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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#बद्रीनाथ 23 अप्रैल सुबह 8 बजे से वैदिक मंत्रों और पूरे विधि विधान से बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं
बद्रीनाथ - नौतपा कब से होगा शुरू? भीषण गर्मी से बचने के gi करें ये उपाए इस साल २५ मई से नौतपा शुरू हो रहा है, जो 2 जून तक चलेगा| इस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है और इसे मानसून के लिए शुभ माना जाता है। नौतपा में सूर्य भगवान की आगमन के पूजा का खास महत्व होता है। भीषण गर्मी में दही , छाछ, लस्सी, बेल शरबत , नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का जितना हो सके उतना सेवन करना चाहिए। गर्म, मसालेदार, तले हुए और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। नौतपा कब से होगा शुरू? भीषण गर्मी से बचने के gi करें ये उपाए इस साल २५ मई से नौतपा शुरू हो रहा है, जो 2 जून तक चलेगा| इस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है और इसे मानसून के लिए शुभ माना जाता है। नौतपा में सूर्य भगवान की आगमन के पूजा का खास महत्व होता है। भीषण गर्मी में दही , छाछ, लस्सी, बेल शरबत , नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का जितना हो सके उतना सेवन करना चाहिए। गर्म, मसालेदार, तले हुए और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। - ShareChat
#नौतपा की आरंभ और उसके बचाव
नौतपा की आरंभ और उसके बचाव - नौतपा कब से होगा शुरू? भीषण गर्मी से बचने के gi करें ये उपाए इस साल २५ मई से नौतपा शुरू हो रहा है, जो 2 जून तक चलेगा| इस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है और इसे मानसून के लिए शुभ माना जाता है। नौतपा में सूर्य भगवान की आगमन के पूजा का खास महत्व होता है। भीषण गर्मी में दही , छाछ, लस्सी, बेल शरबत , नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का जितना हो सके उतना सेवन करना चाहिए। गर्म, मसालेदार, तले हुए और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। नौतपा कब से होगा शुरू? भीषण गर्मी से बचने के gi करें ये उपाए इस साल २५ मई से नौतपा शुरू हो रहा है, जो 2 जून तक चलेगा| इस दौरान भीषण गर्मी पड़ती है और इसे मानसून के लिए शुभ माना जाता है। नौतपा में सूर्य भगवान की आगमन के पूजा का खास महत्व होता है। भीषण गर्मी में दही , छाछ, लस्सी, बेल शरबत , नारियल पानी और तरबूज जैसी ठंडी चीजों का जितना हो सके उतना सेवन करना चाहिए। गर्म, मसालेदार, तले हुए और मांसाहारी भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #व्रत एवं त्योहार #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 24-04-26  दुर्गाष्टमी मासिक शुक्रवार जिस दिन मां भगवती ने स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल के पापों से मुक्ति दिलाई थी उस दिन से ही दुर्गा  महिषासुर 7 लोक को अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ| मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा पूजन करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। का व्रत, जिस दिन मां भगवती ने स्वर्ग लोक, लोक और पाताल लोक को y2d} ; महिषासुर के पापों से मुक्ति दिलाई थी उस दिन से ही दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ। ৯ থুনল ' पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का उपवास किया हर महीने के दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी जाता है, मासिक दुर्गाष्टमी कष्ट दूर होते हैं। और लाल पुष्प इस दिन धुप और दीपक जला कर माँ को अक्षत, R इस दिन माँ दुर्गा के मन्त्र दुं दुर्गायै नमः का जाप करना और శGIHT శIfగu दुर्गा चालीसा पाठ करने का भी विशेष महत्त्व है। सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिये दुर्गाष्टमी के दिन देवी दुर्गा को हलवे और उबले चने का भोग लगाना चाहिये। 