sn vyas
#☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
|| अपने दुःख अप्रकट रखें ||
दुःख होने से भी दुःख प्रकट करना अधिक पीड़ादायी होता है।दुःख प्रकट करने से दुःख कभी कम नहीं होंगे लेकिन जहाँ-तहाँ अपने दुःख को प्रकट करने से दुःख हमारी पीड़ा को और अधिक बढ़ाने वाला ही है।जब हम किसी बात की बार-बार चर्चा करते हैं तो सुख हो अथवा दुःख उसका प्रभाव हमारी चर्या पर भी अवश्य पड़ता है।अपने दुःखों को कभी किसी के मनोरंजन का साधन ना बनने दें।
महापुरुषों ने तो उपदेश किया है कि,
रहिमन निज मन की व्यथा,
मन ही राखो गोय*
अर्थात अपने मन की व्यथा को मन में ही छुपा कर रखें क्योंकि उसका समाधान केवल आपसे ही निकलेगा। आप दुनिया को रो-रोकर अपना दुखड़ा सुनायेंगे लेकिन वही लोग हँस-हँसकर सबके सामने उसका बखान करेंगे। प्रभु पर विश्वास करें और धैर्य रखें सूर्यास्त हुआ है तो शीघ्र ही सूर्योदय भी अवश्य होगा ।