संजय सिंह
जय श्री नीलकंठ भगवान 🙏
सुप्रभात मित्रो
आपका दिन शुभ हो!
सुनो प्रिय
मौन में मैं स्वयं से बात करता हूं एकांत में स्वयं को गले लगाता हूं और शांत विरह में तुम्हें पूजता हूं तुम चली गई हो पर तुम्हारी जगह छोड़ गई खाली जगह अब मेरी सबसे प्यारी साथिन बन गई है यहां कोई शोर नहीं कोई हलचल नहीं केवल एक गहरी शांति है जो पीड़ा को भी प्रेम में परिवर्तित कर देती है शायद यही विरह का अंतिम रूप है जब मन चीखना बंद कर देता है और शांत होकर हृदय में बस जाता है मैं अब डरता नहीं हूं इस मौन से इस एकांत से इस शांत विरह से क्योंकि इनमें ही तुम्हारी सबसे सच्ची उपस्थिति छिपी है जो शब्दों से परे है जो आंसुओं से परे है जो केवल महसूस की जा सकती है हे मौन हे एकांत हे शांत विरह तुम तीनों मिलकर मुझे सिखा रहे हो कि प्रेम कभी मरता नहीं वह केवल रूप बदल लेता है कभी चीख बनकर कभी आंसू बनकर और अंत में शांत विरह बनकर हृदय में अमर हो जाता है मैं आज तुम्हारे बिना पूरा हूं पर तुम्हारे साथ अधूरा हूं और इसी अधूरेपन में मुझे एक अनोखी पूर्णता मिल गई है मै वास्तविक अब ख़ुश हूं!
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संजय सिंह गुर्जर मेरठ... #gurjar #shiv #शिव #महाकाल #महाकाल महाकाल दरबार