करता है, वैसे ही वह एक परमात्मा इस सृष्टि के अनंत रूपों, जीवों और रंगों में समाया हुआ है। इन सबके पीछे सक्रिय शक्ति केवल एक ही है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा जिंदगी में मैंने अपने मन को इतना मार लिया है कि अब किसी चीज को पाने की तमन्ना ही नहीं रही। अब किसी से उलझने सभी से दूर का दिल ही नहीं करता; बस గ్ేI Uq और अकेले ' रहने होती ' की इच्छा दर्द खुद ही सहना है, तो को बताकर तमांशा क्या करना?. {్ల !! रिश्ते तो सभी एक्दूसरे के साथ निभाते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कोई जख्म देकर जाता है तो कोई जख्म भर कर। जो पास होकर भी अपने न हों, ऐसे नाम के रिश्तों के पीछे रोना कैसा२..!! जब से लोगों की हकीकत सोमने आई है॰ तब से यह समझ आया कि सब सिर्फ बातों में ही अपने थे। कोई मेरा सम्मान करे या न करे, मैंने हमेशा सबके लिए नेक ही सोचा है। मन d6d ' मैंने हमेशा सच को में कपट रखने से मुंह पर कहना ही ठीक समझा। मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा जिंदगी में मैंने अपने मन को इतना मार लिया है कि अब किसी चीज को पाने की तमन्ना ही नहीं रही। अब किसी से उलझने सभी से दूर का दिल ही नहीं करता; बस గ్ేI Uq और अकेले ' रहने होती ' की इच्छा दर्द खुद ही सहना है, तो को बताकर तमांशा क्या करना?. {్ల !! रिश्ते तो सभी एक्दूसरे के साथ निभाते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कोई जख्म देकर जाता है तो कोई जख्म भर कर। जो पास होकर भी अपने न हों, ऐसे नाम के रिश्तों के पीछे रोना कैसा२..!! जब से लोगों की हकीकत सोमने आई है॰ तब से यह समझ आया कि सब सिर्फ बातों में ही अपने थे। कोई मेरा सम्मान करे या न करे, मैंने हमेशा सबके लिए नेक ही सोचा है। मन d6d ' मैंने हमेशा सच को में कपट रखने से मुंह पर कहना ही ठीक समझा। - ShareChat
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satnam waheguru ji - कीआ देहि सलाईओ नैणी भावका करि सीगारो।ता सोहागणि जाणीऐ लागी जा सहुधरे पिआरो ग मै तेरा हे भाई! आमतौर पर आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है, लेकिन यहाँ आँखों में भय परमात्मा के प्रति भिखारी श्रद्धा और आदर भाव की सलाई डालो। यहां डर संसार का डर नहीं है, बल्कि यह बोध है कि वह परमशक्ति हमेशा हमारे साथ जिओ है।जब आँखों में यह मर्यादा होती है, तो इंसान बुरा देखने से बच जाता है। परमात्मा के प्रति असली श्रृंगार गहने कपड़े नहीं बल्कि प्रेम और समर्पण है। ईश्वर की भक्ति में जब तक हृदय में प्रेम का पहाडा भाव न हो, तब तक सारे कर्मकांड व्यर्थ हैं। प्रेम ही वह तत्व है वाले जो आत्मा को निखारता है। सच्ची सुहागन वह आत्मा जो परमात्मा से जुड़ी है वही मानी जाती है, जिस पर सहु पति-परमेश्वर अपना प्रेम बरसाते हैं। बाबा इंसान चाहे जितनी भी पूजा पाठ या दिखावा कर ले, सार्थकता तभी है जब वह प्रेम परमात्मा द्वारा स्वीकार कर लिया जाए। जा यानी, जब आत्मा और परमात्मा के बीच अहंकार की दीवार गिर जाती है और केवल प्रेम शेष रहता है। कीआ देहि सलाईओ नैणी भावका करि सीगारो।ता सोहागणि जाणीऐ लागी जा सहुधरे पिआरो ग मै तेरा हे भाई! आमतौर पर आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है, लेकिन यहाँ आँखों में भय परमात्मा के प्रति भिखारी श्रद्धा और आदर भाव की सलाई डालो। यहां डर संसार का डर नहीं है, बल्कि यह बोध है कि वह परमशक्ति हमेशा हमारे साथ जिओ है।