#शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #👉 लोगों के लिए सीख👈
`नाहं भवद्भ्यां विगतोरुभूम्ना–`
`विश्वेश्वराज्ञापितुमर्ह्य ईशः ।`
`आत्मा हि वां वेद स मे ययोर्वां`
`शिक्षार्थमेवात्र भुवि द्विजन्म ॥`
[ `श्रीमद्भागवत १०.८०.३३ - सुदामा-प्रसंग` ]
`अर्थात 👉🏻 श्रीकृष्ण सुदामा से कहते हैं – मैं सर्वेश्वर होते हुए भी आप दोनों - गुरु सान्दीपनि के - आज्ञा-पालन में ही रहा । मैं आत्मा हूँ , सब जानता हूँ , तथापि लोक-शिक्षा हेतु मैंने गुरु-गृह में द्विजत्व ग्रहण किया ।`
`तत्त्व 👉🏻 जब स्वयं भगवान गुरु के बिना लीला नहीं करते , तो जीव की क्या गति❔ गुरु-सेवा ईश्वर का भी धर्म है ।`
`श्लोक का मर्म –`
`१. "विश्वेश्वराज्ञापितुमर्ह्य ईशः" –जो तीनों लोकों का स्वामी है , वह भी गुरु की आज्ञा माँगने योग्य है ।`
`२. "शिक्षार्थमेवात्र भुवि द्विजन्म" – भगवान को शिक्षा की आवश्यकता नहीं – किन्तु लोक को "गुरु-बिना ज्ञान नहीं" यह सिखाने स्वयं गुरुकुल गए ।`
`सार – जिस मर्यादा को भगवान स्वयं तोड़ते नहीं , उस मर्यादा को तोड़कर मोक्ष चाहना "अहंकार" है , "साधना" नहीं ।`
`चित्र का तत्त्व-दर्शन –`
`चित्र में वही "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः" साकार है –`
`१. वटवृक्ष – अक्षयवट - सनातन गुरु-परम्परा का प्रतीक । दक्षिणामूर्ति शिव वट-वृक्ष के नीचे मौन-उपदेश देते हैं ।`
`२. त्रिदेव एक वृक्ष में – ब्रह्मा - सृजन का ज्ञान , विष्णु - पालन का धर्म ,एवं शिव - संहार का वैराग्य – तीनों ही गुरु-रूप ।`
`३. पत्तों पर देवता – "गुरुमण्डल-रूपिणी" श्रीविद्या – समस्त देवता गुरु-शरीर में वास करते हैं ।`
`४. नीचे शिवलिंग-पूजन – गुरु अर्थात साक्षात् शिव – गुरु-पूजा ही शिव-पूजा है ।`
`५. पिता-पुत्र का प्रणाम – गुरु-परम्परा पीढ़ी से चलती है – "गुरोरनुग्रहेणैव पुमान् पूर्णः प्रजायते ।"`
`यह दिवस ,आप समस्त हेतु गुरु-बोध का दीपक बने –"गुरुबिन भवनिधि तरइ न कोई" - उपरोक्त श्लोक तथा चित्र दोनों उसी के साक्षी हैं ।`
`गुरुकृपा हि केवलं शिष्यस्य परं मंगलम्🚩`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®`


