ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ऐसी मूर्खता न करें, जिससे भगवान से भरोसा उठ जाए भगवान की कृपा सबके लिए समान रूप से बरसती है। हमें दो कारणों  से लाभ नहीं मिल पाता- भरोसे की कमी और की अधिकता| मूर्खता ईश्वर भरोसे का दूसरा नाम है, लेकिन हमारी मूर्खता हमें भरोसे  ओपद्नै से कर देती है। गरुड़ जी को काकभुशुंडि जी ने कहा- राम कृपा  जड़ताई, कहउं खगेस सुनहु मन लाई। गरुड़ जी, राम जी की कृपा और  अपनी मूर्खता की बात कहता हूं मन लगाकर सुनिए। परमात्मा संबंधी * जो भी क्रिया हो, उसमें मन लगना चाहिए। एकाग्रचित्त होना चाहिए। अगर हम परमात्मा के प्रति भरोसा रखें तो परमात्मा ने अपनी कृपा करने के लिए एक से एक तरीके निकाले हैं। हम पानी किसी बर्तन में पीते हैं। ईश्वर ने इतने महत्वपूर्ण पात्र को कलश बना दिया जिसकी हम  ஈன करते हैं और कलश में हम परमात्मा का वास मानते हैं। यह परमात्मा " कृपा का अक्षय पात्र बन जाता है। इसीलिए आज शोभा यात्राओं में लोग * सिर पर कलश लेकर निकलते हैं। इसलिए कोई भी ऐसी मूर्खता न करें  जिससे हमारा भरोसा भगवान से उठ जाए। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta  ऐसी मूर्खता न करें, जिससे भगवान से भरोसा उठ जाए भगवान की कृपा सबके लिए समान रूप से बरसती है। हमें दो कारणों  से लाभ नहीं मिल पाता- भरोसे की कमी और की अधिकता| मूर्खता ईश्वर भरोसे का दूसरा नाम है, लेकिन हमारी मूर्खता हमें भरोसे  ओपद्नै से कर देती है। गरुड़ जी को काकभुशुंडि जी ने कहा- राम कृपा  जड़ताई, कहउं खगेस सुनहु मन लाई। गरुड़ जी, राम जी की कृपा और  अपनी मूर्खता की बात कहता हूं मन लगाकर सुनिए। परमात्मा संबंधी * जो भी क्रिया हो, उसमें मन लगना चाहिए। एकाग्रचित्त होना चाहिए। अगर हम परमात्मा के प्रति भरोसा रखें तो परमात्मा ने अपनी कृपा करने के लिए एक से एक तरीके निकाले हैं। हम पानी किसी बर्तन में पीते हैं। ईश्वर ने इतने महत्वपूर्ण पात्र को कलश बना दिया जिसकी हम  ஈன करते हैं और कलश में हम परमात्मा का वास मानते हैं। यह परमात्मा " कृपा का अक्षय पात्र बन जाता है। इसीलिए आज शोभा यात्राओं में लोग * सिर पर कलश लेकर निकलते हैं। इसलिए कोई भी ऐसी मूर्खता न करें  जिससे हमारा भरोसा भगवान से उठ जाए। Facebook:Pt Vijayshankar Mehta - ShareChat