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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
स्कंद माता #पूजन विधि
पूजन विधि - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी स्कन्दमाता लाल रँग के पुष्प मन्त्र देवी स्कन्दमात्रे नमः Il সাথনা सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ध्यानम् चन्द्रार्धकृतशेखराम् वन्दे वाञ्छित कामार्थे चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम् II सिंहरूढ़ा धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम् " अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम् II पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम् " किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम् II केयूर, मञ्जीर, हार, प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्। कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम II स्तोत्रम् नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्। समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम् शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम् ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम् महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम् " सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम् दोषवर्जिताम् अतर्क्यरोचिरूविजां विकार मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम् नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम् सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम् सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्। शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम् तमोडन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम् सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम् सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम् प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम् स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्। यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम् अनन्तशक्ति कान्तिदां पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्। जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम् II कवचम् ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा  कार्तिकेययुता  हृदयम् पातु सा देवी  श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता नैऋतेअवतु उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी  सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै Il  देवी स्कन्दमाता लाल रँग के पुष्प मन्त्र देवी स्कन्दमात्रे नमः Il সাথনা सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ध्यानम् चन्द्रार्धकृतशेखराम् वन्दे वाञ्छित कामार्थे चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम् II सिंहरूढ़ा धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पञ्चम दुर्गा त्रिनेत्राम् " अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम् II पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम् " किङ्किणि, रत्नकुण्डल धारिणीम् II केयूर, मञ्जीर, हार, प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् पीन पयोधराम्। कमनीयां लावण्यां चारू त्रिवली नितम्बनीम II स्तोत्रम् नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्। समग्रतत्वसागरम् पारपारगहराम् शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम् ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रदीप्ति भास्कराम् महेन्द्रकश्यपार्चितां सनत्कुमार संस्तुताम् " सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलाद्भुताम् दोषवर्जिताम् अतर्क्यरोचिरूविजां विकार मुमुक्षुभिर्विचिन्तितां विशेषतत्वमुचिताम् नानालङ्कार भूषिताम् मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम् सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेदमार भूषणाम् सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्र वैरिघातिनीम्। शुभां पुष्पमालिनीं सुवर्णकल्पशाखिनीम् तमोडन्धकारयामिनीं शिवस्वभावकामिनीम् सहस्रसूर्यराजिकां धनज्जयोग्रकारिकाम् सुशुध्द काल कन्दला सुभृडवृन्दमज्जुलाम् प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरम् सतीम् स्वकर्मकारणे गतिं हरिप्रयाच पार्वतीम्। यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम् अनन्तशक्ति कान्तिदां पुनः पुनर्जगद्धितां नमाम्यहम् सुरार्चिताम्। जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवी पाहिमाम् II कवचम् ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मधरापरा  कार्तिकेययुता  हृदयम् पातु सा देवी  श्री ह्रीं हुं ऐं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा सर्वाङ्ग में सदा पातु स्कन्दमाता पुत्रप्रदा वाणवाणामृते हुं फट् बीज समन्विता नैऋतेअवतु उत्तरस्या तथाग्ने च वारुणे इन्द्राणी भैरवी चैवासिताङ्गी च संहारिणी  सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै Il - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी स्कन्दमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता | पाँचवाँ नाम तुम्हारा आता II जग जननी सबकी महतारी | सबके मन की जानन हारी रहूँ मैं । हरदम तुझे ध्याता रहूँ मै ।