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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - किआकहीऐ किछु कही नजाइा अहै सभतेरी रजाइग [3 U परमात्मा ! इस जगत में (जीवों के लिए चाहे सुख हो या' मीठा जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब केवल और केवल तेरी ही तेरे हुक्म  और हुक्म से हो रहा के बाहर कुछ भी रज़ा इच्छा नहीं है। इस संसार चक्र के सामने मैं अपनी अल्प बुद्धि से क्या लगे कहूँ? मेरे पास कहने के' शब्द ही नहीं हैं और न ही जीव लिए कुछ के वश में कुछ कहना या करना है। यदि जीवों को कोई कष्ट या तेरा दुख मिल रहा है, तो भी उसके विरुद्ध रोस या शिकायत के रूप में हॅम जीव क्या कह सकते हैं? हमें तेरी गूढ़ रज़ा की पूरी समझ नहीं है, इसलिए हमसे कोई गिला या शिकवा किया नहीं जा सकता और न ही कोई गिला फबता है, क्योंकि आप घट घट की जानने भाणा वाले हैं और मेरे बिना कहे भी सब कुछ जानते हैं। साहिब समझाते हैं कि जब इंसान का अहंकार मिट जाता है, तो वह प्रभु के आगे मौन हो जाता है। वह हर परिस्थिति में शिकायतें करना बंद कर देता है, क्योंकि उसे समझ आ जाता है कि परमात्मा जो कर रहा है, वही सही है। हुक्म और रज़ा को इस रूप में मानना ही गुरबाणी का मूल सिद्धांत है। जब इंसान सुख और दुख दोनों को परमात्मा की मर्जी मानकर समान भाव से स्वीकार कर लेता है॰ तो उसके जीवन से सारे क्लेश, शिकायतें और मानसिक तनाव हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।" किआकहीऐ किछु कही नजाइा अहै सभतेरी रजाइग [3 U परमात्मा ! इस जगत में (जीवों के लिए चाहे सुख हो या' मीठा जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सब केवल और केवल तेरी ही तेरे हुक्म  और हुक्म से हो रहा के बाहर कुछ भी रज़ा इच्छा नहीं है। इस संसार चक्र के सामने मैं अपनी अल्प बुद्धि से क्या लगे कहूँ? मेरे पास कहने के' शब्द ही नहीं हैं और न ही जीव लिए कुछ के वश में कुछ कहना या करना है। यदि जीवों को कोई कष्ट या तेरा दुख मिल रहा है, तो भी उसके विरुद्ध रोस या शिकायत के रूप में हॅम जीव क्या कह सकते हैं? हमें तेरी गूढ़ रज़ा की पूरी समझ नहीं है, इसलिए हमसे कोई गिला या शिकवा किया नहीं जा सकता और न ही कोई गिला फबता है, क्योंकि आप घट घट की जानने भाणा वाले हैं और मेरे बिना कहे भी सब कुछ जानते हैं। साहिब समझाते हैं कि जब इंसान का अहंकार मिट जाता है, तो वह प्रभु के आगे मौन हो जाता है। वह हर परिस्थिति में शिकायतें करना बंद कर देता है, क्योंकि उसे समझ आ जाता है कि परमात्मा जो कर रहा है, वही सही है। हुक्म और रज़ा को इस रूप में मानना ही गुरबाणी का मूल सिद्धांत है। जब इंसान सुख और दुख दोनों को परमात्मा की मर्जी मानकर समान भाव से स्वीकार कर लेता है॰ तो उसके जीवन से सारे क्लेश, शिकायतें और मानसिक तनाव हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।" - ShareChat