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#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः | क्षेत्रं क्षेत्रीं तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत I। हे अर्जुन ! जिस प्रकार एक हो सूर्य इस सम्पूर्ण ग्रह्माण्डको प्रकाशित करता हैं॰ उसी प्रकार एक ही आत्मा सम्पूर्ण क्षेत्रको प्रकाशित करता है II ३३ II क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुपा | भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्।I इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके भेदको * तथा मुक्त होनेको जो पुरुप ज्ञान- कार्यसहित সক্ৃনিম नेत्रोंद्वारा तत्त्वसे जानते हैँ, वे परम महात्माजन ग्रह्म परमात्माको प्राप्त होते हैँ II ३४ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग- योगो नाम त्रयोदशोषध्यायः II १३ Il 0 क्षेत्रको जड विकारो, क्षणिक और नाशवान् तथा क्षेत्रज्ञको चेतन अविकारो और अविनाशो जानना हो ' उनके भेदको नित्य जानना ' है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः | क्षेत्रं क्षेत्रीं तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत I। हे अर्जुन ! जिस प्रकार एक हो सूर्य इस सम्पूर्ण ग्रह्माण्डको प्रकाशित करता हैं॰ उसी प्रकार एक ही आत्मा सम्पूर्ण क्षेत्रको प्रकाशित करता है II ३३ II क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुपा | भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्।I इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके भेदको * तथा मुक्त होनेको जो पुरुप ज्ञान- कार्यसहित সক্ৃনিম नेत्रोंद्वारा तत्त्वसे जानते हैँ, वे परम महात्माजन ग्रह्म परमात्माको प्राप्त होते हैँ II ३४ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग- योगो नाम त्रयोदशोषध्यायः II १३ Il 0 क्षेत्रको जड विकारो, क्षणिक और नाशवान् तथा क्षेत्रज्ञको चेतन अविकारो और अविनाशो जानना हो ' उनके भेदको नित्य जानना ' है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat