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##@જય શ્રી હરિ** ##@નમો નારાયણ** ##@જય શ્રી લક્ષ્મી નારાયણ**
#@જય શ્રી લક્ષ્મી નારાયણ** - f भगवान के चार दिव्य स्वरूप [ বিচ্ঘ]  सनातन धर्म गें भगवान सृष्टि के पालनहार हें। वे न्रि्दवों  fau] महेश) में से एक हें (6 सृष्टि के संचालक के रूप में और उनका कार्य है उस ब्रह्माड की सृष्टि का संतुलन  रक्षा करना यनाए रखना तथा समय ्समय पर अघर्म का नाश करके घर्मकी स्थापना करना। हालोकि लोग अक्सर भगवान विष्णु " को उनके दशावतारों  माध्यम से जानते हेॅ॰ लेकिन इन अवतारों से इतर उनके चार दिव्य  स्वरूप भी हैं॰ जो सृष्टि के गहन रहस्यों से ತರತಕ विष्णु 7 के चार दिव्य स्वरूप JIqIஎ [ বিষ্ু TETfqu  विष्णु   विष्णु  अंतर्यामी गर्भोदकशायी ३. क्षीरोदकशायी (Kshlrodakshayl Vshnu) (Maha Vishnu)' (Garblodakashayl Vishnul (Antaryami Vishnu) শ্থিনি: সমেক বমাs ক মমরিক . सतिः ६ीरसागर (Ocean of Milk) स्थितिः प्रन्येक जीवके हदय मे स्थितिः कारण जल ( Causal Oceanl समद आत्मा कै साथ रहना, उसे दिशा  ক্রাণ: গনব বমাভা কী মৃ্ছি ক্রনো  कार्पः   अवतारा के रपरने प्रकट होना  কাণ: মুঞ্ছিক্রী का्यः हरब्रहमाड के भीतर देना,  पर्मीनुसार प्रेरित करना  जीवा का अंताकरण म नियास करना " शुरआत करना  गढाविण्णु कारण सागर मे पोगनिद्रा म स्यित amumifuKhcfihಉ7ಗ1Hith ' ப ]150 3-7518 याप स्वरुप समयन्समय पर अवतार लेता ६ ডেন 2 1 অন ঐ যাঁম চ্যীব্র ৫ নীওনক रुपने विपामान रहते ऐ।चै सही गोर महाथिचय उसमे प्रयेश य२ गर्भोदयरााची औरधर्म की स्चापना कतता ६। यह प्रत्यक शरीर फे रोमझर्पों से अमनिनत सहाड  गलत का याण करात  प्रत्यक कर्मका चिु का रूप णारण झरते ऐ। उनकी नाभि जीवरके उदय मे परमात्मा के रूप भे छोत र।  सभी रपारों यः जनयाता  3प7 H8i ಠar ೯ !1೯ ಃ0 ಹ ೯rdlH ವ21೯r{' ঢালা ৮ তিমন বরমা তা B73ma {C1 ! 32 4,52, #1ಗ ` CRC2 पर स्वय उन्न प्रवेश नही झरते। Jl ruld 81 ठोते 6 और सृष्टि की रचना कनते ४ { Trun ..1 Lrlmi FuMrr 4Xl <1 गग जी के उत्पति के सात  गलत का चोधकताना  8 A6ils 1 ಹr Va 61 नतावनी देना ( आतरिक आवाज)  भगवद गीता (५ १५  गर्भोटकशायी चिष्गु छोते ४ TTTIETTT (5.48)  "নরনযে মাচ চরি মলিবিদ্ী कमो कालसा ्जाखा रखन ते ढहाठ की स्यत रपना वे ಶನ 4 417 tn ೭ruin লিয সথাা সভান কনে ৮ स्मृर्तिजानमपोहन च। ಊn: f जय श्री हरि ऊ नमो नारायणाय नमः Anilkhigwan f भगवान के चार दिव्य स्वरूप [ বিচ্ঘ]  सनातन धर्म गें भगवान सृष्टि के पालनहार हें। वे न्रि्दवों  fau] महेश) में से एक हें (6 सृष्टि के संचालक के रूप में और उनका कार्य है उस ब्रह्माड की सृष्टि का संतुलन  रक्षा करना यनाए रखना तथा समय ्समय पर अघर्म का नाश करके घर्मकी स्थापना करना। हालोकि लोग अक्सर भगवान विष्णु " को उनके दशावतारों  माध्यम से जानते हेॅ॰ लेकिन इन अवतारों से इतर उनके चार दिव्य  स्वरूप भी हैं॰ जो सृष्टि के गहन रहस्यों से ತರತಕ विष्णु 7 के चार दिव्य स्वरूप JIqIஎ [ বিষ্ু TETfqu  विष्णु   विष्णु  अंतर्यामी गर्भोदकशायी ३. क्षीरोदकशायी (Kshlrodakshayl Vshnu) (Maha Vishnu)' (Garblodakashayl Vishnul (Antaryami Vishnu) শ্থিনি: সমেক বমাs ক মমরিক . सतिः ६ीरसागर (Ocean of Milk) स्थितिः प्रन्येक जीवके हदय मे स्थितिः कारण जल ( Causal Oceanl समद आत्मा कै साथ रहना, उसे दिशा  ক্রাণ: গনব বমাভা কী মৃ্ছি ক্রনো  कार्पः   अवतारा के रपरने प्रकट होना  কাণ: মুঞ্ছিক্রী का्यः हरब्रहमाड के भीतर देना,  पर्मीनुसार प्रेरित करना  जीवा का अंताकरण म नियास करना " शुरआत करना  गढाविण्णु कारण सागर मे पोगनिद्रा म स्यित amumifuKhcfihಉ7ಗ1Hith ' ப ]150 3-7518 याप स्वरुप समयन्समय पर अवतार लेता ६ ডেন 2 1 অন ঐ যাঁম চ্যীব্র ৫ নীওনক रुपने विपामान रहते ऐ।चै सही गोर महाथिचय उसमे प्रयेश य२ गर्भोदयरााची औरधर्म की स्चापना कतता ६। यह प्रत्यक शरीर फे रोमझर्पों से अमनिनत सहाड  गलत का याण करात  प्रत्यक कर्मका चिु का रूप णारण झरते ऐ। उनकी नाभि जीवरके उदय मे परमात्मा के रूप भे छोत र।  सभी रपारों यः जनयाता  3प7 H8i ಠar ೯ !1೯ ಃ0 ಹ ೯rdlH ವ21೯r{' ঢালা ৮ তিমন বরমা তা B73ma {C1 ! 32 4,52, #1ಗ ` CRC2 पर स्वय उन्न प्रवेश नही झरते। Jl ruld 81 ठोते 6 और सृष्टि की रचना कनते ४ { Trun ..1 Lrlmi FuMrr 4Xl <1 गग जी के उत्पति के सात  गलत का चोधकताना  8 A6ils 1 ಹr Va 61 नतावनी देना ( आतरिक आवाज)  भगवद गीता (५ १५  गर्भोटकशायी चिष्गु छोते ४ TTTIETTT (5.48)  "নরনযে মাচ চরি মলিবিদ্ী कमो कालसा ्जाखा रखन ते ढहाठ की स्यत रपना वे ಶನ 4 417 tn ೭ruin লিয সথাা সভান কনে ৮ स्मृर्तिजानमपोहन च। ಊn: f जय श्री हरि ऊ नमो नारायणाय नमः Anilkhigwan - ShareChat