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#कबीर के दोहे #👌 दोहे
कबीर के दोहे - कबी२ के दोहे CoourohtO5soயo दुखव में अमिरन अब करें॰ अख में करै न कोय। जो अखव में अमिबन करे दुखव काहे को होय।। तिनका कबहेँ ना निदिये जो पीट तले होय। कबह उड़ औ२यों पडेपी२ घनेवी होय।। माला फेरत जुंग भया, फिरा गा मन का फे२। chl  Hal cbl 513 &, Hol chl  Molchl th31 co२ गु२० गोविग्द दोनों बवडे, काक लाग्रूं पौय। बलिहारी गु॰॰ आपनो, गोविन्द दियो बताया। बलिहारी गु॰॰ आपनो, घडी घड़ी ओ ओ बा२। मानुष से देवत किथा करत न लागी बा२ा। Copyrightelsomny eomu कबी२ माला मर्नाहे की॰ ओ२ असारी भी२या চবি সিল गले रहट क देश्या। माला अख में अमिरब ना किया, दुःखय में किया याद। कह कबी२ ता दाश की॰ कौन शुने फरियादा page1 कबी२ के दोहे CoourohtO5soயo दुखव में अमिरन अब करें॰ अख में करै न कोय। जो अखव में अमिबन करे दुखव काहे को होय।। तिनका कबहेँ ना निदिये जो पीट तले होय। कबह उड़ औ२यों पडेपी२ घनेवी होय।। माला फेरत जुंग भया, फिरा गा मन का फे२। chl  Hal cbl 513 &, Hol chl  Molchl th31 co२ गु२० गोविग्द दोनों बवडे, काक लाग्रूं पौय। बलिहारी गु॰॰ आपनो, गोविन्द दियो बताया। बलिहारी गु॰॰ आपनो, घडी घड़ी ओ ओ बा२। मानुष से देवत किथा करत न लागी बा२ा। Copyrightelsomny eomu कबी२ माला मर्नाहे की॰ ओ२ असारी भी२या চবি সিল गले रहट क देश्या। माला अख में अमिरब ना किया, दुःखय में किया याद। कह कबी२ ता दाश की॰ कौन शुने फरियादा page1 - ShareChat