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#पगली इन क्षीण बाहुओं में
पगली इन क्षीण बाहुओं में - पगली इन क्षीण बाहुओं में कैसे यों कस कर रख लोगी एक, एक एक क्षणको केवल थे मिले प्रणय के चपल श्वास भोली हो, समझ लिया तुमने सब दिन को अब गुंथ गये पाश स्वच्छंद सदा मै मारुतनसा तुम कैसे कर लोगी वश में लतिकाओं के नित तोड पाश उठते ईस उपवन के ससाल ठुकरा चरणाश्रित लहरों को उड जाते मानस के मरल फिर कहो, मिलन रात तुम्हारी  सब दिन की होगी 8 & मै तो चिर पथिक प्रवासी हू था ईतना ही निवास मेरा रोकर मत रोको राह, विवश यह पारदन्पद जीवन I राका तो एक चरण रानी पूनों थी, मावश भी होगी वे भूलूँगा कभी R जीवन भर 7 उपहार मधमय पगली इन क्षीण बाहुओं में कैसे यों कस कर रख लोगी एक, एक एक क्षणको केवल थे मिले प्रणय के चपल श्वास भोली हो, समझ लिया तुमने सब दिन को अब गुंथ गये पाश स्वच्छंद सदा मै मारुतनसा तुम कैसे कर लोगी वश में लतिकाओं के नित तोड पाश उठते ईस उपवन के ससाल ठुकरा चरणाश्रित लहरों को उड जाते मानस के मरल फिर कहो, मिलन रात तुम्हारी  सब दिन की होगी 8 & मै तो चिर पथिक प्रवासी हू था ईतना ही निवास मेरा रोकर मत रोको राह, विवश यह पारदन्पद जीवन I राका तो एक चरण रानी पूनों थी, मावश भी होगी वे भूलूँगा कभी R जीवन भर 7 उपहार मधमय - ShareChat