दुनिया नहीं जानती है
प्रेम का अर्थ
देह से परे सोचने वाले नहीं रहे
देवों से अधिक
प्रेयसी/प्रिय को पूजने वाले
बीती शताब्दियों में दब गये
मैं न जाने क्या हृदय में लेकर
चल रहा हूँ
ढूंढ रहा हूँ प्रेम का बिखरा कण
संभवतः मुझमें बच गया कोई देव
या वह प्रेमी जो पूजता था प्रेम
प्रेम जिसका अर्थ
नहीं जानती है दुनिया
दुनिया जिसमें नहीं है मुझ-से
किसी का स्थान,
हा! ये अभागी दुनिया...
प्रेम का ऐसा अंत।
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कुछ कहना सुनना छोड़ दिया हमने
तेरा इंतज़ार करना छोड़ दिया हमने
अपनी भावनाएं कुचल कर के
आंखों की नमी को रोक लिया हमने
हम मिलेंगे कभी जिंदगी में
इस आस को छोड़ दिया हमने
जिस आइने में तेरी तस्वीर दिखे
हर उस आइने को छोड़ दिया हमने
आज से नयी रिवायत शुरू की है हमने
अपने दिल को सुनना छोड़ दिया हमने
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कितना प्रेम होता होगा
उस हृदय में,
जो खुद ही मान जाए
कुछ पल
नाराज़ होने के बाद।
वो नाराज़गी भी
शिकायत नहीं होती,
बस डर होता है
कहीं अपनापन
कम न हो जाए।
ज़िंदगी भी यही सिखाती है
जो रिश्ते टूटने से ज़्यादा
सुलझने में यक़ीन रखते हैं,
वही रिश्ते
सबसे गहरे होते हैं।
क्योंकि जहाँ प्रेम होता है,
वहाँ मैं नहीं,
हम जीत जाते हैं।
Good night Ji 🌃😴
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जो प्रेम की हद से
पार है, वो नाम है राधा,
जो हर भक्त का आधार
है, वो नाम है राधा।
श्याम भी तरसते हैं
जिसे पाने के लिए,
ब्रह्मांड का जो सार है,
वो नाम है राधा॥
कहीं मुरली की मीठी
तान में तुम बसी हो,
कहीं यमुना की उठती
लहरों में तुम हंसी हो।
कान्हा के नयनों में
जो छलकती है हर पल,
वो करुणा भरी मुस्कान
और कहानी है राधा॥
किसी ने पूजा, किसी
ने इसे समर्पण कहा,
किसी ने त्याग तो किसी
ने इसे दर्पण कहा।
पर पूछो उस सांवले से,
जिसकी रूह में तुम हो,
उसके लिए तो दुनिया
और जिंदगानी है राधा ।।
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प्रेम,..
तब तलक प्रेम है
जब तलक रहता है अनकहा,अनछुआ
जिस रोज़
बयां हो जाता है शब्दों में
आ जाता है दिल से जुबां तक
खो बैठता है स्वरूप अपना..
#प्रेम
स्वास है, धड़कन है,अहसास है
जो स्वयं समाहित है प्राण बनकर
प्रेम को पाने के लिये
प्रेम में होना ही पर्याप्त है..!
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मन मे उपज रही
विरह कविताओं को त्यागकर...
मैं कभी कभी
प्रेम कवितायें इसलिये भी लिख देती हूँ
ताकि उन लोगो का
भरोसा कायम रहे प्रेम पर
जो इस वक़्त प्रेम में हैं...!
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एक प्यारी सी बिंदी...!
बिखरी सी....सँवरी सी...ज़ुल्फें...!!
एक झुमका बहका हुआ... और !
हल्की सी मुस्कान तुम्हारे होंठों पर...!!
तुम समझ नहीं आती लेकिन...!
कसम से.. मुझे, पसंद बहुत आती हो...!!
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प्रेम पाना
नियति है...
प्रेम खोना भी
नियति है...
प्रेम खो कर
प्रेम से जुड़े रहना..
खुले पिंजरे में
बैठे पंछी की..
रूकी सी मुक्ति है..
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😘बस तुम और मैं #सिर्फ तुम #🌙 गुड नाईट #💓 मोहब्बत दिल से
जिनसे मिलकर मन स्थिर हो जाए, जिनकी उपस्थिति में सोच सहज हो और भीतर कोई खिंचाव न हो... वही सही संग है। सही संग वह नहीं जो सिर्फ हँसी या बातचीत दे, बल्कि वह है जो भीतर की उथल-पुथल को शांत कर दे। जहाँ दिखावा नहीं, दबाव नहीं, और खुद को साबित करने की जरूरत न पड़े। ऐसे संबंधों में शब्द कम और अनुभूति गहरी होती है। जब मन स्थिर रहता है, तो निर्णय स्पष्ट होते हैं, भावनाएँ संतुलित रहती हैं और जीवन अपनी लय में चलने लगता है। इसलिए लोगों को उनके व्यवहार से नहीं, उनके साथ अपने मन की स्थिति से पहचानिए... क्योंकि सही संग वही है, जो आपको अपने भीतर से जोड़ दे।
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