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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - किसी के लिए छोड़ दे सारी दुनिया लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के प्यार से भी जरूरी कईं काम हैं लिए प्यार सबकुछ नहीं जिन्दगी के तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं खुशबू आती रहे दूर ही से सही सामने हो चमन कोई कम तो नहीं चाँद मिलता नहीं सबको संसार में लिए है दीया ही बहुत रोशनी के कितनी हसरत से तकती हैं कलियाँ 5 को फिर से बुलाते नहीं क्यों बहारों उजड़ ही गई है तो क्या दुनिया एक दूसरा तुम जहां क्यों बसाते नहीं दिल न चाहे भी तो साथ संसार के के लिए चलना पडता है सब की खुशी किसी के लिए छोड़ दे सारी दुनिया लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के प्यार से भी जरूरी कईं काम हैं लिए प्यार सबकुछ नहीं जिन्दगी के तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं खुशबू आती रहे दूर ही से सही सामने हो चमन कोई कम तो नहीं चाँद मिलता नहीं सबको संसार में लिए है दीया ही बहुत रोशनी के कितनी हसरत से तकती हैं कलियाँ 5 को फिर से बुलाते नहीं क्यों बहारों उजड़ ही गई है तो क्या दुनिया एक दूसरा तुम जहां क्यों बसाते नहीं दिल न चाहे भी तो साथ संसार के के लिए चलना पडता है सब की खुशी - ShareChat