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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#माँ सरस्वती
माँ सरस्वती - ShareChat
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#पूजन विधि
पूजन विधि - हरि शरणं या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता , वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना যা शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, या ब्रह्माच्युत सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा जो ज्ञान की देवी सफेद कमल, चंद्रमा और हिम के हार के समान उज्ज्वल हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं॰ उनके एक हाथ में वीणा तो दूसरा हाथ वरद मुद्रा में रहता है और वे कमल के आसन पर विराजमान होती हैं॰ उस देवी विष्णु, शिव आदि देव सदैव ही करते की वंदना ब्रह्मा, अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाली वह देवी हैं. सरस्वती मेरी रक्षा करें मुझे ज्ञान से आलोकित करें, आप सभी को बसंत पंचमी की मंगलमय शुभकामनाएं हरि शरणं या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता , वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना যা शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता, या ब्रह्माच्युत सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा जो ज्ञान की देवी सफेद कमल, चंद्रमा और हिम के हार के समान उज्ज्वल हैं, जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं॰ उनके एक हाथ में वीणा तो दूसरा हाथ वरद मुद्रा में रहता है और वे कमल के आसन पर विराजमान होती हैं॰ उस देवी विष्णु, शिव आदि देव सदैव ही करते की वंदना ब्रह्मा, अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने वाली वह देवी हैं. सरस्वती मेरी रक्षा करें मुझे ज्ञान से आलोकित करें, आप सभी को बसंत पंचमी की मंगलमय शुभकामनाएं - ShareChat
माँ कात्यायनी #पूजन विधि
पूजन विधि - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी कात्यायनी रँग के पुष्प, विशेषतः गुलाब के पुष्प लाल 1> নীী ক্ষান্োমন্ী নম: Il प्रार्थना चन्द्रहासोज्ज्चलकरा शार्दूलवरवाहना | कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता नमः &IH चन्द्रार्धकृतशेखराम् वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम् ।। सिंहारूढा  स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम् वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम् । पटाम्बर परिधानां मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम् प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम् त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्। कमनीयां लावण्यां कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोडस्तुते II पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम् सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोडस्तुते परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोडस्तुते विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता विश्वाचिन्ता, विश्वातीता कात्यायनसुते नमोडस्तुते  कां बीजा, कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता कांकारहर्षिणीकां धनदाधनमासना कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी स्वाहारूपिणी कां कीं कूंकै कः ठः छः कवच कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी  कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी II देवी कात्यायनी रँग के पुष्प, विशेषतः गुलाब के पुष्प लाल 1> নীী ক্ষান্োমন্ী নম: Il प्रार्थना चन्द्रहासोज्ज्चलकरा शार्दूलवरवाहना | कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता नमः &IH चन्द्रार्धकृतशेखराम् वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम् ।। सिंहारूढा  स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम् वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम् । पटाम्बर परिधानां मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम् प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम् त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्। कमनीयां लावण्यां कञ्चनाभां वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां स्मेरमुखी शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोडस्तुते II पटाम्बर परिधानां नानालङ्कार भूषिताम् सिंहस्थिताम् पद्महस्तां कात्यायनसुते नमोडस्तुते परमानन्दमयी देवी परब्रह्म परमात्मा परमशक्ति, परमभक्ति, कात्यायनसुते नमोडस्तुते विश्वकर्ती, विश्वभर्ती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता विश्वाचिन्ता, विश्वातीता कात्यायनसुते नमोडस्तुते  कां बीजा, कां जपानन्दकां बीज जप तोषिते कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता कांकारहर्षिणीकां धनदाधनमासना कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा कां कारिणी कां मन्त्रपूजिताकां बीज धारिणी स्वाहारूपिणी कां कीं कूंकै कः ठः छः कवच कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी  कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी II - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी कात्यायनी आरती जय जय अम्बे जय कात्यायनी | जय जग माता जग की महारानी II बैजनाथ स्थान तुम्हारा वहावर दाती नाम पुकारा कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है Il  हर मन्दिर में ज्योत कही योगेश्वरी महिमा न्यारी तुम्हारी " हर जगह उत्सव होते रहते । हर मन्दिर में भगत है कहते | ग्रन्थि