शिवप्रसाद
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#कबीर_परमेश्वर_प्रकट_दिवस
♦️ कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वें अध्याय ‘‘गरूड़ बोध‘‘ पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई।
परमेश्वर कबीर जी ने गरुड़ जी को भी सत्य ज्ञान का उपदेश देकर शरण में लिया था।
♦️ त्रेता युग में हनुमान जी को मिले कबीर परमात्मा
श्री रामचंद्र द्वारा रावण वध के बाद माता सीता की अयोध्या वापसी पर जब एक घटनाक्रम के दौरान माता सीता जी ने हनुमान जी का अपमान किया तो हनुमान जी वापिस जंगल में चले गए। तब दुखी हनुमान जी को मुनिंदर रूप में आए परमात्मा कबीर जी ने मोक्ष की राह दिखाई और असली राम की जानकारी दी।
♦️ संत गरीबदास जी महाराज को सन् 1727 में 10 वर्ष की आयु में गांव छुड़ानी के नला नामक स्थान पर कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के वेश में मिले। तत्वज्ञान से परिचित कराकर सतलोक दर्शन करवाकर साक्षी बनाया।
अजब नगर में ले गए, हमको सतगुरु आन।
झिलके बिम्ब अगाध गति, सूते चादर तान।।
अनंत कोटि ब्रह्माण्ड का एक रति नहीं भार।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सिरजन हार।।
♦️ कबीर परमेश्वर हजरत मुहम्मद जी को मिले थे।
कबीर साहेब हजरत मुहम्मद जी को सतलोक लेकर गए, सर्व लोकों की स्थिति से परिचय करवाया। किन्तु हज़रत मुहम्मद जी ने मान-बड़ाई के कारण कबीर साहेब का ज्ञान स्वीकार नहीं किया था।
कबीर साहेब ने कहा है-
हम मुहम्मद को सतलोक ले गया, इच्छा रूप वहाँ नहीं रहयो।।
उलट मुहम्मद महल पठाया, गुज बीरज एक कलमा लाया ।।
♦️ संत गरीबदास जी (गाँव- छुड़ानी, जिला- झज्जर, हरियाणा) को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया। इस पर संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
दास गरीब सकल सृष्टि का, यो ही सिरजन हार।।
गरीब, मात पिता जाके नहीं, नहीं जन्म प्रमाण।
यौह पूर्ण ब्रह्म कबीर है, करता हंस अमान।।
♦️ कबीर परमात्मा, संत दादू दयाल जी से सन् 1551 में आमेर (राजस्थान) में मिले थे। इस पर दादू जी ने कहा है:
जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।। - कबीरपंथी शब्दावली, पृष्ठ 233
♦️ भाई बाले वाली जन्म साखी के पृष्ठ 198 पर, काज़ी रुक्नुद्दीन के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री नानक देव जी ने कबीर साहेब की महिमा में कहा है:
खालक आदम सिरजिआ आलम बड़ा कबीर।
काइम दाइम कुदरती सिर पीरां दे पीर।
सयदे (सजदे) करे खुदाई नूं आलम बड़ा कबीर।
♦️ सामान्यतः स्वामी रामानंद जी को कबीर जी का गुरु माना जाता है, परंतु मर्यादा बनाए रखने के लिए कबीर जी ने गुरु-शिष्य की लीला की थी। आध्यात्मिक दृष्टिकोण के अनुसार, स्वामी रामानंद जी ने स्वयं कबीर साहेब की समर्थता को स्वीकार किया था। रामानंद जी ने कबीर जी के विषय में कहा है:
बोलत रामानंद जी, सुन कबीर करतार।
गरीबदास सब रूप में, तुम हीं बोलन हार।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 260
♦️ तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय।
जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
गरीब, हिंद जिंद सब ही दी, सेतबंध लग सीर।
गढ़गजनी ताबे करी, जिंदा इसम कबीर।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 294
♦️ त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र नाम से प्रकट हुए तथा नल व नील को शरण में लिया।
उनकी कृपा से ही समुद्र पर पत्थर तैरे। धर्मदास जी की वाणी में इसका प्रमाण है:-
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार।
जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर शिला तिराने वाले।
धन-धन सतगुरु सत कबीर, भक्त की पीड़ मिटाने वाले।
