Sarvesh Kumar Maurya
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#VISHWA MAURYA PARISHAD #विश्व मौर्य परिषद उत्तर प्रदेश #विश्व मौर्य परिषद अखंड भारत मौर्य समाज, सत्ता और सामाजिक न्याय : एक गंभीर प्रश्न
उत्तर प्रदेश के कई जिलों से समय-समय पर ऐसी खबरें सामने आती रही हैं, जहाँ कमजोर और पिछड़े वर्गों की जमीनों पर दबंगों द्वारा कब्ज़ा करने, प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगते रहे हैं। फतेहपुर सहित कई स्थानों पर मौर्य समाज के लोगों के बीच यह पीड़ा गहराती जा रही है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। जब कोई व्यक्ति अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए टावर पर चढ़कर आत्महत्या की चेतावनी देने को मजबूर हो जाए, तो यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए चेतावनी बन जाती है।
लोकतंत्र में सत्ता का उद्देश्य जनता को सुरक्षा और न्याय देना होता है, न कि भय और असमानता का वातावरण बनाना। यदि किसी भी वर्ग को यह महसूस होने लगे कि प्रशासन केवल प्रभावशाली लोगों की सुनता है और गरीब, पिछड़े तथा कमजोर वर्गों की आवाज दबा दी जाती है, तो लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होने लगती हैं। मौर्य समाज के अनेक लोग आज यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी आवाज़ क्यों अनसुनी रह जाती है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन समुदायों ने वर्षों तक मेहनत कर अपनी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई, वही समुदाय आज खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। सत्ता किसी एक जाति या वर्ग की नहीं होती, वह जनता के विश्वास से बनती है। यदि जनता को न्याय नहीं मिलेगा, तो असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा।
आज आवश्यकता किसी जातीय संघर्ष को बढ़ाने की नहीं, बल्कि न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने की है। किसी भी समाज की ताकत उसकी एकता, शिक्षा, संगठन और कानूनी जागरूकता में होती है। भावनात्मक नारों से ज्यादा जरूरी है कि समाज अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संगठित हो।
मौर्य समाज को चाहिए कि वह अपने युवाओं को शिक्षा, प्रशासन, कानून और राजनीति में आगे बढ़ाए। जब समाज का प्रतिनिधित्व हर क्षेत्र में मजबूत होगा, तभी उसकी आवाज भी प्रभावशाली बनेगी। केवल चुनावों में समर्थन देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान के लिए निरंतर जागरूक रहना भी जरूरी है।
यदि कहीं जमीन कब्जाने, प्रशासनिक पक्षपात या उत्पीड़न जैसी घटनाएँ हो रही हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी जाति या प्रभावशाली वर्ग से जुड़े हों। कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यही संविधान की मूल भावना है।
समाज को यह भी समझना होगा कि आपसी नफरत और जातीय टकराव किसी समस्या का समाधान नहीं है। संघर्ष होना चाहिए अन्याय के खिलाफ, न कि किसी जाति विशेष के खिलाफ। क्योंकि हर समाज में अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के लोग होते हैं।
आज जरूरत है कि मौर्य समाज भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर संगठित सामाजिक चेतना विकसित करे। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाए, लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करे, और आने वाली पीढ़ियों को इतना सक्षम बनाए कि कोई भी व्यवस्था उनकी अनदेखी करने का साहस न कर सके।
एक जागरूक, शिक्षित और संगठित समाज ही अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा कर सकता है।
आच. सर्वेश कुमार मौर्य जी राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व मौर्य परिषद
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