Praveen Kumar Yadav
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1857 ई के स्वाधीनता संग्राम के नायक शहीद मंगल पांडे जी के 169 वे बलिदान दिवस पर मैं उन्हें कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.अग्रेजो के खिलाफ पहली चिंगारी लगाने वाले देशभक्त शहीद मंगल पांडे जी को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर नामक स्थान पर 8 अप्रैल 1857 ई को फांसी पर लटका दिया गया था.महान देशभक्त शहीद मंगल पांडे जी का जन्म 19 जुलाई 1827 ई को बलिया जिले के नगवा गाँव में हुआ था.आप के पिताजी का नाम दिवाकर पांडे तथा माताजी का नाम अभय रानी पांडे था.मंगल पांडे जी 22 वर्ष की उम्र में 1849 ई में ईस्ट इंडिया कंपनी में कलकत्ता के पास बैरकपुर की छावनी में 34 वी बंगाल इन्फेंटी में सिपाही के तौर पर तैनात थे.आप अग्रेजो द्वारा भारतीय सैनिकों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार से दुखी थे.10 मई 1857 की क्रांति का मुख्य कारण यह था कि 1856 ई से पहले जितने भी कारतूस बंदूक का इस्तेमाल होता था उसमें गाँय और सुअर की चर्बी का उपयोग नहीं किया जाता था परंतु 1856 ई में एक नई बंदूक इनफील्ड दी गई जिस बंदूक में गाय और सुअर के मास की चर्बी लगी थी जिससे हिन्दू और मुस्लिम धर्म के भारतीय सिपाहियों का धर्म खराब होता था जिस बात का पता चलने पर हिंदू और मुस्लिम सैनिकों में आक्रोश फैल गया और इसको अपने अपने धर्म के साथ खिलवाड़ समझा गया जिसका मंगल पांडे सहित अन्य हिन्दू और मुस्लिम सिपाहियों ने 29 मार्च 1857 ई को विरोध किया तथा अग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्राति का बिगुल फूँक दिया तथा मंगल पांडे जी ने "मारो फिरंगी को" का नारा भी दिया इसके बाद मंगल पांडे जी ने अग्रेज अधिकारी मेजर ह्रयूसन को गोली मार दी इसके बाद किसी तरह अग्रेजो ने मंगल पांडे जी को गिरफ्तार कर लिया तथा उनका कोर्ट मार्शल कर के फांसी की सजा सुनाई तथा निर्धारित समय से पहले ही आज यानि 8 अप्रैल को फांसी पर लटका दिया.इस घटना से हम भारतीयों को सबक लेना चाहिए कि हम सभी को धर्म के आधार पर किसी समुदाय से भेदभाव नही करना चाहिए तथा सभी धर्मों को एकजुट कर के साथ-साथ रहना चाहिए.आप का देश को आजादी दिलाने के लिए किया गया संघर्ष शानदार था जिससे हम भारतीयों को आज सबक लेना चाहिए.भारत माता की जय शत् शत् नमन जय हिंद🇮🇳🇮🇳🇮🇳🫡✊🙏
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