ShareChat
click to see wallet page
search
#मेरी कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
मेरी कविता - सब इंसान हो मानव हो तो जुड़ो ऐसे जेसे मिले अपने कोई बांधव हो तुम हो सुबुद्धि पास तुम्हारे समृद्धि तो क्यूं करो परेशा किसी को क्या मन तुम्हारे ऐसे लक्षण जैसे घात देखता कोई दानव हो नहीं तुम तो इंसानियत में बेमिसाल हो मानवता का अवतार हो तुमने ना सोचा बुरा किसी का बस चंचल मन से तुम गु़लाम हो तुम खुद को दृढ रखो नीयत नेक सीरत साफ रखो पल में धुल जाएगें दाग सारे ऐसी रब की तुम पर इनायत हो स्वाती छीपा सब इंसान हो मानव हो तो जुड़ो ऐसे जेसे मिले अपने कोई बांधव हो तुम हो सुबुद्धि पास तुम्हारे समृद्धि तो क्यूं करो परेशा किसी को क्या मन तुम्हारे ऐसे लक्षण जैसे घात देखता कोई दानव हो नहीं तुम तो इंसानियत में बेमिसाल हो मानवता का अवतार हो तुमने ना सोचा बुरा किसी का बस चंचल मन से तुम गु़लाम हो तुम खुद को दृढ रखो नीयत नेक सीरत साफ रखो पल में धुल जाएगें दाग सारे ऐसी रब की तुम पर इनायत हो स्वाती छीपा - ShareChat