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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - accoook Pt Vijayshankar Menta शब्दोंका जाढ कहने और समझने में फर्क ಸರಮ್ವಾ೯ಕ फूल कहा झरते फूलों को- शिउली को, मोगरे को  मैंने गुलाब और बोगनवेलिया को किताबों में सम्हाले रक्खा  मुस्कराते फूलों को ! चाहा सिर्फ पौधे पर 3# तुमने मुझे फूल तों कहा पर मेरे गिरने पर मुझे नहीं सम्हाला। तुमने मुझे चांद कहा मैँने समझीं चांद की सोलह कलाएं कभी घटता , कभी बढ़ता पर हर शब में खूबसूरत चांद तुमने चाहा सिर्फ चमकता पूर्णमासी का पूरा चांद ! तुमने मुझे चांद तो कहा पर मेरे अंधेरे में डूबने पर मुझे नहीं निकाला तुम्हारे कहने और मेरे समझने में फर्क रहा जब तुमने कहा इनकार मैंने सुना इंतजार लेकिन मुझे मालूम है जिस मुझे ठौक से सुनना नहीं आता पूरी कविता को तरह तुम्हें भी तो ठीक से कहना नहीं पढने के लिए आता  QR कोड को -कल्पना सुथार , श्रीगंगानगर स्कैन करें। ೪ accoook Pt Vijayshankar Menta शब्दोंका जाढ कहने और समझने में फर्क ಸರಮ್ವಾ೯ಕ फूल कहा झरते फूलों को- शिउली को, मोगरे को  मैंने गुलाब और बोगनवेलिया को किताबों में सम्हाले रक्खा  मुस्कराते फूलों को ! चाहा सिर्फ पौधे पर 3# तुमने मुझे फूल तों कहा पर मेरे गिरने पर मुझे नहीं सम्हाला। तुमने मुझे चांद कहा मैँने समझीं चांद की सोलह कलाएं कभी घटता , कभी बढ़ता पर हर शब में खूबसूरत चांद तुमने चाहा सिर्फ चमकता पूर्णमासी का पूरा चांद ! तुमने मुझे चांद तो कहा पर मेरे अंधेरे में डूबने पर मुझे नहीं निकाला तुम्हारे कहने और मेरे समझने में फर्क रहा जब तुमने कहा इनकार मैंने सुना इंतजार लेकिन मुझे मालूम है जिस मुझे ठौक से सुनना नहीं आता पूरी कविता को तरह तुम्हें भी तो ठीक से कहना नहीं पढने के लिए आता  QR कोड को -कल्पना सुथार , श्रीगंगानगर स्कैन करें। ೪ - ShareChat