l  तेरी जोत जलाता कई नामों से तुझे पुकारा | मुझे एक है तेरा सहारा  कही पहाड़ों पर है डेरा | कई शहरों में तेरा बसेरा ।I हर मन्दिर में तेरे नजारे तेरे भक्त प्यारे गुण गाये  अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो ।I মাণ आदि देवता मिल सारे । करे पुकार तुम्हारे द्वारे II इन्द्र दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आये। तू ही खण्ड हाथ उठाये " दासों को सदा बचाने आयी 31ಗೆ Il पुजाने  भक्त को आस देवी स्कन्दमाता आरती जय तेरी हो स्कन्द माता | पाँचवाँ नाम तुम्हारा आता II जग जननी सबकी महतारी | सबके मन की जानन हारी रहूँ मैं । हरदम तुझे ध्याता रहूँ मै ।l  तेरी जोत जलाता कई नामों से तुझे पुकारा | मुझे एक है तेरा सहारा  कही पहाड़ों पर है डेरा | कई शहरों में तेरा बसेरा ।I हर मन्दिर में तेरे नजारे तेरे भक्त प्यारे गुण गाये  अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो ।I মাণ आदि देवता मिल सारे । करे पुकार तुम्हारे द्वारे II इन्द्र दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आये। तू ही खण्ड हाथ उठाये " दासों को सदा बचाने आयी 31ಗೆ Il पुजाने  भक्त को आस - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - नवरात्रि का दिन 5 23rd जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार पञ्चमा 5 स्कन्दमाता पूजा नवरात्रि का दिन 5 23rd जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार पञ्चमा 5 स्कन्दमाता पूजा - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - सरस्वती वन्दना सरस्वती या कुन्देन्दु देवी सरस्वती को समर्पित बहुत प्रसिद्ध स्तुति है जो सरस्वती स्तोत्रम का एक अंश है। इस सरस्वती स्तुति का पाठ वसन्त पञ्चमी के पावन दिन पर सरस्वती पूजा के दौरान किया जाता है। या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।। যা  शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। या ब्रह्माच्युत सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा II१ II  ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं | शुक्लां वीणा पुस्तक धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्। वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।२ || सरस्वती वन्दना सरस्वती या कुन्देन्दु देवी सरस्वती को समर्पित बहुत प्रसिद्ध स्तुति है जो सरस्वती स्तोत्रम का एक अंश है। इस सरस्वती स्तुति का पाठ वसन्त पञ्चमी के पावन दिन पर सरस्वती पूजा के दौरान किया जाता है। या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।। যা  शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। या ब्रह्माच्युत सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा II१ II  ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं | शुक्लां वीणा पुस्तक धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्। वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।२ || - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - वसन्त पञ्चमी पर सरस्वती पूजन २०२६ वसन्त पञ्चमी का दिन माँ सरस्वती को समर्पित है और इस दिन माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। माता सरस्वती को ज्ञान, सँगीत, कला, विज्ञान और शिल्प- की देवी माना जाता है। इस दिन को श्री पञ्चमी और सरस्वती पूजा के नाम कला भी जाना जाता है। और सुस्ती, आलस्य एवं अज्ञानता छुटकारा पाने के लिये, পমন লীঘ, হান সাদি आज के दिन देवी सरस्वती की उपासना करते हैं। कुछ प्रदेशों में आज के दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। दूसरे शब्दों में वसन्त पञ्चमी दिन विद्या आरम्भ या अक्षर अभ्यास्यम के लिये काफी शुभ माना जाता है CT इसीलिये माता पिता आज के दिन शिशु 7 को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्या आरम्भ कराते हैं। सभी विद्यालयों में आज के दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है। हिन्दु कैलेण्डर में पञ्चमी तिथि को मनाया जाता है। जिस वसन्त पञ्चमी का दिन दिन पञ्चमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से कुछ वर्षो में वसन्त दिन पड़ जाती है। हिन्दु कैलेण्डर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य पञ्चमी Teff & पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। के समय को ज्योतिष विद्या में पारन्गत व्यक्तियों के अनुसार वसन्त पञ्चमी का दिन सभी शुभ कार्यो के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से