24-04-26  दुर्गाष्टमी मासिक शुक्रवार जिस दिन मां भगवती ने स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल के पापों से मुक्ति दिलाई थी उस दिन से ही दुर्गा  महिषासुर 7 लोक को अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ| मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा पूजन करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। का व्रत, जिस दिन मां भगवती ने स्वर्ग लोक, लोक और पाताल लोक को y2d} ; महिषासुर के पापों से मुक्ति दिलाई थी उस दिन से ही दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ। ৯ থুনল ' पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी का उपवास किया हर महीने के दिन मां दुर्गा का व्रत, पूजन करने से सभी जाता है, मासिक दुर्गाष्टमी कष्ट दूर होते हैं। और लाल पुष्प इस दिन धुप और दीपक जला कर माँ को अक्षत, R इस दिन माँ दुर्गा के मन्त्र दुं दुर्गायै नमः का जाप करना और శGIHT శIfగu दुर्गा चालीसा पाठ करने का भी विशेष महत्त्व है। सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिये दुर्गाष्टमी के दिन देवी दुर्गा को हलवे और उबले चने का भोग लगाना चाहिये। - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - अप्रैल २४, २०२६, शुक्रवार मासिक दुर्गाष्टमी वैशाख, शुक्ल अष्टमी अप्रैल २३ को २०:४९ बजे प्रारम्भ शुक्ल अष्टमी अप्रैल २४ को १९:२१ बजे समाप्त अप्रैल २४, २०२६, शुक्रवार मासिक दुर्गाष्टमी वैशाख, शुक्ल अष्टमी अप्रैल २३ को २०:४९ बजे प्रारम्भ शुक्ल अष्टमी अप्रैल २४ को १९:२१ बजे समाप्त - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #व्रत एवं त्योहार #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 24-04-26 देवी बगलामुखी प्राकट्योत्सव शुक्रवार वैशाख शुक्ल अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण दिवस  मनाया जाता है, पीले पुष्प और नारियल चढाने चढ़ाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं। माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। भय ऊँ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ऊँ नमः देवी बगलामुखी का प्राकट्योत्सव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, इस बार यह तिथि २४ अप्रैल को है। माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं, अर्थात यह अपने भक्तों के और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। भय को दूर करके থান্তুঙী  इन्हें युद्ध और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी माना जाता है। वशीकरण और कीलन की शक्ति देने वाली माँ बगलामुखी के पीतांबरा, ब्रह्मास्त्र रूपिणी आदि नाम भी हैं। बगलामुखी i रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अतः साधक को देवी का बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना माता चाहिए। 