जब आँखों में यह मर्यादा होती है, तो इंसान बुरा देखने से बच जाता है। परमात्मा के प्रति असली श्रृंगार गहने कपड़े नहीं बल्कि प्रेम और समर्पण है। ईश्वर की भक्ति में जब तक हृदय में प्रेम का पहाडा भाव न हो, तब तक सारे कर्मकांड व्यर्थ हैं। प्रेम ही वह तत्व है वाले जो आत्मा को निखारता है। सच्ची सुहागन वह आत्मा जो परमात्मा से जुड़ी है वही मानी जाती है, जिस पर सहु पति-परमेश्वर अपना प्रेम बरसाते हैं। बाबा इंसान चाहे जितनी भी पूजा पाठ या दिखावा कर ले, सार्थकता तभी है जब वह प्रेम परमात्मा द्वारा स्वीकार कर लिया जाए। जा यानी, जब आत्मा और परमात्मा के बीच अहंकार की दीवार गिर जाती है और केवल प्रेम शेष रहता है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - వ a मनहठि करम कमावणे फिरि फिरि जोनी पाइ।गुरमुखि जनमु सफलु है जिस नो मिलाइ।। आपे लए मै तेरा अर्थःजो मनुष्य अपने मन केअहंकार और जिद के अधीन के चक्र में होकर कर्म करता है, वह बारबार जन्म और মুৃন্ত্ব ' फंसा रहता है।जब भी मनुष्य "मैं" के अहंकार भिखारी आकर यह सोचते हैं कि "मैं ही सब या अपनी करने वाला हू' ह्लुँछ्ो कसकेव कर्म हडैँसको  जिद्दी वृत्तियों के पीछे भागते 3 Id की ओर नहीं बल्कि बंधनोंकी ओर ले जाता है।उसके मॅन का हठ उसको सत्य को देखने नहीं देता है। इसके विपरीत गुरमुख मनुष्य जिसका मुख गुरु की शिक्षाओं   पहाडा की ओर है का जन्म सफल हो जाता है, जिसे परमात्मा स्वयं वाले अपने अंदर लीन कर लेता है। सफलता सांसारिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि परमात्मा से मिलन में है।जब बाबा कोई अपने अहंकार को त्याग कर गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, तो प्रभु की कृपा से उसका जीवन सार्थक हो U से मुक्त ' जाता है और वह आवागमन के चक्र हो जाता हैl వ a मनहठि करम कमावणे फिरि फिरि जोनी पाइ।गुरमुखि जनमु सफलु है जिस नो मिलाइ।। आपे लए मै तेरा अर्थःजो मनुष्य अपने मन केअहंकार और जिद के अधीन के चक्र में होकर कर्म करता है, वह बारबार जन्म और মুৃন্ত্ব ' फंसा रहता है।जब भी मनुष्य "मैं" के अहंकार भिखारी आकर यह सोचते हैं कि "मैं ही सब या अपनी करने वाला हू' ह्लुँछ्ो कसकेव कर्म हडैँसको  जिद्दी वृत्तियों के पीछे भागते 3 Id की ओर नहीं बल्कि बंधनोंकी ओर ले जाता है।उसके मॅन का हठ उसको सत्य को देखने नहीं देता है। इसके विपरीत गुरमुख मनुष्य जिसका मुख गुरु की शिक्षाओं   पहाडा की ओर है का जन्म सफल हो जाता है, जिसे परमात्मा स्वयं वाले अपने अंदर लीन कर लेता है। सफलता सांसारिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि परमात्मा से मिलन में है।जब बाबा कोई अपने अहंकार को त्याग कर गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, तो प्रभु की कृपा से उसका जीवन सार्थक हो U से मुक्त ' जाता है और वह आवागमन के चक्र हो जाता हैl - ShareChat
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satnam waheguru ji - 343 आपि तेवड तेरी दातिII जिनि दिनु करि मीठा कै कीती राति।। लगे खसमु विसारहि तेरा ते कमजाति ।। नानक नावै भणा ISIHHIfII अर्थः परमात्मा! जितना बड़ा तू स्वयं है, गुरु नानक देव जी कहते हैं कि उतनी ही बड़ी और असीमित तेरी दाति परमात्मा के नाम के बिना मनुष्य यानी तेरी कृपा का बख्शिश या दान है। नीच या कंगाल है।उसके सिमरण के कोई अंत नहीं है, क्योंकि तू स्वयं अनंत बिना इंसान का आत्मिक जीवन है। परमात्मा ऐसा समर्थ है जिसने कर्म खोखला है। हे भाई!असली नीचता करने के लिए दिन बनाया और विश्राम ईश्वर को भूल जाने में है॰ न कि किसी के लिए रात बनाई। यह प्रकृति का चक्र विशेष कुल या जाति में जन्म लेने में। उसकी अद्भुत रचना का प्रमाण है।जो हमें परमात्मा की दी हुई नियामतों लोग उस खसम मालिक परमात्मा को दिन, रात, जीवन के लिए हमेशा विसार देते हैं यानी भूल जाते हैं, वे ही चाहिए। ' उसका शुक्रगुज़ार होना ' ऊचा असल में नीच आचरण वाले या जीवन वही है जो ईश्वर की याद से आध्यात्मिक रूप से गिरे हुए हैं। यहाँ जुड़ा है। जो उसे भूल जाते हैं, वे सब जाति का अर्थ जन्म से नहीं, बल्कि कर्म भी आत्मिक तौर पर ক্ীন  हुए कुछ और ईश्वर से दूरी से है। कंगाल हैं। 