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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - करमी आवै कपडा भौखु नदरी SRI नानक एवै जाणीऐ सभ्रु आपे सचिआसु्[ा ম নযা गुरु नानक देव जी समझाते हैं कि पिछले अच्छे कर्मों के फलस्वरूप ही हमें यह मनुष्य जन्म रूपी ' कपडा (शरीर) प्राप्त हुआ ಞಸ है। लेकिन इस जीवन का असली उद्देश्य केवल शरीर धारण करना नहीं, बल्कि जन्म मरण के बंधन से मुक्ति पाना है। यह मुक्ति (मोक्ष) का द्वार केवल 3 कर्मों से नहीं, बल्कि परमात्मा की नदर (कृपा दृष्टि ) से ही खुलता है। हमें यह कभी अहंकार नहीं करना चाहिए कि हम केवल अपने बल या कर्मों পঙ্কাভা पर मोक्ष पा लेंगे। हमारे कर्म हमें इस संसार में तो लाए हैं, लेकिन इस संसार वाले रूपी सागर से पार उतारने वाली केवल प्रभु की दया है। गुरु जी कहते हैं कि सत्य को इस रूप में पहचानो कि वह परमात्मा ही सचिआरु (परम सत्य) है बाबा और वह हर जगह, हर कण में स्वयं ही विद्यमान है। जब मनुष्य को यह समझ 7 है कि कर्ता-्धर्ता केवल वही है, तो उसका अहंकार मिट जाता है 3T 5q' और उसे परमात्मा के सत्य करमी आवै कपडा भौखु नदरी SRI नानक एवै जाणीऐ सभ्रु आपे सचिआसु्[ा ম নযা गुरु नानक देव जी समझाते हैं कि पिछले अच्छे कर्मों के फलस्वरूप ही हमें यह मनुष्य जन्म रूपी ' कपडा (शरीर) प्राप्त हुआ ಞಸ है। लेकिन इस जीवन का असली उद्देश्य केवल शरीर धारण करना नहीं, बल्कि जन्म मरण के बंधन से मुक्ति पाना है। यह मुक्ति (मोक्ष) का द्वार केवल 3 कर्मों से नहीं, बल्कि परमात्मा की नदर (कृपा दृष्टि ) से ही खुलता है। हमें यह कभी अहंकार नहीं करना चाहिए कि हम केवल अपने बल या कर्मों পঙ্কাভা पर मोक्ष पा लेंगे। हमारे कर्म हमें इस संसार में तो लाए हैं, लेकिन इस संसार वाले रूपी सागर से पार उतारने वाली केवल प्रभु की दया है। गुरु जी कहते हैं कि सत्य को इस रूप में पहचानो कि वह परमात्मा ही सचिआरु (परम सत्य) है बाबा और वह हर जगह, हर कण में स्वयं ही विद्यमान है। जब मनुष्य को यह समझ 7 है कि कर्ता-्धर्ता केवल वही है, तो उसका अहंकार मिट जाता है 3T 5q' और उसे परमात्मा के सत्य - ShareChat