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#🖋ग़ालिब की शायरी
🖋ग़ालिब की शायरी - कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यों रात भर नहीं आती आगे आती थी हाल ए-दिल पे हंसी अब किसी बात पर नहीं आती मिर्ज़ा ग़ालिब कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यों रात भर नहीं आती आगे आती थी हाल ए-दिल पे हंसी अब किसी बात पर नहीं आती मिर्ज़ा ग़ालिब - ShareChat