343 आपि तेवड तेरी दातिII जिनि दिनु करि मीठा कै कीती राति।। लगे खसमु विसारहि तेरा ते कमजाति ।। नानक नावै भणा ISIHHIfII अर्थः परमात्मा! जितना बड़ा तू स्वयं है, गुरु नानक देव जी कहते हैं कि उतनी ही बड़ी और असीमित तेरी दाति परमात्मा के नाम के बिना मनुष्य यानी तेरी कृपा का बख्शिश या दान है। नीच या कंगाल है।उसके सिमरण के कोई अंत नहीं है, क्योंकि तू स्वयं अनंत बिना इंसान का आत्मिक जीवन है। परमात्मा ऐसा समर्थ है जिसने कर्म खोखला है। हे भाई!असली नीचता करने के लिए दिन बनाया और विश्राम ईश्वर को भूल जाने में है॰ न कि किसी के लिए रात बनाई। यह प्रकृति का चक्र विशेष कुल या जाति में जन्म लेने में। उसकी अद्भुत रचना का प्रमाण है।जो हमें परमात्मा की दी हुई नियामतों लोग उस खसम मालिक परमात्मा को दिन, रात, जीवन के लिए हमेशा विसार देते हैं यानी भूल जाते हैं, वे ही चाहिए। ' उसका शुक्रगुज़ार होना ' ऊचा असल में नीच आचरण वाले या जीवन वही है जो ईश्वर की याद से आध्यात्मिक रूप से गिरे हुए हैं। यहाँ जुड़ा है। जो उसे भूल जाते हैं, वे सब जाति का अर्थ जन्म से नहीं, बल्कि कर्म भी आत्मिक तौर पर ক্ীন  हुए कुछ और ईश्वर से दूरी से है। कंगाल हैं। - ShareChat
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satnam waheguru ji - हरि सिमरनि कीओ सगल अकारा।। हरि सिमरन महि आपि निरंकाराII [5 मै तेरा भावः इस पूरी सृष्टि की उत्पत्ति, इसके समस्त आकार और रूप उस के हुकरुम से ही अस्तित्व में आए हैं। यानी यह सारा aHis பIICII भिखारी उसी की याद का ही एक मूर्त रूप है।परमात्मा अपनी रचना से अलग नहीं है। वह अपने सिमरन में, अपनी याद में और अपनी बनाई हुई जिओ 41" मौजूद है। जिस हृदय में उसका सिमरन चलता है, वहाँ स्चना वह निराकार प्रभु साक्षात प्रकट हो जाता हे।अक्सर हम समझते हें कि सिमरन केवल माला जपना हेः लेकिन गुरु साहिब कहते हैं कि यह पूरा पहाडा ब्रह्मांड ही परमात्मा के एक 'सिमरन। या उसके 'विचार' का परिणाम है। परमात्मा का कोई रूप नहीं है वह निराकार है लेकिन जब कोई নাল मनुष्य उसे सिमरन के जरिए याद करता है, तो वह निराकार प्रभु उस व्यक्ति के अनुभव में 'साकार' हो जाता हे। वह कहीं दूर नहीं, बल्कि बाबा सिमरन की अवस्था के भीतर ही समाया हुआ है। गुरु साहेब जी समझा रहे हैं कि जिसे तुम बाहर ढूंढ रहे हो, वह अपने सिमरन के रूप जी में इस पूरी कायनात में व्याप्त है। यदि तुम उस निराकार को पाना चाहते हो, तो 'हरि सिमरन' में लीन हो जाओ, क्योंकि वह स्वयं वहीं निवास करता हे।सिमरन वह कडी हे जो जीव को वापस उस मूल स्रोत से जोड़ देती है। हरि सिमरनि कीओ सगल अकारा।। हरि सिमरन महि आपि निरंकाराII [5 मै तेरा भावः इस पूरी सृष्टि की उत्पत्ति, इसके समस्त आकार और रूप उस के हुकरुम से ही अस्तित्व में आए हैं। यानी यह सारा aHis பIICII भिखारी उसी की याद का ही एक मूर्त रूप है।परमात्मा अपनी रचना से अलग नहीं है। वह अपने सिमरन में, अपनी याद में और अपनी बनाई हुई जिओ 41" मौजूद है। जिस हृदय में उसका सिमरन चलता है, वहाँ स्चना वह निराकार प्रभु साक्षात प्रकट हो जाता हे।अक्सर हम समझते हें कि सिमरन केवल माला जपना हेः लेकिन गुरु साहिब कहते हैं कि यह पूरा पहाडा ब्रह्मांड ही परमात्मा के एक 'सिमरन। या उसके 'विचार' का परिणाम है। परमात्मा का कोई रूप नहीं है वह निराकार है लेकिन जब कोई নাল मनुष्य उसे सिमरन के जरिए याद करता है, तो वह निराकार प्रभु उस व्यक्ति के अनुभव में 'साकार' हो जाता हे। वह कहीं दूर नहीं, बल्कि बाबा सिमरन की अवस्था के भीतर ही समाया हुआ है। गुरु साहेब जी समझा रहे हैं कि जिसे तुम बाहर ढूंढ रहे हो, वह अपने सिमरन के रूप जी में इस पूरी कायनात में व्याप्त है। यदि तुम उस निराकार को पाना चाहते हो, तो 'हरि सिमरन' में लीन हो जाओ, क्योंकि वह स्वयं वहीं निवास करता हे।सिमरन वह कडी हे जो जीव को वापस उस मूल स्रोत से जोड़ देती है। - ShareChat