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#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
शुभ मुहूर्त - 19-04-26 तृतीया 3٢ रविवार हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तिथि पर अक्षय तृतीया  विष्णु  और लक्ष्मी जी तृतीया का पर्व पड़ता है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान का पूजन किया जाता है, अक्षय को सभी पापों का नाश करने वाली तृतीया " और सभी सुखों को प्रदान करने वाली तिथि भी कहा जाता है। हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व पड़ता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को सभी पापों का नाश करने वाली और सभी सुखों को प्रदान करने वाली तिथि भी कहा जाता है। इस दिन सभी शुभ कार्य बिना पंचांग को देखे किये जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो भी कार्य किये जाते हैं वह बहुत फलदायी होते हैं, इस दिन भूमि पूजन, गृह प्रवेश, धार्मिक कार्य से लेकर विवाह तक सभी कार्य किये जाते हैं। विष्णु ; और लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है, इस दिन अक्षय तृतीया के दिन भगवान a ` और लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा- अर्चना करने पर भक्त की सभी भगवान मनोकामनायें पूर्ण होती है। बजे से शुरू वैदिक पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि ११ अप्रैल २०२६ को सुबह 0७:११ होगी और २० अप्रैल २०२६ को सुबह ०३५७ बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के तृतीया ११ अप्रैल को ही मनाई जाएगी। आधार पर अक्षय लिए सुबह ( 07:19 ব্রতী যী নীপ৪২ 01:50 ব্রতী নব্ধ ব্ধা যসয १९ अप्रैल को पूजा के सबसे शुभ है। करीब 6 घंटे और ३१ मिनट की इस अवधि में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु  आराधना की जायेगी। 19-04-26 तृतीया 3٢ रविवार हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तिथि पर अक्षय तृतीया  विष्णु  और लक्ष्मी जी तृतीया का पर्व पड़ता है। अक्षय तृतीया के दिन भगवान का पूजन किया जाता है, अक्षय को सभी पापों का नाश करने वाली तृतीया " और सभी सुखों को प्रदान करने वाली तिथि भी कहा जाता है। हर साल वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व पड़ता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को सभी पापों का नाश करने वाली और सभी सुखों को प्रदान करने वाली तिथि भी कहा जाता है। इस दिन सभी शुभ कार्य बिना पंचांग को देखे किये जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो भी कार्य किये जाते हैं वह बहुत फलदायी होते हैं, इस दिन भूमि पूजन, गृह प्रवेश, धार्मिक कार्य से लेकर विवाह तक सभी कार्य किये जाते हैं। विष्णु ; और लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है, इस दिन अक्षय तृतीया के दिन भगवान a ` और लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा- अर्चना करने पर भक्त की सभी भगवान मनोकामनायें पूर्ण होती है। बजे से शुरू वैदिक पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि ११ अप्रैल २०२६ को सुबह 0७:११ होगी और २० अप्रैल २०२६ को सुबह ०३५७ बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के तृतीया ११ अप्रैल को ही मनाई जाएगी। आधार पर अक्षय लिए सुबह ( 07:19 ব্রতী যী নীপ৪২ 01:50 ব্রতী নব্ধ ব্ধা যসয १९ अप्रैल को पूजा के सबसे शुभ है। करीब 6 घंटे और ३१ मिनट की इस अवधि में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु  आराधना की जायेगी। - ShareChat