24-04-26 देवी बगलामुखी प्राकट्योत्सव शुक्रवार वैशाख शुक्ल अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण दिवस  मनाया जाता है, पीले पुष्प और नारियल चढाने चढ़ाने से देवी प्रसन्न होतीं हैं। माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्तों के को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। भय ऊँ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ऊँ नमः देवी बगलामुखी का प्राकट्योत्सव वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, इस बार यह तिथि २४ अप्रैल को है। माँ बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री हैं, अर्थात यह अपने भक्तों के और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं। भय को दूर करके থান্তুঙী  इन्हें युद्ध और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी माना जाता है। वशीकरण और कीलन की शक्ति देने वाली माँ बगलामुखी के पीतांबरा, ब्रह्मास्त्र रूपिणी आदि नाम भी हैं। बगलामुखी i रंग स्वर्ण के समान पीला होता है अतः साधक को देवी का बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना माता चाहिए। - ShareChat
#पूजन विधि
पूजन विधि - देवी बगलामुखी जयन्ती कथा वक्ष्यामि देवेशि बगलोत्पत्तिकारणम्। पुरा कृतयुगे देवि वातक्षोभ उपस्थिते ।l  3வ महात्रिपुरसुन्दरी II  चराडचरविनाशाय विष्णुश्चिन्तापरायणः | तपस्यया च सन्तुष्टा हरिद्राख्यं सरो दृष्ट्वा जलक्रीडापरायणा| महापीतहृदस्याउन्ते सौराष्ट्रे बगलाम्बिका II श्रीविद्यासम्भवं तेजो विजृम्भति इतस्ततः | चतुर्दशी भौमयुता मकारेण समन्विता ।l  कुल ऋृक्ष समायुक्ता वीररात्रिः प्रकीर्तिता। तस्यामेवाडर्ध्दरात्रौ वा पीतह्रदनिवासिना।।  ब्रह्मास्त्रविद्या सञ्जाता त्रैलोक्यस्तम्भनी परा। तत्तेजो विष्णुजं तेजो विद्याडनुविद्ययोर्गतम्।।  भगवान शिव देवी से कहते हैं, प्राचीन काल में, कृत युग (सत्य युग) के समय पृथ्वी पर अत्यन्त भीषण चक्रवात सम्पूर्ण पृथ्वी को नष्ट करने लगा विष्णु चिन्तित हो उठे कि यदि, इस भगवान शक्तिशाली चक्रवात को शान्त न किया गया तो यह सृष्टि का विनाश कर सकता है। सम्पूर्ण : fg  चक्रवात रुपी घनघोर संकट के निवारण हेतु भगवान कठोर तपस्या में लीन हो गये। विष्णु 7 द्वारा सहस्र वर्षों की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी महात्रिपुरा ने उस भगवान देवी माँ की दृष्टि समीप के सरोवर पर पडी, भीषण चक्रवात का शमन कर दिया। तदोपरान्त जिसका नाम हरिद्रा सरोवर है। देवी माता उस सरोवर में जलक्रीड़ा करने लगीं| तदोपरान्त सौराष्ट्र  की मध्य रात्रि उस पीले सरोवर से एक नामक स्थान में, कृष्ण पक्ष  समीप के चतुर्दशी  तेजोमयी देवी प्रकट हुयीं। शास्त्रों के अनुसार वह मंगलवार का दिन था। तन्त्र सम्बन्धी ग्रन्थों में इस महान रात्रि को 'वीररात्रि के नाम से वर्णित किया गया है। हालाँकि, बगलामुखी जयन्ती वैशाख शुक्ल अष्टमी को ही मनाई जाती है। देवी बगलामुखी आठवीं सिद्धविद्या हैं, जिन्हें बगलाम्बिका भी कहा जाता है। देवी बगलामुखी जयन्ती कथा वक्ष्यामि देवेशि बगलोत्पत्तिकारणम्। पुरा कृतयुगे देवि वातक्षोभ उपस्थिते ।l  3வ महात्रिपुरसुन्दरी II  चराडचरविनाशाय विष्णुश्चिन्तापरायणः | तपस्यया च सन्तुष्टा हरिद्राख्यं सरो दृष्ट्वा जलक्रीडापरायणा| महापीतहृदस्याउन्ते सौराष्ट्रे बगलाम्बिका II श्रीविद्यासम्भवं तेजो विजृम्भति इतस्ततः | चतुर्दशी भौमयुता मकारेण समन्विता ।l  कुल ऋृक्ष समायुक्ता वीररात्रिः प्रकीर्तिता। तस्यामेवाडर्ध्दरात्रौ वा पीतह्रदनिवासिना।।  ब्रह्मास्त्रविद्या सञ्जाता त्रैलोक्यस्तम्भनी परा। तत्तेजो विष्णुजं तेजो विद्याडनुविद्ययोर्गतम्।।  भगवान शिव देवी से कहते हैं, प्राचीन काल में, कृत युग (सत्य युग) के समय पृथ्वी पर अत्यन्त भीषण चक्रवात सम्पूर्ण पृथ्वी को नष्ट करने लगा विष्णु चिन्तित हो उठे कि यदि, इस भगवान शक्तिशाली चक्रवात को शान्त न किया गया तो यह सृष्टि का विनाश कर सकता है। सम्पूर्ण : fg  चक्रवात रुपी घनघोर संकट के निवारण हेतु भगवान कठोर तपस्या में लीन हो गये। विष्णु 7 द्वारा सहस्र वर्षों की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी महात्रिपुरा ने उस भगवान देवी माँ की दृष्टि समीप के सरोवर पर पडी, भीषण चक्रवात का शमन कर दिया। तदोपरान्त जिसका नाम हरिद्रा सरोवर है। देवी माता उस सरोवर में जलक्रीड़ा करने लगीं| तदोपरान्त सौराष्ट्र  की मध्य रात्रि उस पीले सरोवर से एक नामक स्थान में, कृष्ण पक्ष  समीप के चतुर्दशी  तेजोमयी देवी प्रकट हुयीं। शास्त्रों के अनुसार वह मंगलवार का दिन था। तन्त्र सम्बन्धी ग्रन्थों में इस महान रात्रि को 'वीररात्रि के नाम से वर्णित किया गया है। हालाँकि, बगलामुखी जयन्ती वैशाख शुक्ल अष्टमी को ही मनाई जाती है। देवी बगलामुखी आठवीं सिद्धविद्या हैं, जिन्हें बगलाम्बिका भी कहा जाता है। - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - बगलामुखी जयन्ती २४वाँ अप्रैल २०२६ Friday शुक्रवार देवी बगलामुखी बगलामुखी जयन्ती मुहूर्त बगलामुखी जयन्ती शुक्रवार, अप्रैल २४, २०२६ को अष्टमी तिथि प्रारम्भ अप्रैल २३, २०२६ 20:49 লতী अष्टमी तिथि समाप्त अप्रैल २४, २०२६ को १९:२१ লতী बगलामुखी जयन्ती २४वाँ अप्रैल २०२६ Friday शुक्रवार देवी बगलामुखी बगलामुखी जयन्ती मुहूर्त बगलामुखी जयन्ती शुक्रवार, अप्रैल २४, २०२६ को अष्टमी तिथि प्रारम्भ अप्रैल २३, २०२६ 20:49 লতী अष्टमी तिथि समाप्त अप्रैल २४, २०२६ को १९:२१ লতী - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - २३, वेशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी 24 13ತ २०८३ सिद्घार्थी, विक्रम सम्वत अपेल २०२६ शुकवार वाराणसी भारत बगलामुखी जयन्ती, मासिक दुर्गाष्टमी भद्रा, गण्ड मूल रवि योग, आडल योग  रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न पञ्चक  रहित़ मुहूर्त के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज के दिन के लिए पञ्चक आज १०   मेष - अप्रैल २३ को २९:०१+ बजे से 0६:३९ থুল্স মুচুন - 05:28 স 06:39  ४ वृषभ - ०६:३९ से 08:३६ चोर पञ्चक 06:39 ম 08:36  T সিথুন - ( शुभ मुहूर्त - ०8:३६ 10:50 08:36 স 10:50 % रोग पञ्चक 10:50 13:08 कर्क 10:50 713:08 ४ी   सिंह 13:08 15:22 मुहूर्त - शुभ 13:08 ম 15:22  ೨ 15:22 ম 17:35  मृत्यु पञ्चक 15:22 স 17:35  कन्या अग्नि पञ्चक 17:35 19:21 तुला - १७:३५  19.51 19:21 19.51 मुहूर्त - शुभ वृश्चिक - १९:५१ 22.08 19:51 20:14 रज पञ्चक 43- 22:08 #24:13+ 20:14 22:08 मुहूर्त - T शुभ 25:58+ 24:13+ मकर चोर पञ्चक 22:08 24:13+ ಜ कुम्भ - २५:५8+ 27:28+ 25:58+ 24:13+ 38- शुभ ) সীন - 27:28+ 28:57+ रोग पञ्चक 25:58+ 27:28+ 27:28+ 28:57+ मुहूर्त - शुभ शुभ मुहूर्त - २8:५७+ 29:27+ २३, वेशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी 24 13ತ २०८३ सिद्घार्थी, विक्रम सम्वत अपेल २०२६ शुकवार वाराणसी भारत बगलामुखी जयन्ती, मासिक दुर्गाष्टमी भद्रा, गण्ड मूल रवि योग, आडल योग  रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न पञ्चक  रहित़ मुहूर्त के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज के दिन के लिए पञ्चक आज १०   मेष - अप्रैल २३ को २९:०१+ बजे से 0६:३९ থুল্স মুচুন - 05:28 স 06:39  ४ वृषभ - ०६:३९ से 08:३६ चोर पञ्चक 06:39 ম 08:36  T সিথুন - ( शुभ मुहूर्त - ०8:३६ 10:50 08:36 স 10:50 % रोग पञ्चक 10:50 13:08 कर्क 10:50 713:08 ४ी   सिंह 13:08 15:22 मुहूर्त - शुभ 13:08 ম 15:22  ೨ 15:22 ম 17:35  मृत्यु पञ्चक 15:22 স 17:35  कन्या अग्नि पञ्चक 17:35 19:21 तुला - १७:३५  19.51 19:21 19.51 मुहूर्त - शुभ वृश्चिक - १९:५१ 22.08 19:51 20:14 रज पञ्चक 43- 22:08 #24:13+ 20:14 22:08 मुहूर्त - T शुभ 25:58+ 24:13+ मकर चोर पञ्चक 22:08 24:13+ ಜ कुम्भ - २५:५8+ 27:28+ 25:58+ 24:13+ 38- शुभ ) সীন - 27:28+ 28:57+ रोग पञ्चक 25:58+ 27:28+ 27:28+ 28:57+ मुहूर्त - शुभ शुभ मुहूर्त - २8:५७+ 29:27+ - ShareChat