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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌷शुभ रविवार #🌙 गुड नाईट #🌞 Good Morning🌞 #❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - दीन सिर्फ एक है, दो नहीं अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम ही है अल्लाह तआला फरमाता हैः अल्लाह तआला फरमाता हैः ُتْمَّمَتَأَو ْمُكْنیِد ُمُكَل ُتْلْمَگَأ ُماَلْسِإْلا ِهّللا َدْنَع esJi 8! َنیِّدلا اًنيِد ُماَلْسِإْلا ُمُكَل ُتیِضَرَو ನು یمعت (बेशक अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम ही है) (आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया, सूरह आले इमरान (३१९) तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन के रूप में पसंद कर लिया) सूरह अल मायदह (५:३) इस आयत की तफसीर Hதa दीन है। अल्लाह के यहाँ कोई दूसरा दीन नहीं है। হলাস ৪ী ৎকমান্ मिला-्जुला इस्लाम , न कोई आधा-्अधूरा इस्लाम , न कोई और न ही कोई " नया" या " संशोधित " दीन। आज के दौर में इस बात का मतलब इस्लाम क्या है? इस्लाम का मतलब है अल्लाह के सामने कुछ लोग कहते हैं " सब धर्म एक जैसे हैं" पूर्ण समर्पण। सिर्फ ज़बान से यह गलतफहमी है। "ला इलाहा इल्लल्लाह " कहना नहीं, कुछ लोग " इस्लाम + आधुनिकता " बल्कि ज़़िंदगी के हर पहलू : इबादत फॉर्म्मूला निकालते हैं कानया मुआमलात, अख्लाक, तिजारत, राजनीति जबकि अल्लाह ने दीन को पहले ही परिवार समाज सब कुछ अल्लाह मुकम्मल फरमा दिया। और उनके रसूल फ के दिए हुए हुकमों के मुताबिक चलाना| कुछ भाई-बहन शादी , बिजनेस , बैंकिंग, राजनीति में गैर इस्लामी तरीके अपनाते हैं जब अल्लाह तआला फरमाते हें कि और कहते हैं "दिल से तो हम मुसलमान हैं" "आज मैँने तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया " , याद रखें, दिल और अमल दोनों इस्लाम के तो इसका मतलब है कि अब किसी और मुताबिक होने चाहिए। नबी या किताब की ज़रूरत नहीं | हज़रत मुहम्मद २५६ आखिरी रसूल हैं *जो कोई इस्लाम के सिवा कोई और दीन तलाश करे और कुरान आखिरी किताब है। तो उससे कभी कबूल नहीं किया जाएगा और वह जो इस दीन को छोडकर किसी और आखिरत में नुकसान उठाने वालों में से होगा। " रास्ते पर चलेगाः उसका कोई अमल अल्लाह के यहॉ कबूल नहीं होगा। (सूरह आले इमरान ३:८५) आइए आज खुद से वादा करेंः कुरान को रोज पढ़ें और समझें। सुन्नत पर अमल करें।  हर मामले में शरीअत को आखिरी কমলা সান / अपने बच्चों को सही इस्लाम सिखाएं, न कि कल्चरल या लिबरल इस्लाम । अल्लाह हम सबको सच्चे इस्लाम पर मरने जीने और कयामत के दिन इस्लाम पर ही उठने की तौफीक अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन। *मेरा दीन इस्लाम है, और मैं इससे राज़ी हूँ। " दीन सिर्फ एक है, दो नहीं अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम ही है अल्लाह तआला फरमाता हैः अल्लाह तआला फरमाता हैः ُتْمَّمَتَأَو ْمُكْنیِد ُمُكَل ُتْلْمَگَأ ُماَلْسِإْلا ِهّللا َدْنَع esJi 8! َنیِّدلا اًنيِد ُماَلْسِإْلا ُمُكَل ُتیِضَرَو ನು یمعت (बेशक अल्लाह के नज़दीक दीन सिर्फ इस्लाम ही है) (आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया, सूरह आले इमरान (३१९) तुम पर अपनी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन के रूप में पसंद कर लिया) सूरह अल मायदह (५:३) इस आयत की तफसीर Hதa दीन है। अल्लाह के यहाँ कोई दूसरा दीन नहीं है। হলাস ৪ী ৎকমান্ मिला-्जुला इस्लाम , न कोई आधा-्अधूरा इस्लाम , न कोई और न ही कोई " नया" या " संशोधित " दीन। आज के दौर में इस बात का मतलब इस्लाम क्या है? इस्लाम का मतलब है अल्लाह के सामने कुछ लोग कहते हैं " सब धर्म एक जैसे हैं" पूर्ण समर्पण। सिर्फ ज़बान से यह गलतफहमी है। "ला इलाहा इल्लल्लाह " कहना नहीं, कुछ लोग " इस्लाम + आधुनिकता " बल्कि ज़़िंदगी के हर पहलू : इबादत फॉर्म्मूला निकालते हैं कानया मुआमलात, अख्लाक, तिजारत, राजनीति जबकि अल्लाह ने दीन को पहले ही परिवार समाज सब कुछ अल्लाह मुकम्मल फरमा दिया। और उनके रसूल फ के दिए हुए हुकमों के मुताबिक चलाना| कुछ भाई-बहन शादी , बिजनेस , बैंकिंग, राजनीति में गैर इस्लामी तरीके अपनाते हैं जब अल्लाह तआला फरमाते हें कि और कहते हैं "दिल से तो हम मुसलमान हैं" "आज मैँने तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया " , याद रखें, दिल और अमल दोनों इस्लाम के तो इसका मतलब है कि अब किसी और मुताबिक होने चाहिए। नबी या किताब की ज़रूरत नहीं | हज़रत मुहम्मद २५६ आखिरी रसूल हैं *जो कोई इस्लाम के सिवा कोई और दीन तलाश करे और कुरान आखिरी किताब है। तो उससे कभी कबूल नहीं किया जाएगा और वह जो इस दीन को छोडकर किसी और आखिरत में नुकसान उठाने वालों में से होगा। " रास्ते पर चलेगाः उसका कोई अमल अल्लाह के यहॉ कबूल नहीं होगा। (सूरह आले इमरान ३:८५) आइए आज खुद से वादा करेंः कुरान को रोज पढ़ें और समझें। सुन्नत पर अमल करें।  हर मामले में शरीअत को आखिरी কমলা সান / अपने बच्चों को सही इस्लाम सिखाएं, न कि कल्चरल या लिबरल इस्लाम । अल्लाह हम सबको सच्चे इस्लाम पर मरने जीने और कयामत के दिन इस्लाम पर ही उठने की तौफीक अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन। *मेरा दीन इस्लाम है, और मैं इससे राज़ी हूँ। " - ShareChat