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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #🙏 જય શ્રી કૃષ્ણ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - अर्जुन भगवान से प्रश्न पूछता है कि मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाने का कारण क्या है ? भगवान ने इसका उत्तर दिया कि विषयों का चिंतन करने वाला विषयों और विकारों में आसक्त हो जाता है॰ आसक्ति से होती है। कामना पूर्ति में व्यवधान होने कामना उत्तपन्न से क्रोध और क्रोध से अविवेक उत्तपन्न होता है। अविवेक से जब स्मृति भ्रमित हो जाती है तो योग परायण बुद्धि भी नष्ट हो जाती है। अतः निष्काम कर्मयोग को बुद्धियोग भी कहा जाता है। बुद्धि का योग ईश्वर से जोड़ने से समस्त कमजोरियों पर विजयी बन सकते हैं। योग साधना रहितव्यक्ति के अंतःकरण मेँ निष्काम कर्मयुक्त बुद्धि नहीं होती। अशांत व्यक्ति को सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती| Brahmakumaris अर्जुन भगवान से प्रश्न पूछता है कि मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाने का कारण क्या है ? भगवान ने इसका उत्तर दिया कि विषयों का चिंतन करने वाला विषयों और विकारों में आसक्त हो जाता है॰ आसक्ति से होती है। कामना पूर्ति में व्यवधान होने कामना उत्तपन्न से क्रोध और क्रोध से अविवेक उत्तपन्न होता है। अविवेक से जब स्मृति भ्रमित हो जाती है तो योग परायण बुद्धि भी नष्ट हो जाती है। अतः निष्काम कर्मयोग को बुद्धियोग भी कहा जाता है। बुद्धि का योग ईश्वर से जोड़ने से समस्त कमजोरियों पर विजयी बन सकते हैं। योग साधना रहितव्यक्ति के अंतःकरण मेँ निष्काम कर्मयुक्त बुद्धि नहीं होती। अशांत व्यक्ति को सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती| Brahmakumaris - ShareChat