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#डाॅ.बाबासाहेब अम्बेडकर
डाॅ.बाबासाहेब अम्बेडकर - पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि अपने समाज को अंधविश्वास एवं अज्ञानता के दलदल से बाहर न निकाल पाए तो उसके शिक्षित होने का कोई अर्थ नहीं है। डॉ. भीमराव आंबेडकर पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि अपने समाज को अंधविश्वास एवं अज्ञानता के दलदल से बाहर न निकाल पाए तो उसके शिक्षित होने का कोई अर्थ नहीं है। डॉ. भीमराव आंबेडकर - ShareChat