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#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - २०२६ वैशाख पूर्णिमा उपवास हिन्दु धर्म में पूर्णिमा व्रत को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। भविष्यपुराण में वर्णित बत्तीसी पूर्णिमा व्रत के अनुसार मार्गशीर्ष, माघ तथा वैशाख माह की पूर्णिमा से आरम्भ करके भाद्रपद तथा पौष माह की पूर्णिमा को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिये। बत्तीसी पूर्णिमा व्रत को द्वात्रिंशी पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से समस्त प्रकार के सुख सौभाग्य एवं पुत्र पौत्रादि की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा तिथि को भगवान विष्णु के पूजन हेतु भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। के दिन चन्द्रदेव अपने सम्पूर्ण रूप में प्रकाशित होते हैं। इस अवसर पर पूर्णिमा चन्द्रोपासना का विशेष लाभ होता है। स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण भविष्यपुराण तथा महाभारत आदि धार्मिक ग्रन्थों में पूर्णिमा व्रत का उल्लेख प्राप्त होता है। इस कल्याणकारी पूर्णिमा व्रत को पापों के क्षय, पुण्य वृद्धि तथा मानसिक शुद्धि हेतु अत्यन्त फलदायी बताया गया है। २०२६ वैशाख पूर्णिमा उपवास हिन्दु धर्म में पूर्णिमा व्रत को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। भविष्यपुराण में वर्णित बत्तीसी पूर्णिमा व्रत के अनुसार मार्गशीर्ष, माघ तथा वैशाख माह की पूर्णिमा से आरम्भ करके भाद्रपद तथा पौष माह की पूर्णिमा को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिये। बत्तीसी पूर्णिमा व्रत को द्वात्रिंशी पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से समस्त प्रकार के सुख सौभाग्य एवं पुत्र पौत्रादि की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा तिथि को भगवान विष्णु के पूजन हेतु भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। के दिन चन्द्रदेव अपने सम्पूर्ण रूप में प्रकाशित होते हैं। इस अवसर पर पूर्णिमा चन्द्रोपासना का विशेष लाभ होता है। स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण भविष्यपुराण तथा महाभारत आदि धार्मिक ग्रन्थों में पूर्णिमा व्रत का उल्लेख प्राप्त होता है। इस कल्याणकारी पूर्णिमा व्रत को पापों के क्षय, पुण्य वृद्धि तथा मानसिक शुद्धि हेतु अत्यन्त फलदायी बताया गया है। - ShareChat