काटे मोह माया की कत्यानी रक्षक काया की झूठे मोह से छुडाने वाली | अपना नाम जपाने वाली  बृहस्पतिवार को पूजा करिये ध्यान कात्यानी का धरिये हर संकट को दूर करेगी भण्डारे भरपूर करेगी II जो भी माँ को भक्त कात्यायनी सब कष्ट निवारे पुकारे देवी कात्यायनी आरती जय जय अम्बे जय कात्यायनी | जय जग माता जग की महारानी II बैजनाथ स्थान तुम्हारा वहावर दाती नाम पुकारा कई नाम है कई धाम है। यह स्थान भी तो सुखधाम है Il  हर मन्दिर में ज्योत कही योगेश्वरी महिमा न्यारी तुम्हारी " हर जगह उत्सव होते रहते । हर मन्दिर में भगत है कहते | ग्रन्थि काटे मोह माया की कत्यानी रक्षक काया की झूठे मोह से छुडाने वाली | अपना नाम जपाने वाली  बृहस्पतिवार को पूजा करिये ध्यान कात्यानी का धरिये हर संकट को दूर करेगी भण्डारे भरपूर करेगी II जो भी माँ को भक्त कात्यायनी सब कष्ट निवारे पुकारे - ShareChat
#पूजन विधि #व्रत एवं त्योहार
पूजन विधि - नवरात्रि का दिन 6 २४th जनवरी २०२६ Saturday शनिवार षष्ठा कात्यायनी पूजा नवरात्रि का दिन 6 २४th जनवरी २०२६ Saturday शनिवार षष्ठा कात्यायनी पूजा - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 24-01-26 स्कन्द षष्ठी হানিবাব  स्कंद षष्ठी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, यह पर्व दक्षिण भारत में प्रमुख - रूप से मनाया जाता है। इसी तिथि  कार्तिकेय ने को कुमार ` तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था। षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है। कार्तिकेयाय विद्महे वल्लीनाथाय धीमहि तन्नो स्कंद प्रचोदयात भगवान कार्तिकेय को षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह का स्वामी कहा गया है। में मंगल अच्छी स्थिति में नहीं चल रहा हो, उन्हें स्कंद जिनकी जन्म कुंडली  की पूजा षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय और उनके निमित्त व्रत रखना चाहिए। महीने की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है, षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है 24-01-26 स्कन्द षष्ठी হানিবাব  स्कंद षष्ठी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, यह पर्व दक्षिण भारत में प्रमुख - रूप से मनाया जाता है। इसी तिथि  कार्तिकेय ने को कुमार ` तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था। षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है। कार्तिकेयाय विद्महे वल्लीनाथाय धीमहि तन्नो स्कंद प्रचोदयात भगवान कार्तिकेय को षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह का स्वामी कहा गया है। में मंगल अच्छी स्थिति में नहीं चल रहा हो, उन्हें स्कंद जिनकी जन्म कुंडली  की पूजा षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय और उनके निमित्त व्रत रखना चाहिए। महीने की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है, षष्ठी तिथि कार्तिकेय जी को प्रिय होने के कारण ही इसे कौमारिकी भी कहा जाता है - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - जनवरी २४, २०२६, शनिवार  48 माघ, शुक्ल षष्ठा प्रारम्भ - जनवरी २३ को २५:४६+ बजे शुक्ल षष्ठी समाप्त - जनवरी २४ को २४३९+ बजे जनवरी २४, २०२६, शनिवार  48 माघ, शुक्ल षष्ठा प्रारम्भ - जनवरी २३ को २५:४६+ बजे शुक्ल षष्ठी समाप्त - जनवरी २४ को २४३९+ बजे - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - २१, माघ Panchang शुक्ल पक्ष षष्ठी 24 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत जनवरी २०२६ शनिवार वाराणसी, भारत योग स्कन्द षष्ठी , पञ्चक, गण्ड मूल, रवि योग आडल विडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त् आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्तृ मकर - जनवरी २३ को ३० ११ + बजे से ०७:५५ रज पञ्चक - ०६:४४ से 0७:५५ I থুল্ মুচুন - 07:55 ঊ 09:26  ^ 5=- 07:55 #09:26 ) #7-09;26 710:55 चोर पञ्चक - ०९:२६ से १०:५५ 0 # रज पञ्चक - १०:५५ 10:55 712:33 12:33 ४ 12:33 714:16 {74-12:33#14:30  मुहूर्त - शुभ  चोर पञ्चक मिथुन -  14:16714:30 )( 16:44 14:30 39380-14:307716:44 9   ব্রন্ধ - 16:44 স 19:02 रोग पञ्चक 16.44 19:02 0 86 19:02 721:16 19:02 721:16 39 {గ్గిగే - T) ক্রন্সা - 21:16 ম 23:28 21:16 23:28 मृत्यु पञ्चक " বুলা - 23:28 স 25:45+  24:39+ 23.28 आग्ने पञ्चक वृश्चिक - २५:४५+ 28:02+ शुभ मुहूर्त - २४:३९+ 25:45+ 7 v- 28.02+ 30:07+ रज पञ्चक - २५:४५+ 28:02+ शुभ मुहूर्त - २8:०२+ 30.074 चोर पञ्चक 30:07+ 30:44+ २१, माघ Panchang शुक्ल पक्ष षष्ठी 24 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत जनवरी २०२६ शनिवार वाराणसी, भारत योग स्कन्द षष्ठी , पञ्चक, गण्ड मूल, रवि योग आडल विडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त् आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्तृ मकर - जनवरी २३ को ३० ११ + बजे से ०७:५५ रज पञ्चक - ०६:४४ से 0७:५५ I থুল্ মুচুন - 07:55 ঊ 09:26  ^ 5=- 07:55 #09:26 ) #7-09;26 710:55 चोर पञ्चक - ०९:२६ से १०:५५ 0 # रज पञ्चक - १०:५५ 10:55 712:33 12:33 ४ 12:33 714:16 {74-12:33#14:30  मुहूर्त - शुभ  चोर पञ्चक मिथुन -  14:16714:30 )( 16:44 14:30 39380-14:307716:44 9   ব্রন্ধ - 16:44 স 19:02 रोग पञ्चक 16.44 19:02 0 86 19:02 721:16 19:02 721:16 39 {గ్గిగే - T) ক্রন্সা - 21:16 ম 23:28 21:16 23:28 मृत्यु पञ्चक বুলা - 23:28 স 25:45+  24:39+ 23.28 आग्ने पञ्चक वृश्चिक - २५:४५+ 28:02+ शुभ मुहूर्त - २४:३९+ 25:45+ 7 v- 28.02+ 30:07+ रज पञ्चक - २५:४५+ 28:02+ शुभ मुहूर्त - २8:०२+ 30.074 चोर पञ्चक 30:07+ 30:44+ - ShareChat