*मरते समय भी न माँगना वर कि जिन्दा हो जाऊँ।*
___________________
हमारे संसार में जितनी भी भक्ति होती है उसमें नाइन्टी नाइन पॉइन्ट नाइन परसेन्ट सकाम होती है। बड़ी भीड़ मन्दिरों में है। कहाँ? वो जिस मन्दिर के भगवान् बड़े चमत्कारी हैं। वो वैष्णो देवी जो हैं पहाड़ वाली, वो जो अमुक हनुमान जी हैं, अमुक दुर्गाजी हैं। अहा! अरे एक दिन वो अखबार वालों ने निकाला कि अमुक मन्दिर में इतने अरब का सोना है जमा, आज एक कुण्टल सोना चढ़ा साईं बाबा को। ये क्या है? अरे मनौती की होगी कि हमारी लॉटरी खुल जाय, खुल गई तो उन्होंने कहा कि लो कुछ परसेन्ट भगवान् तुम भी ले लो। सकाम भक्ति। जरा सी मुसीबत आई, हे भगवान् ! हमारी सुन लो बेटा बहुत बीमार है। अरे तुमको तो निष्काम पाठ पढ़ाया है तुम्हारे गुरु जी ने कि मरते समय भी न माँगना वर कि जिन्दा हो जाऊँ। हाँ जी ? वो भूल गया। क्यों? संसार में अटैचमेन्ट है। ये मेरा बेटा है, ये मेरा बाप है, ये मेरा भाई है। ये अटैचमेन्ट के कारण फिलॉसफी ही भूल गये।
तो 'हरि गुरु भजो' एक, नित दो और भाव निष्काम ये तीन और चौथा है अनन्य। हम लोगों में ये भी बीमारी है कि देवी देवता की भी भक्ति करते हैं और कोई मनुष्य कहीं दिखाई पड़ जाय, सुनाई पड़ जाय कि वो तंत्र मंत्र यंत्र करके ऐसा कर देता है। वहाँ भी भाग जायेंगे। अरे और तो और कोई मरा हुआ मुरदा गढ़ा है पाँच सौ वर्ष पहले तो वहाँ भी चले जायेंगे, दरगाह में भी, बड़ी भीड़ होती है।
*लाह्यो आँख किन आँधरों जग बहराइच जाय।*
तुलसीदास जी ने कहा -बहराइच में एक दरगाह है किसी फकीर का, वहाँ हिन्दू मुसलमान सब लाखों का मेला होता है। तुलसीदास जी कहते हैं कि जरा उस आदमी को हमारे सामने लाओ जिसको आँख मिल गई हो। सब गप्पों की बातें। अरे जो मर गया है वो तो चला गया। अगर संत था तो गोलोक गया होगा, खुदा के यहाँ बैठा होगा। उसके नीचे क्या है, वो तो हड्डी पसली भी गल गई होगी ? अरे नहीं बड़ा चमत्कार होता है। बड़े-बड़े प्राइम मिनिस्टर, प्रेसीडेन्ट चले जा रहे हैं।
तो ये सब अनेक देवी देवताओं की भक्ति भी करते हैं और सुप्रीम पॉवर की भी। इसका मतलब तो ये है कि आप अभी ये ही नहीं समझे कि सुप्रीम पॉवर माने परिपूर्ण या अपूर्ण ? अगर वो परिपूर्ण पॉवर है तो फिर और कहाँ जा रहे हो, उनके अंश के पास ? तत्त्वज्ञान नहीं है। सुनते हैं बहुत। हाँ शास्त्रों वेदों की बातें भी सुनाने वाले हर युग में हुए हैं, सुना है समझा है, फिर भूल गये।
तो ये चार बातें सदा ध्यान में रखकर के अभ्यास करना चाहिये। बिना अभ्यास के न गुरु कुछ दे देगा, न भगवान् । अरे भगवान् तो अन्दर ही बैठा है क्या दे रहा है ? अगर किसी को वास्तविक गुरु मिल भी जाय और चौबीस घंटे साथ रहे तो भी कुछ आशा मत करो। लोग कहते हैं कि भई अपने मरने पर ही स्वर्ग दिखाई पड़ेगा। ये साधना तो स्वयं को करनी होगी। इसमें कोई और बहाना काम नहीं देगा। इसलिये हरि गुरु भजु नम्बर एक, नित नम्बर दो, भाव निष्काम नम्बर तीन और अनन्यता, ये नम्बर चार। इन चारों का हमने एक दोहे में समावेश कर दिया कि अगर सब शास्त्र वेद भूल जाय तो इस दोहे का स्मरण कर के अपना कल्याण कर सकते हो।
*हरि गुरु भजु नित गोविन्द राधे।*
*भाव निष्काम अनन्य बना दे ॥*
*प्रवचनांश- जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज*
#☝अनमोल ज्ञान #🕉️सनातन धर्म🚩


