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#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat