श्यामा
1K views 1 months ago
इसमें कोई शक नहीं है कि कोई ना कोई ऐसी अदृश्य शक्ति अवश्य है, जो इस संसार का नियंत्रण कर रही है। वह निराकार और साकार दोनों रूपों को धारण करता है । "मानो या न मानो, लेकिन ईश्वर की शक्ति (Divine Power) सर्वोपरि है। "यह वाक्य उस असीम ऊर्जा को दर्शाता है जो इस ब्रह्मांड को चला रही है। विज्ञान भी अब मानता है कि इस सृष्टि के पीछे एक बहुत बड़ी ऊर्जा (Energy) है, जिसे आध्यात्मिकता में 'ईश्वर' कहा जाता हैं। परमात्मा की उस अदृश्य शक्ति को चेतना, ऊर्जा, या पराशक्ति कहा जाता है जो पूरे ब्रह्मांड को संचालित करती है। भगवान ने भगवद्गीता में कहा है.... सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥ अर्थ: हे अर्जुन! संपूर्ण प्राणियों के हृदय में ईश्वर (परमात्मा) स्थित हैं और अपनी माया से इस शरीर रूपी यंत्र पर आरूढ़ हुए सभी प्राणियों को (कर्मों के अनुसार) भ्रमण करा रहे हैं। यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति ।तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥ अर्थ: जो मुझे सब जगह देखता है और सब कुछ मुझमें देखता है, उसके लिए मैं कभी अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिए कभी अदृश्य नहीं होता। अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः ।अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥ अर्थ: हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित सबका अपना (आत्मा) हूँ। मैं ही सब प्राणियों की उत्पत्ति, स्थिति और अंत (प्रलय) का कारण हूँ। रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः ।प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु ॥ अर्थ: हे कुंतीपुत्र (अर्जुन)! मैं जल में रस हूँ, सूर्य और चंद्रमा में प्रकाश हूँ, वेदों में ओंकार (ॐ) हूँ, आकाश में शब्द हूँ और मनुष्यों में पौरुष (सामर्थ्य) हूँ। यह अदृश्य शक्ति हर कण में व्याप्त है। #❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #🌙 गुड नाईट #परमात्मा #जय श्रीकृष्ण #राधा रानी
57 likes
22 shares

More like this