PI💞HA
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*समस्त मातृशक्ति भ्रातागणों एवं आपके प्रियजनों को मेरा सादर प्रणाम* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *प्रज्ञा योग की सुगम साधना*:-06 🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️🌥️ गायत्री मंत्र हमारे साथ- साथ बोलें- "ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।।" ---------------------- जप के साथ ध्यान करना चाहिए। जप और ध्यान का, दोनों का मिला समन्वय समझना चाहिए। ध्यान किसका करना चाहिए? सविता गायत्री का देवता है। प्रात:काल के समय पर। प्रात:काल सूरज आपने देखा है न। गायत्री का सूरज इसे ही मानना चाहिए। यूनिवर्सल है यह। गायत्री माता का जो चित्र आपने रखा है। वह तो आप हिंदू हैं तो रखा है और अगर आप मुसलमान हैं तो आप नहीं रखेंगे। इसलिए देवपूजा तो केवल हिंदूओं के लिए है और यह जो है, सविता का ध्यान, सविता का ध्यान सबके लिए है। यूनिवर्सल है। मुसलमान धर्म में, इसाई धर्म में, सब जगह भगवान का प्रतीक प्रकाश को माना गया है तो सविता प्रात:काल का निकलता हुआ सुनहरा सूर्य, उसका आप ध्यान करते जाइए। गायत्री का तीन माला- जप करने के साथ- साथ में एक और बात उसमें शामिल कीजिए कि सविता सवेरे का सूर्य पूर्व दिशा से निकलते हुए सूर्य के सामने आप छोटे बच्चे के तरीके से नंग बैठे हुए हैं और आपके मन में, आपके शरीर में और आपके अन्त:करण में, हृदय माना गया है, उसमें सविता की किरणें प्रवेश करती हैं तो आपकी अन्त:करण को भावनाओं से भर देती हैं। मस्तिष्क को ज्ञान से भर देती हैं। शरीर को बल से भर देती हैं या यह कहिए कि शरीर को श्रेष्ठ कर्म करने के लिए और बुद्धी को श्रेष्ठ चिंतन करने के लिए और भावनाओं में श्रेष्ठता भरने के लिए ये सविता कि किरणें हैं। ये अपना अनुग्रह और अपना अनुदान हमको दे रही है। जप करने के साथ- साथ में यह ध्यान करना आवश्यक है। जप करने से पहले देवपूजन चंदन, अक्षत और पुष्प, उसको मिलाकरके हमारा जीवन इस तरह का हो। फिर इसके बद में भगवान के अनुग्रह का भाव करना चाहिए। यह प्रतिज्ञा का भाव है। अनुग्रह का भाव है। भगवान ने इस रूप में, सूर्य में सविता के रूप में तीन अनुग्रह हमको दिए हैं। तीन क्षेत्रों में उनका प्रवेश हुआ है। इस तरह एक माला आत्मपरिष्कार के लिए, एक वातावरण के संशोधन करने के लिए और एक माला यह आपका प्रज्ञा- मिशन है इसकी सफलता के लिए। चलिए यह आपका जप हुआ। क्रमशः जारी *पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य* #गायत्री परिवार #(अखिल विश्व – गायत्री परिवार) #गायत्री परिवार मुंबई महाराष्ट्र #युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचार✒️ #🙏प्रातः वंदन
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