वसन्त पञ्चमी का दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये उत्तम माना जाता గౌ वसन्त पञ्चमी के दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है परन्तु पूर्वाह्न का समय पूजा के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। सभी विद्यालयों और शिक्षा केन्द्रों में पूर्वाह्न के समय सरस्वती पूजा कर माता सरस्वती का आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। वसन्त पञ्चमी पर सरस्वती पूजन २०२६ वसन्त पञ्चमी का दिन माँ सरस्वती को समर्पित है और इस दिन माँ सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। माता सरस्वती को ज्ञान, सँगीत, कला, विज्ञान और शिल्प- की देवी माना जाता है। इस दिन को श्री पञ्चमी और सरस्वती पूजा के नाम कला भी जाना जाता है। और सुस्ती, आलस्य एवं अज्ञानता छुटकारा पाने के लिये, পমন লীঘ, হান সাদি आज के दिन देवी सरस्वती की उपासना करते हैं। कुछ प्रदेशों में आज के दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। दूसरे शब्दों में वसन्त पञ्चमी दिन विद्या आरम्भ या अक्षर अभ्यास्यम के लिये काफी शुभ माना जाता है CT इसीलिये माता पिता आज के दिन शिशु 7 को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्या आरम्भ कराते हैं। सभी विद्यालयों में आज के दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है। हिन्दु कैलेण्डर में पञ्चमी तिथि को मनाया जाता है। जिस वसन्त पञ्चमी का दिन दिन पञ्चमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से कुछ वर्षो में वसन्त दिन पड़ जाती है। हिन्दु कैलेण्डर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य पञ्चमी Teff & पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। के समय को ज्योतिष विद्या में पारन्गत व्यक्तियों के अनुसार वसन्त पञ्चमी का दिन सभी शुभ कार्यो के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से वसन्त पञ्चमी का दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये उत्तम माना जाता గౌ वसन्त पञ्चमी के दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है परन्तु पूर्वाह्न का समय पूजा के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। सभी विद्यालयों और शिक्षा केन्द्रों में पूर्वाह्न के समय सरस्वती पूजा कर माता सरस्वती का आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है। - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - वसन्त पञ्चमी २३वाँ जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार वसन्त पञ्चमी के दिन सरस्वती पूजन वसन्त पञ्चमी सरस्वती पूजा मुहूर्त वसन्त पञ्चमी शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को वसन्त पञ्चमी सरस्वती पूजा मुहूर्त : 06:44 7 12:10 अवधि - ०५ घण्टे २६ मिनट्स वसन्त पञ्चमी मध्याह्न का क्षण 12.10 पञ्चमी तिथि प्रारम्भ जनवरी २२, २०२६ को २६:२८+ बजे जनवरी २३, २०२६ पञ्चमी तिथि समाप्त 25:46+ লতা वसन्त पञ्चमी २३वाँ जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार वसन्त पञ्चमी के दिन सरस्वती पूजन वसन्त पञ्चमी सरस्वती पूजा मुहूर्त वसन्त पञ्चमी शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को वसन्त पञ्चमी सरस्वती पूजा मुहूर्त : 06:44 7 12:10 अवधि - ०५ घण्टे २६ मिनट्स वसन्त पञ्चमी मध्याह्न का क्षण 12.10 पञ्चमी तिथि प्रारम्भ जनवरी २२, २०२६ को २६:२८+ बजे जनवरी २३, २०२६ पञ्चमी तिथि समाप्त 25:46+ লতা - ShareChat
सरस्वती मंदिर #पूजन विधि
पूजन विधि - सरस्वती मन्दिर 9T श्री शारदाम्बा मन्दिर कर्णाटक दक्षिण मूकाम्बिका मन्दिर एर्णाकुलम, केरल वर्दळ सरस्वती मन्दिर, मेदक, तेलंगाना सरस्वती मन्दिर, बासर, तेलंगाना TT श्री सरस्वती  क्षेत्रामु अनन्तसागर तेलंगाना सरस्वती मन्दिर 9T श्री शारदाम्बा मन्दिर कर्णाटक दक्षिण मूकाम्बिका मन्दिर एर्णाकुलम, केरल वर्दळ सरस्वती मन्दिर, मेदक, तेलंगाना सरस्वती मन्दिर, बासर, तेलंगाना TT श्री सरस्वती  क्षेत्रामु अनन्तसागर तेलंगाना - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - सरस्वती जयन्ती २३वाँ जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार देवी सरस्वती, विद्या एवं बुद्धि की देवी सरस्वती जयन्ती समय सरस्वती जयन्ती शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को वसन्त पञ्चमी शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को जनवरी २२, २०२६ को २६:२८+ बजे पञ्चमी तिथि प्रारम्भ पञ्चमी तिथि समाप्त - जनवरी २३, २०२६ को २५:४६+ बजे सरस्वती जयन्ती २३वाँ जनवरी २०२६ Friday शुक्रवार देवी सरस्वती, विद्या एवं बुद्धि की देवी सरस्वती जयन्ती समय सरस्वती जयन्ती शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को वसन्त पञ्चमी शुक्रवार, जनवरी २३, २०२६ को जनवरी २२, २०२६ को २६:२८+ बजे पञ्चमी तिथि प्रारम्भ पञ्चमी तिथि समाप्त - जनवरी २३, २०२६ को २५:४६+ बजे - ShareChat