♦️ कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वां अध्याय ‘‘गरूड़ बोध‘‘ पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया, उनको सृष्टि रचना सुनाई।
परमेश्वर कबीर जी ने गरुड़ जी को भी सत्य ज्ञान का उपदेश देकर शरण में लिया था।
♦️ धर्मदास जी को कबीर परमात्मा पहली बार मथुरा में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे। इसके बाद वे अनेक बार विभिन्न रूपों में मिले, उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया और पुनः संसार में भेजा। इस पर धर्मदास जी ने कहा है:
आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।।
सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर।।
♦️ कबीर परमेश्वर, सतगुरु के रूप में विश्नोई पंथ के संस्थापक संत जम्भेश्वर जी को समराथल (राजस्थान) में मिले थे। जम्भसागर (शब्द 90) में उल्लेख है:
जां जां पवन आसण, पाणी आसण, चंद आसण।
सूर (सूर्य) आसण गुरू आसण संमरा थले।
♦️ यहूदी धर्म के प्रवर्तक माने जाने वाले हज़रत मूसा जी को उनके अल्लाह ने, उनसे अधिक ज्ञानी 'अल-खिज़्र' के पास जाकर इल्म (ज्ञान) प्राप्त करने का निर्देश दिया था। इसका उल्लेख पवित्र कुरआन शरीफ़ के सूरा काफ 18 आयत 60 से 82 में है और वह अल-खिज़्र जो हजरत मूसा को मजमा-ए-बाहरेन में मिला था वह कोई और नहीं, बल्कि स्वयं कबीर जी थे।
♦️ कबीर परमात्मा, इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद जी से भी मिले थे। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूँ मुर्शिद मिले कबीरा।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 569
♦️ मंसूर अली और उनकी बहन शिमली से भी कबीर परमात्मा ने शम्स तबरेज़ के रूप में भेंट की थी, जिसका वर्णन 'कबीर मंशूर' नामक पुस्तक में मिलता है। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, बहुर शमशतबरेज रूप में, समझाये मनसूर।
शिमली पर साका हुआ, पौंहचे तख्त हजूर।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 233
♦️ संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई।
पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया, गऊ तत्काल बेगहि कबीर जिवाई।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 554
♦️ कबीर परमात्मा, हजरत अली को मिले, उन्हें कलमा प्रदान किया था। इस बारे में सूक्ष्मवेद में कहा गया है:
गरीब, अली अलह का शेर है, सीना स्वाफ शरीर।
कृष्ण अली एकै कली, न्यारी कला कबीर।।
गरीब, अली अलीलौं हो गये, मुहम्मद पदम पचास।
कबीर एक का एक है, करो तास की आश।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 248
♦️ संत मलूक दास जी को भी कबीर परमात्मा के दर्शन हुए थे। उन्होंने अपने पद में कबीर साहेब की महिमा का गान किया है:
जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।।
जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर।
चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।। - कबीर सागर, अध्याय - अगम निगम बोध, पृष्ठ 45
♦️गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था। इसके बाद गुरु नानक जी ने कबीर प्रभु के विषय में कहा:
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार।
हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।। - गुरुग्रंथ साहिब, पृष्ठ 721
♦️ संत रविदास जी और कबीर जी समकालीन थे। कबीर परमात्मा की समर्थता से परिचित होकर उन्होंने कबीर जी को अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार किया था। पुस्तक रैदास बानी के पेज 290 पर लिखा है:
सो तुम गावौ सो हूं गांऊं, तेरा ग्यान विचारुं।
कहै रैदास कबीर गुर मेरा, भरम करम धोइ डारुं।। #🔯शनि दोष😲 #✝ ईसा मसीह #☝अनमोल ज्ञान #🙏ईश्वर एक है🙏 #☪️जुम्मा मुबारक🌙
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