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Yashpal Sharma - Author on ShareChat
Yashpal Sharma
1K views • 3 months ago
#गीता ज्ञान
जब चारों ओर अंधेरा हो घेरा हो, ने gV दुखों जब तुम कृष्ण का दीप जला लेना सब हाल कृष्ण को सुना देना.. शरीम्दगचद्नीता , जब चारों ओर अंधेरा हो घेरा हो, ने gV दुखों जब तुम कृष्ण का दीप जला लेना सब हाल कृष्ण को सुना देना.. शरीम्दगचद्नीता ,
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  • Pramila Shukla - Author on ShareChat
    Pramila Shukla
    #गीता ज्ञान
    गीता ज्ञान
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  • ≛⃝ ⋆ - Author on ShareChat
    𝄟≛⃝🕊🇦𝖒𝖎𝖙 🇷𝖆𝖏𝖕𝖚𝖙🖤⃝⋆
    #🙏गीता ज्ञान🛕 #गीता ज्ञान #गीता ज्ञान और आध्यात्म 🕉️🌹🌹🦚🌹🌹
    गीता में लिखा है Il 11 यदि कोई तुम्हारा सम्मान न करे, तो दुःखी मत होना। सूर्य कभी यह नहीं सोचता कि कौन उसकी रोशनी की कद्र करता है। वह अपना कर्म करता है और संसार को प्रकाश देता है। तुम भी अपने कर्म में लगे रहो, कीमत क्योंकि 5R की राय से नहीं, दूसरों ; चरित्र से तय होती है। নদ্কাই गीता में लिखा है Il 11 यदि कोई तुम्हारा सम्मान न करे, तो दुःखी मत होना। सूर्य कभी यह नहीं सोचता कि कौन उसकी रोशनी की कद्र करता है। वह अपना कर्म करता है और संसार को प्रकाश देता है। तुम भी अपने कर्म में लगे रहो, कीमत क्योंकि 5R की राय से नहीं, दूसरों ; चरित्र से तय होती है। নদ্কাই
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  • RADHE RADHE - Author on ShareChat
    RADHE RADHE ❤️
    #गीता ज्ञान❣️ #कृष्ण ज्ञान 💗
    श्री कृष्ण कहते हैं फर्क उसे पड़ता है जिसके पास कोई एक होता है जिसके पास हजारों हो उसे एक के चले जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता.. ! ! श्री कृष्ण कहते हैं फर्क उसे पड़ता है जिसके पास कोई एक होता है जिसके पास हजारों हो उसे एक के चले जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता.. ! !
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  • Yashpal Sharma - Author on ShareChat
    Yashpal Sharma
    #गीता ज्ञान
    সমযয ম த$ எசி 331 ऐसा 8 ङो   मनुष्य கி का पेट भर 235) अरओं पुरुष  की 311911 সম্ুব ক সমাল 8, 8 ಫ೫ भरती oJ8}) 98 সমযয ম த$ எசி 331 ऐसा 8 ङो   मनुष्य கி का पेट भर 235) अरओं पुरुष  की 311911 সম্ুব ক সমাল 8, 8 ಫ೫ भरती oJ8}) 98
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  • Baljinder Kumar Chopra - Author on ShareChat
    Baljinder Kumar Chopra
    #गीता ज्ञान
    वुद्धि का महत्व ऊँ ३ँ गीता ज्ञान - स्थेथेर शुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति तिशचला | ভু্তিলেম্বা যরীদপমাদযসি II (2.53) समाथावववता जव हमारी बुद्धि अतग -अतग वातो थौर विवारों को सुनकर विवतित होना वंद कर देती है, और एक सन्च पर श्थिर हो जाती है, तथी हम सच्च्चो शाति और योग को प्राग्त करते है । ञीवत मैँ चहत सी आवरजॅ , सत और विचार हर्मै श्रयित करते हॅँ, पटन्तु जो शाकि अपनी वुद्धि को श्थिर रख्ता है, वही सहो मार्ग पर वतता है। संदेश : मन को श्रटकनेन हें , उसे सथिर और एकाग्र वनाऐं यही सच्चा ज्ञान है| #गीता_ ज्ञान #प्रेरणा #आध्थाम्पिकता #सुविचार वुद्धि का महत्व ऊँ ३ँ गीता ज्ञान - स्थेथेर शुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति तिशचला | ভু্তিলেম্বা যরীদপমাদযসি II (2.53) समाथावववता जव हमारी बुद्धि अतग -अतग वातो थौर विवारों को सुनकर विवतित होना वंद कर देती है, और एक सन्च पर श्थिर हो जाती है, तथी हम सच्च्चो शाति और योग को प्राग्त करते है । ञीवत मैँ चहत सी आवरजॅ , सत और विचार हर्मै श्रयित करते हॅँ, पटन्तु जो शाकि अपनी वुद्धि को श्थिर रख्ता है, वही सहो मार्ग पर वतता है। संदेश : मन को श्रटकनेन हें , उसे सथिर और एकाग्र वनाऐं यही सच्चा ज्ञान है| #गीता_ ज्ञान #प्रेरणा #आध्थाम्पिकता #सुविचार
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  • VINOD KUMAR - Author on ShareChat
    VINOD KUMAR
    #गीता ज्ञान #गीता का ज्ञान #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान
    गीता में धर्म का ज्ञान मोह रोग के द्वारा बताया गया है। एक श्लोक हैः "मोह एव ग्रहस्तस्य कारणं बन्धविमोक्षयोः Il (गीता ३.२७) अर्थः मोह ही बंधन और मुक्ति का कारण है। जब हम मोह से ग्रसित होते हैं, तो हम धर्म को भूल जाते हैं और अधर्म की ओर बढ़ते हैं। गीता में धर्म का ज्ञान मोह रोग के द्वारा बताया गया है। एक श्लोक हैः "मोह एव ग्रहस्तस्य कारणं बन्धविमोक्षयोः Il (गीता ३.२७) अर्थः मोह ही बंधन और मुक्ति का कारण है। जब हम मोह से ग्रसित होते हैं, तो हम धर्म को भूल जाते हैं और अधर्म की ओर बढ़ते हैं।
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  • VINOD KUMAR - Author on ShareChat
    VINOD KUMAR
    #गीता ज्ञान #गीता का ज्ञान #🙏गीता ज्ञान🛕 #श्री कृष्ण के गीता ज्ञान #🌺 कृष्ण ज्ञान 🙏 गीता वचन 🌺 भक्ति 💕 राधा कृष्ण 🙏🙏 हरि बोल 🙏🙏
    गीता में आत्मा के बारे में एक प्रसिद्ध श्लोक हैः 'न जायते म्रियते वा कापि নায মুো মবিনা বা ন মুয:| अजो नित्यः शाश्वतोडयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।" (गीता २.२०) अर्थः आत्मा न तो जन्म लेता है और न ही मरता है। यह न तो कभी उत्पन्न हुआ है, न ही कभी होगा। यह अजन्मा , नित्य, शाश्वत और पुराना है। शरीर के मरने पर भी यह नहीं मरता। गीता में आत्मा के बारे में एक प्रसिद्ध श्लोक हैः 'न जायते म्रियते वा कापि নায মুো মবিনা বা ন মুয:| अजो नित्यः शाश्वतोडयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।।" (गीता २.२०) अर्थः आत्मा न तो जन्म लेता है और न ही मरता है। यह न तो कभी उत्पन्न हुआ है, न ही कभी होगा। यह अजन्मा , नित्य, शाश्वत और पुराना है। शरीर के मरने पर भी यह नहीं मरता।
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